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कस्टमर केयर नंबर से भेजा जाए लिंक तो हो जाएं सावधान, ठगी के नए तरीके से लोगों को फंसा रहे हैं जालसाज

Sun, 21 Feb 2021 10:39 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 21 Feb 2021 10:39 AM IST
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Cyber frauds gets new way of crime sends remote access app link in the name of customer care
साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

अगर कस्टमर केयर के नंबर से आपको लिंक भेजकर एप डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है तो सावधान हो जाएं। यह कॉल किसी कंपनी का नहीं, बल्कि साइबर जालसाजों का है। साथ ही यह कोई सामान्य एप नहीं, बल्कि रिमोट एक्सेस एप है, जिसके जरिये साइबर जालसाज आपके मोबाइल का एक्सेस अपने हाथों में लेकर खातों से रकम के साथ-साथ मोबाइल में मौजूद डाटा भी साफ कर देंगे। 

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बीते दिनों में ऐसे ही कई मामले सामने आने पर पुलिस ने लोगों को एडवाइजी जारी की है कि अज्ञात लिंक के जरिये कोई भी ऐप डाउनलोड न करें। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब तक चर्चित रिमोट एक्सेस एप के तौर पर एनी डेस्क और क्विक सपोर्ट एप का नाम सार्वजनिक हो चुका है। 
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इसके अलावा साइबर जालसाजों ने अपने मनमानिफ नाम से भी कुछ रिमोट एक्सेस एप बना ली हैं, जिन्हें देखकर भोले-भाले लोग झांसे में आ जाते हैं। मोबाइल में एप डाउनलोड होते ही मोबाइल का एक्सेस जालसाजों के हाथों में पहुंच जाता है। 
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इसके बाद वह मोबाइल में मौजूद हर चीज को देख व चोरी कर सकते हैं। इन एप से सर्वाधिक खतरा ऑनलाइन पेमेंट एप, सोशल उकाउंट्स और गैलरी में मौजूद निजी तस्वीरों व वीडियो को है।

सिलसिलेवार तरीके से झांसे में लेते हैं
किसी खरीदारी या पेमेंट के दौरान रकम फंसने या ऑनलाइन मंगाया प्रोडक्ट खराब निकलने पर लोग इंटरनेट पर संबंधित कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोजकर कॉल करते हैं। जालसाजों ने इंटरनेट पर कंपनी के नामों पर अपने नंबर डाले होते हैं। 

कॉल करने पर जालसाज झांसे में लेते हैं और कंपनी के कर्मचारी द्वारा कॉल बैक करने की बात करते हैं। कंपनी के कर्मचारी के नाम पर साइबर ठग बातों में फंसाकर पेमेंट वापसी का लिंक भेजने की बात कहकर उसे डाउनलोड करने को कहते हैं। 

इस लिंक के जरिए रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड हो जाता है। इसके बाद ठगों द्वारा एक आईडी भेजकर उसकी जानकारी ली जाती है। आईडी बताते ही ठग एप के जरिये मोबाइल का एक्सेस अपने हाथों में ले लेते हैं।

सोशल उकाउंट्स, व्हॅट्सएप व ईमेल अकाउंट हो सकते हैं हैक
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक मोबाइल एक्सेस हाथ में आते ही साइबर ठग फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि अकाउंट्स हैक कर सकते हैं। साथ ही फेसबुक, व्हॉट्सएप, टेलीग्राम अकाउंट्स के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। 

इतना ही नहीं, गूगल-पे, फोन-पे, पेटीएम आदि के इस्तेमाल कर खातों से रकम उड़ा सकते हैं। साथ ही मोबाइल में लिंक ईमेल आईडी हैक करके और गैलरी में मौजूद निजी डाटा चोरी करके उसका दुरुपयोग कर सकते हैं।

साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह ने कहा कि इंटरनेट पर कस्टमर केयर का नंबर खोजते समय पूरी जांच-पड़ताल कर लें। अगर कस्टमर केयर पर कॉल करने पर एप का लिंक भेजा जाता है तो उसे किसी सूरत में डाउनलोड न करें। यहां तक कि किसी भी अनजान लिंक को क्लिक न करें। जालसाज रिमोट एक्सेस एप के जरिये आपका मोबाइल हैक कर सकते हैं।

साइबर एक्सपर्ट कामाक्षी शर्मा ने बताया कि अगर किसी एप को डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है तो उसे बिल्कुल डाउनलोड न करें। तमाम रिमोट एक्सेस एप का इस्तेमाल साइबर जालसाजों द्वारा किया जा रहा है। अगर एप डाउनलोड कर भी ली है तो उसका कोई पासकोर्ड आदि किसी भी सूरत में शेयर न करें। ऐसा करने पर आपके मोबाइल का एक्सेस जालसाजों के पास जा सकता है।

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