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सोशल मीडिया पर तीन तलाक का मुद्दा उठाएंगी मुस्लिम महिलाएं

Tue, 07 Feb 2017 11:19 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Tue, 07 Feb 2017 11:19 PM IST
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Social media will take on the divorce issue three Muslim women
सोशल मीड‌िया - फोटो : amar ujala

 एक और तीन तलाक पर सियासत की आंच तेज हो रही है, वहीं इसके विरोध में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं आगे आ रही हैं। साथ ही लड़कियां भी इसका विरोध कर रही हैं। शहर, लोनी, मुरादनगर, मोदीनगर, कैला भट्टा की कई ऐसी महिलाएं हैं, जो तलाक और उसके बाद हलाला पीड़िता हैं।

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इनमें से एक मुस्लिम महिला ने इसके विरोध में इस्लाम धर्म को छोड़कर हिंदू धर्म भी अपना लिया है। इतना ही नहीं, मुस्लिम महिलाएं इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर भी उठाने की तैयारी कर रही हैं।कैला भट्टा की रहने वाली दामिनी हो या लोनी की रहने वाली रूबी, दोनों का कहना है कि किसी गलती और नाइत्तेफाकी के बाद तलाक हो तो यह माना जा सकता है।
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छोटी-छोटी बातों पर तलाक, समाज का समर्थन न मिलना, उसके बाद हलाला के लिए भी महिलाओं को मजबूर किया जाता है, यह बंद होना चाहिए। हर धर्म में पुरानी सड़ी-गली मान्यताओं का विरोध हुआ है और उन्हें बदला गया है, लेकिन उनके धर्म में इसकी कोई सुनवाई नहीं है। धर्म के नाम पर महिलाओं का जो शोषण हो रहा है, वह बंद होना चाहिए।
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इसके लिए वे सोशल मीडिया पर भी मुहिम छेड़ेंगी। कुरान और हदीस की रोशनी में तलाक के तरीके यू ट्यूब, व्हाट्स एप के जरिए लोगों को बताकर जागरूक करेंगी। इसका समर्थन बड़ी संख्या में महिलाएं कर रही हैं कुछ सामने आ रही हैं कुछ पर्दे के पीछे से रहकर इसका समर्थन कर रही हैं। जल्द ही बड़ी संख्या में आंदोलन के रूप में यह मुद्दा आगे आएगा।

कोट्स
महिलाओं को आत्मसम्मान से जीने का हक है

अभी तक पांच महिलाएं इसके विरोध में आगे आई हैं। कई ऐसी छात्राएं हैं जो इसका विरोध कर रही हैं, लेकिन समाज के डर से आगे नहीं आ रही हैं। जब 20 इस्लामिक देशों में तीन तलाक को नियंत्रित किया गया है, हिंदू धर्म में भी सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह आदि मान्यताओं को बदला गया है। हर धर्म की महिलाओं को आत्म सम्मान के साथ जीने का हक है।
                                    - अमित आर्यन, जय शिव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष,

धर्म नाम पर सियासत कर रहे धर्मगुरु - राजनेता
सभी धर्मगुरु धर्म के नाम पर सियासत कर रहे हैं। धर्मगुरु हों या राजनेता सभी इस मुद्दे को सियासी हवा दे रहे हैं। इस्लाम अल्लाह का बनाया हुआ है, इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। इसमें न तो सरकार की जरूरत है, न अदालत की और न ही सियासत की। कुछ लोगों ने मजहब को भी रोजगार बना लिया है, ऐसे लोग इसे हवा दे रहे हैं।

                                       - के जेड बुखारी, नायब शहर काजी

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