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सिग्नल इंजीनियर समेत छह आरोपियों को सजा, जुर्माना
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Tue, 26 Apr 2016 01:33 AM IST
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supreme court
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मुरादाबाद मंडल में 2005 के दौरान केबल कार्य के दौरान हुए करीब 19 लाख रुपये के घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल और जुर्माने की सजा सुनाई। दोषी लोगों में नई दिल्ली तिलकब्रिज स्टेशन पर तैनात रेलवे के चीफ सिग्नल टेलीकॉम इंजीनियर (सीएसटीई) अमरेश त्रिपाठी और उनकी पत्नी हेमा त्रिपाठी भी शामिल हैं।
सीबीआई लोक अभियोजक एससी मीणा के अनुसार मुरादाबाद मंडल में रेलवे ने 2005 के दौरान सिग्नल के केबल डालने का काम कराया था। उस समय नई दिल्ली तिलकब्रिज स्टेशन पर तैनात रेलवे के चीफ सिग्नल टेलीकॉम इंजीनियर (सीएसटीई) अमरेश त्रिपाठी के पास मुरादाबाद मंडल का भी चार्ज था।
उन्होंने अपनी पत्नी हेमा त्रिपाठी के नाम एक फर्म शुरू करके उसमें राजेश दुबे नामक व्यक्ति को बराबर का पार्टनर बना दिया था। लोक अभियोजक के अनुसार केबल बिछाने के बाद इसे आरसीसी की स्लैब से ढकना था, मगर आरोपियों ठेकेदारों ने ईंटों से ही ढककर इतिश्री कर ली।
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इससे रेलवे को करीब 19 लाख की चपत लगी। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने जांच में पाया कि रेलवे के ही तीन अन्य अधिकारियों एके निगम, एके भटनागर और एसके मालाकार ने आरसीसी स्लैब डाले जाने की रिपोर्ट दी थी, जबकि वहां सीबीआई को ईंटें बिछी मिलीं।
सोमवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एके सिंह ने सिग्नल इंजीनियर अमेरश त्रिपाठी, राजेश दुबे को चार-चार साल कैद और 2.25-2.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एके के निगम, एके भटनागर और एसके मालाकार को भी चार-चार साल कैद और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इंजीनियर की पत्नी हेमा त्रिपाठी को कोर्ट ने एक साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हेमा को कोर्ट से ही जमानत दे दी गई।
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सीबीआई लोक अभियोजक एससी मीणा के अनुसार मुरादाबाद मंडल में रेलवे ने 2005 के दौरान सिग्नल के केबल डालने का काम कराया था। उस समय नई दिल्ली तिलकब्रिज स्टेशन पर तैनात रेलवे के चीफ सिग्नल टेलीकॉम इंजीनियर (सीएसटीई) अमरेश त्रिपाठी के पास मुरादाबाद मंडल का भी चार्ज था।
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उन्होंने अपनी पत्नी हेमा त्रिपाठी के नाम एक फर्म शुरू करके उसमें राजेश दुबे नामक व्यक्ति को बराबर का पार्टनर बना दिया था। लोक अभियोजक के अनुसार केबल बिछाने के बाद इसे आरसीसी की स्लैब से ढकना था, मगर आरोपियों ठेकेदारों ने ईंटों से ही ढककर इतिश्री कर ली।
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इससे रेलवे को करीब 19 लाख की चपत लगी। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने जांच में पाया कि रेलवे के ही तीन अन्य अधिकारियों एके निगम, एके भटनागर और एसके मालाकार ने आरसीसी स्लैब डाले जाने की रिपोर्ट दी थी, जबकि वहां सीबीआई को ईंटें बिछी मिलीं।
सोमवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एके सिंह ने सिग्नल इंजीनियर अमेरश त्रिपाठी, राजेश दुबे को चार-चार साल कैद और 2.25-2.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एके के निगम, एके भटनागर और एसके मालाकार को भी चार-चार साल कैद और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इंजीनियर की पत्नी हेमा त्रिपाठी को कोर्ट ने एक साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हेमा को कोर्ट से ही जमानत दे दी गई।