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‘मोहन! दौड़ा दे गाड़ी सर्वोदय अस्पताल’
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sat, 13 Aug 2016 01:30 AM IST
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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शाम सवा सात बजे मैं साहब (ब्रजपाल तेवतिया) को लेकर मुरादनगर से निकला। शहर से बाहर सुनसान इलाके में बड़ा ब्रेकर पड़ने पर मैंने अचानक ब्रेक लगाई। सामने फॉर्च्यूनर कार खड़ी थी। उसमें से एक युवक उतरा और एके-47 से हमारी गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग करने लगा।
मैं ड्राइविंग सीट के नीचे झुक गया। हमारी गाड़ी पर करीब एक मिनट तक तड़ातड़ गोलियां बरसती रहीं। इसके बाद गोलियों की आवाज बंद हो गई। मेरे बगल वाली सीट पर बैठे साहब ने आवाज दी-मोहन तू ठीक है।
मैंने ने सर उठाकर देखा तो वह लहूलुहान थे जबकि पिछली की सीट पर खून से लथपथ गनर अशोक और रामपाल मूर्छित हो चुके थे। साहब के मित्र इंद्रपाल के सिर में गोली लगने से वह भी अर्द्ध मूर्छित अवस्था थे।
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साहब बोले-इंद्रपाल पुलिस को फोन करो। उन्होंने तीन बार 100 नंबर पर डायल किया। पुलिस ने फोन नहीं उठाया। तब साहब मुझसे बोले-मोहन तुम गाड़ी चला लोगे। मुझे भी गोली लगी थी, लेकिन मैंने हां कह दिया।
वह तुरंत बोले- ले चल सर्वोदय अस्पताल। सामने कोई हमलावर नहीं था। मैंने गाड़ी दौड़ा दी। रास्ते में साहब बोले-इंद्रपाल, विकास (छोटा भाई) को फोन कर, सर्वोदय में बेड की व्यवस्था करने को कहो।
20 मिनट में हम सर्वोदय पहुंच गए। स्ट्रेचर पर आईसीयू में जाते हुए साहब ने कहा-मोहन तू ठीक है...। ये सारी बातें रोते-रोते भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया के घायल ड्राइवर मोहन ने बताईं। वह न्यू सर्वोदय अस्पताल में भर्ती है। मोहन ने कहा कि एक बार मालिक की आवाज सुनने को तड़प रहा हूं।
मोहन ने बताया कि उसके पीछे साहब के गनर की गाड़ी थी। उस पर गनर मौकम, विपिन और सुशील सवार थे। ड्राइवर बबलू गाड़ी चला रहा था, जो मौके से भाग गया। उस गाड़ी पर कब किसने गोलियां बरसाईं, यह मोहन देख नहीं पाया।
करीब पौने घंटे बाद गनर सुशील इस गाड़ी को लेकर सर्वोदय पहुंचा। गाड़ी में गनर मौकम और विपिन खून से लथपथ थे। सुशील को गोली नहीं लगी थी।
बुलेट प्रूफ गाड़ी का वाइपर था खराब
ब्रजपाल तेवतिया अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ बुलेट प्रूफ गाड़ी से ही चलते हैं। बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में भाजपा के प्रदर्शन से लौटकर घर आए और शाम साढे़ चार बजे मुरादनगर जाने को तैयार हो गए। उन्हें ले जाने को बुलेट प्रूफ गाड़ी कोठी के गेट पर खड़ी कर दी गई तभी बारिश होने लगी। उन्होंने देखा कि गाड़ी का वाइपर खराब है। इस पर तेवतिया ने कहा कि बारिश में यह गाड़ी ठीक नहीं रहेगी, स्कार्पियो से चलते हैं। अब परिजन अफसोस कर रहे हैं कि काश वे बुलेट प्रूफ गाड़ी से गए होते।
सरकारी सुरक्षाकर्मी होता तो सीन दूसरा होता
डेढ़ माह पहले ही ब्रजपाल तेवतिया से सरकार ने सुरक्षाकर्मी वापस ले लिए थे। तेवतिया के परिजनों का कहना है कि सरकारी सुरक्षाकर्मी होता तो सीन दूसरा होता। दरअसल, तेवतिया के साथ के सभी गनर के पास पिस्टल थे। पिस्टल से एके-47 का सामना नहीं किया जा सकता। सरकारी सुरक्षाकर्मी के पास कार्बाइन होती है, उससे तीस गोलियां एक साथ निकलती हैं। कार्बाइन से एके-47 से लड़ा जा सकता था।
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मैं ड्राइविंग सीट के नीचे झुक गया। हमारी गाड़ी पर करीब एक मिनट तक तड़ातड़ गोलियां बरसती रहीं। इसके बाद गोलियों की आवाज बंद हो गई। मेरे बगल वाली सीट पर बैठे साहब ने आवाज दी-मोहन तू ठीक है।
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मैंने ने सर उठाकर देखा तो वह लहूलुहान थे जबकि पिछली की सीट पर खून से लथपथ गनर अशोक और रामपाल मूर्छित हो चुके थे। साहब के मित्र इंद्रपाल के सिर में गोली लगने से वह भी अर्द्ध मूर्छित अवस्था थे।
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साहब बोले-इंद्रपाल पुलिस को फोन करो। उन्होंने तीन बार 100 नंबर पर डायल किया। पुलिस ने फोन नहीं उठाया। तब साहब मुझसे बोले-मोहन तुम गाड़ी चला लोगे। मुझे भी गोली लगी थी, लेकिन मैंने हां कह दिया।
वह तुरंत बोले- ले चल सर्वोदय अस्पताल। सामने कोई हमलावर नहीं था। मैंने गाड़ी दौड़ा दी। रास्ते में साहब बोले-इंद्रपाल, विकास (छोटा भाई) को फोन कर, सर्वोदय में बेड की व्यवस्था करने को कहो।
20 मिनट में हम सर्वोदय पहुंच गए। स्ट्रेचर पर आईसीयू में जाते हुए साहब ने कहा-मोहन तू ठीक है...। ये सारी बातें रोते-रोते भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया के घायल ड्राइवर मोहन ने बताईं। वह न्यू सर्वोदय अस्पताल में भर्ती है। मोहन ने कहा कि एक बार मालिक की आवाज सुनने को तड़प रहा हूं।
मोहन ने बताया कि उसके पीछे साहब के गनर की गाड़ी थी। उस पर गनर मौकम, विपिन और सुशील सवार थे। ड्राइवर बबलू गाड़ी चला रहा था, जो मौके से भाग गया। उस गाड़ी पर कब किसने गोलियां बरसाईं, यह मोहन देख नहीं पाया।
करीब पौने घंटे बाद गनर सुशील इस गाड़ी को लेकर सर्वोदय पहुंचा। गाड़ी में गनर मौकम और विपिन खून से लथपथ थे। सुशील को गोली नहीं लगी थी।
बुलेट प्रूफ गाड़ी का वाइपर था खराब
ब्रजपाल तेवतिया अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ बुलेट प्रूफ गाड़ी से ही चलते हैं। बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में भाजपा के प्रदर्शन से लौटकर घर आए और शाम साढे़ चार बजे मुरादनगर जाने को तैयार हो गए। उन्हें ले जाने को बुलेट प्रूफ गाड़ी कोठी के गेट पर खड़ी कर दी गई तभी बारिश होने लगी। उन्होंने देखा कि गाड़ी का वाइपर खराब है। इस पर तेवतिया ने कहा कि बारिश में यह गाड़ी ठीक नहीं रहेगी, स्कार्पियो से चलते हैं। अब परिजन अफसोस कर रहे हैं कि काश वे बुलेट प्रूफ गाड़ी से गए होते।
सरकारी सुरक्षाकर्मी होता तो सीन दूसरा होता
डेढ़ माह पहले ही ब्रजपाल तेवतिया से सरकार ने सुरक्षाकर्मी वापस ले लिए थे। तेवतिया के परिजनों का कहना है कि सरकारी सुरक्षाकर्मी होता तो सीन दूसरा होता। दरअसल, तेवतिया के साथ के सभी गनर के पास पिस्टल थे। पिस्टल से एके-47 का सामना नहीं किया जा सकता। सरकारी सुरक्षाकर्मी के पास कार्बाइन होती है, उससे तीस गोलियां एक साथ निकलती हैं। कार्बाइन से एके-47 से लड़ा जा सकता था।