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सड़कों पर सिमटा मासूमों का जीवन
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 20 Apr 2017 11:44 PM IST
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बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
शहर की सड़कों पर तीन सौ मासूमों का बचपन बर्बाद हो रहा है। विभिन्न जगहों से तस्करी कर लाए गए यह बच्चे नशे के गुलाम बन चुके हैं। यह हकीकत चाइल्ड लाइन की ओर से किए गए सर्वे में सामने आई है। सर्वे के मुताबिक इन तीन सौ स्ट्रीट चिल्ड्रेन है। जिनकी उम्र 10 से 14 वर्ष है।
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इस सर्वे के बाद चाइल्ड लाइन ऐसे बच्चों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योजना काम कर रही है।बच्चों को तस्कर बड़े पैमाने पर पश्चिम बंगाल, बिहार, गोरखपुर, मिर्जापुर और झारखंड से यहां पर ला रहे हैं।
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तस्कर इन मासूमों के हाथ-पैर तोड़कर और उन्हें डरा-धमका कर उनसे भीख मंगवाते और सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों को साफ करवाते हैं। भीख मांगने से मना करने पर तस्कर इन बच्चों को जबरन नशीली दवाएं और इंजेक्शन लगाकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।
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हैरानी की बात यह है कि यह सारा खेल पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है। बच्चे सर्दी, बारिश और भीषण गर्मी सभी मौसम में सड़कों पर ही रात गुजारने को मजबूर हैं।
वर्ष 2016 में हुआ था सर्वे
यह सर्वे वर्ष 2016 में गाजियाबाद के सिहानी गेट, लोनी, रेलवे स्टेशन, पुराना बस अड्डा, मोदी नगर और मुरादनगर क्षेत्रों में किया गया था। इन सभी जगहों के बच्चों का आंकड़ा करीब तीन सौ था। इन बच्चों से चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने पूछताछ की तो बच्चों ने तस्करी कर लाए जाने की बात बताई।
हो रही तस्करों की तलाश
चाइल्ड लाइन के सेंटर कोऑर्डिनेटर आरिफ खान ने बताया कि बच्चों की तस्करी के पीछे किसी बड़े गैंग का हाथ है। हालांकि पुलिस व प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई है। इन तस्करों की तलाश भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
लिहाजा इनका भविष्य संवारने के लिए चाइल्ड लाइन योजना बना रहा है। जिसके जरिए इन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।