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फैक्ट्री में भीषण आग, मकानों में आईं दरारें

Tue, 01 Nov 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला मोदीनगर
ब्यूरो/ अमर उजाला मोदीनगर Updated Tue, 01 Nov 2016 11:51 PM IST
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Major fire in the factory, there cracks in houses
‌तिरपाल फैक्ट्री में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
 एनएच-58 स्थित मोदी यादगार के पीछे घनी आबादी के बीच पुरानी टेंट फैक्ट्री परिसर की तीन यूनिटों में सोमवार रात पटाखे से भीषण आग लग गई। इससे कई मकानों में दरारें आ गईं। लोगों ने घरों से सामान निकालकर बाहर रख दिया।
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आधा दर्जन जनपदों की करीब 25 अग्निशमन गाड़ियों से 150 फायर कर्मियों ने करीब 11 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फैक्ट्री मालिक ने आग से करीब एक करोड़ का नुकसान होना बताया है। 
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बैंक कालोनी निवासी हकुमतराय मित्तल की हरमुखपुरी कालोनी के सामने रायबहादुर गुजरमल मोदी यादगार के पीछे पुरानी टेंट फैक्ट्री परिसर में अभिषेक ट्रेडिंग कंपनी (तिरपाल फैक्ट्री), भगवती प्लास्टिक इंडस्ट्रीज और मनु इंटरप्राइजेज नाम से कंपनियां हैं।
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इन फैक्ट्रियों में स्क्रैप के प्लास्टिक पॉलिथीन बैगों से प्लास्टिक दाना व तिरपाल बनाए जाते हैं। हकुमतराय के मुताबिक सोमवार रात करीब 11 बजे चौकीदार संजय ने बताया कि फैक्ट्री में आग लग गई है। इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई।

सूचना के करीब आधा घंटा बाद मोदीनगर फायर ब्रिगेड़ की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक आग विकराल हो चुकी थी। गोदाम में रखे तैयार तिरपाल, प्लास्टिक दाना अन्य रॉ मैटेरियल, फैक्ट्री शेड तथा कुछ पुरानी मशीनें जल गई थीं।

इसके बाद  मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बुलंदशहर, नोएडा, साहिबाबाद, हिंडन एयरवेज, परतापुर और वैशाली आदि स्थानों से आईं करीब 25 अग्निशमन की गाड़ियों ने मंगलवार सुबह 10 बजे तक आग बुझाई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग की लपटें करीब 30-40 फीट तक उठ रही थीं, जिनकी तपिश से नाहर सिंह, विनोद तथा मनोज समेत कई लोगों के मकानों में दरारें आ गईं। मनोज के मकान की छत पर रखी प्लास्टिक की पानी की टंकी जलकर राख हो गई।     
  
मची चीख पुकार, एफएसओ-फायरकर्मी बचे 
करीब दो बीघा परिसर स्थित तीन यूनिटों में लगी भयंकर आग की लपटें जब ऊंची उठने लगीं तो आस पड़ोस के 50-60 मकानों में रह रहे लोगों में हड़कंप मच गया। वह मकानों की छतों पर जाकर मदद के लिए चीखने लगे।

आनन फानन में इन लोगों ने गैस सिलेंडर समेत घर का सामान निकाल कर सड़क पर रख लिया। दूसरी तरफ, आग बुझाने के दौरान फैक्ट्री परिसर में रखे कुछ ड्रमों में से एक ड्रम काफी तेज धमाके के साथ फट गया, इस दौरान वहां खड़े एफएसओ आर के यादव और कुछ फायर कर्मी बाल बाल बच गए।

उन्होंने वहां से भागकर जान बचाई। फायर कर्मी ने बताया कि ड्रमों से केमिकल निकल रहा था, जिससे आग और विकराल रूप ले रही थी। लपटों और धुएं से हो रही घुटन के कारण फायर कर्मियों को आग बुझाने में काफी दिक्कत आ रही थी। वहीं, फैक्ट्री मालिक मित्तल का कहना है कि ड्रमों में केमिकल नहीं था, बल्कि ऑक्सीजन गैस का एक सिलेंडर फटने से तेज धमाका हुआ था। 

तिरपाल फैक्ट्री पर नहीं थी अग्निशमन विभाग की एनओसी
 25 अग्निशमन गाड़ियां, पानी से भरे 150 टैंकर और इतनी ही बड़ी संख्या में फायर कर्मी तिरपाल फैक्ट्री को राख होने से रोकने में नाकाम साबित हुए। अग्निशमन विभाग की लापरवाही से इस प्रकार की घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं। तिरपाल फैक्ट्री के पास फायर विभाग की एनओसी भी नहीं थी।

तिरपाल समेत तीन फैक्ट्रियों को फायर विभाग की एनओसी होती तो इन फैक्ट्रियों में इतना नुकसान नहीं होता। तीनों फैक्ट्रियां काफी अरसे चल रही हैं। हाईवे के निकट होने तथा ज्वलनशील पदार्थ से संबंधित रॉ मैटेरियल होने के बावजूद भी फायर विभाग की नजर इन फैक्ट्रियों पर नहीं पड़ी। हालांकि फायर विभाग द्वारा एनओसी न होने के बावजूद भी फैक्ट्रियों का करीब एक करोड़ का बीमा बताया जाता है। इस बात की पुष्टी फैक्ट्री मालिक ने भी की है। 

इस संबंध में मोदीनगर फायर स्टेशन अधिकारी आर के यादव के मुताबिक तीनों फैक्ट्रियों को उनके विभाग से एनओसी नहीं है। साथ ही फैक्ट्री में आग बुझाने के संयंत्र भी नहीं थे। उन्होंने बताया कि यदि मोदी स्टील फैक्ट्री परिसर स्थित फैक्ट्रियों से पानी की व्यवस्था नहीं होती तो आग आबादी में भी पहुंच सकती थी।

उन्होंने बताया कि फिलहाल फैक्ट्री मालिक से कोई तहरीर नहीं मिली है। एफएसओ का कहना है कि आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम के लिए अनेक फैक्ट्रियों को नोटिस भेज रखे हैं। वहीं, फैक्ट्री मालिक का कहना है कि फैक्ट्री में आग बुझाने के सभी संयंत्र लगे थे, जो आग में जल गए।

बता दें कि पिछले साल 21 नवंबर को ऊंची सड़क स्थित पट्टी बनाने वाली एक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई थी। फैक्ट्री में सुलगती रही आग करीब एक सप्ताह में बुझी थी। 

सोसायटी का फायर सिस्टम फेल, पानी से बुझाई आग

 केडीपी ग्रांड सवाना में सोमवार की रात पटाखों से निकली चिंगारी से एक फ्लैट की बालकनी में रखे लकड़ी के सामान में आग लग गई। लोगों ने फौरन पानी डालकर इसे बुझा लिया। 
सोसायटी के रेजिडेंट जेएन त्यागी ने बताया कि फ्लैट संख्या ए-105 में यह हादसा हुआ।

आग लगने के बाद सुरक्षा गार्डों ने आग बुझाने वाली गैस पाइप लाइन को प्रयोग में लाना चाहा, लेकिन पाइपलाइन में गैस खत्म हो चुकी थी। फिर फायर सिलेंडर का उपयोग करना चाहा तो वह भी खाली निकले। 2015 में ही उनकी डेट एक्सपायर हो चुकी थी।

इसके बाद पास के दूसरे फ्लैट से पानी की ट्यूब लगाकर आग बुझाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आग छोटी थी जिसकी वजह से जल्दी काबू पा लिया गया, बड़ा हादसा भी हो सकता था। लोगोें ने एओए पदाधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि, इससे तो हजारों लोगों की जान पर बन आती। 

उधर, एओए अध्यक्ष राजकुमार त्यागी ने सिलेंडर से गैस खत्म होने की बात को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि आग छोटी थी इसलिए पानी का इस्तेमाल किया गया। वैसे भी बालकनी में लकड़ियों का कचरा रखा हुआ था, जिससे चिंगारियां उठ रही थीं।

उठने वाली चिंगारियां गैस से नहीं बुझाई जा सकती हैं। ऐसे में पानी का प्रयोग किया गया। आरडब्ल्यूए किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार थी। दिवाली से पहले भी सोसायटी में फायर ड्रिल भी कराया गया था।


पटाखे की चिंगारी से टेलीफोन एक्सचेंज की छत पर लगी आग     
 विजयनगर थाना क्षेत्र स्थित टेलीफोन एक्सचेंज की छत पर काफी तादाद में पड़े पुराने टेलीफोन में मंगलवार दोपहर पटाखे की चिंगारी से आग लग गई। हालांकि आग विकराल होती, इससे पहले ही कर्मचारियों ने आग बुझा ली। 

प्रताप विहार सेक्टर-12 स्थित बीएसएनएल के टेलीफोन एक्सचेंज की छत पर रखे पुराने टेलीफोन में आग लग गई। अंदेशा ही आग किसी पटाखे की चिंगारी से लगी। धुआं और लपटें देख कर्मचारियों ने ऑफिस से बाहर निकल कर फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

साथ ही कर्मचारियों ने बराबर वाले मकान की छत पर चढ़कर टेलीफोन एक्सचेंज की छत पर पानी और रेत डालकर आग पर काबू पाया। कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने छत पर पुराने और प्रयोग में न आने वाले टेलीफोन रखे हुए थे।


इस संबंध में एफएसओ रामकिशोर यादव ने बताया कि कर्मचारियों की सूचना पर अग्निशमन कर्मियों को दो गाड़ियां लेकर भेजा गया था। लेकिन रास्ते में ही फोन आ गया कि आग बुझा ली गई है। 
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