{"_id":"5917499c4f1c1b0a6985222f","slug":"mother-s-mother-in-police-service","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस सेवा में मां की ममता","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पुलिस सेवा में मां की ममता
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sat, 13 May 2017 11:30 PM IST
विज्ञापन
Lady Police
- फोटो : demo pic
कामकाजी महिलाओं के लिए ऑफिस के साथ-साथ घर और बच्चों की दोहरी जिम्मेदारी दोधारी तलवार पर चलने से कम नहीं होती। ऐसे में अगर नौकरी पुलिस की हो तो परीक्षा और भी कठिन हो जाती है।
विज्ञापन
लंबे समय तक लगातार ड्यूटी और सीमित छुट्टियों के बीच परिवार के साथ एक मां की जिम्मेदारी निभाना इन महिलाओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।
बहुत मुश्किल होता है बच्चे को रोता हुआ छोड़कर काम पर आना
तेज तर्रार महिला इंस्पेक्टरों में शामिल लक्ष्मी चौहान कहती हैं कि पुलिस की नौकरी किसी चुनौती से कम नहीं। पुलिस सेवा में रहते हुए बच्चों को लिए समय निकालना बेहद मुश्किल होता है, हालांकि यह ड्यूटी का पार्ट है। कई बार ड्यूटी के दौरान बच्चों का चेहरा देखने को भी तरस जाती हूं।
विज्ञापन
बड़ा बेटा दिव्य देव ग्यारहवीं जबकि छोटा बेटा आदित्य देव पहली कक्षा में है। जब भी घर पर रहती हूं छोटा बेटा गोद में ही रहता है। थाने पर आते समय उसे रोता हुआ घर पर छोड़कर आना सबसे मुश्किल काम होता है।
विज्ञापन
मां की वजह से ही बनी अफसर बिटिया
मूलरूप से जौनपुर की रहने वाली अल्का धर्मराज सिंह सीओ एलआईयू के रूप में शहर में तैनात हैं। वह कहती है कि व्यक्ति की सफलता के पीछे उसकी मां का सबसे बड़ा हाथ होता है। मां अपने बच्चों के सपने साकार करने के लिए अपनी खुशियां मार देती है। यह एक मां ही कर सकती है।
स्कूलिंग से लेकर पुलिस सेवा में आने तक के सफर मेरी मां ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। रिश्तेदार अक्सर मेरी मां से कहते थे कि बेटी बड़ी हो जाए तो समय से शादी कर देनी चाहिए, मगर मेरी मां मुझे सफल देखना चाहती थीं।
मां ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी
यूपी के संभल जिले के इचमपुर गांव की ट्रेनी पीपीएस सीओ मोनिका यादव अपनी सफलता का श्रेय मां सुमन यादव की प्रेरणा और उच्च आदर्शों को देती हैं। मोनिका यादव कहती हैं कि मां ने हर कदम पर मेरा साथ दिया है। पढ़ाई के दिनों में सुबह जल्दी उठाने से लेकर मेरी हर छोटी बड़ी जरूरत का ख्याल रखा।
पढ़ाई के दिनों में जब कभी उत्साह टूट जाता था तो वो मां ही थी जो मुझे पास बैठाकर समझाती थीं। वो कहती हैं कि अगर लगन हो तो कोई भी काम आसानी से किया जा सकता है। मां की प्रेरणा की ही नतीजा है कि साल 2014 में पुलिस सेवा के लिए चयन हो गया। उसके बाद भी मां हर तरह का ख्याल रखती हैं।