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दहेज हत्या में पति, सास और ननद को आजीवन कारावास

Fri, 17 Feb 2017 11:41 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Fri, 17 Feb 2017 11:41 PM IST
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Dowry husband, mother and sister life imprisonment
court shimla
दहेज के लिए विवाहिता और उसके 11 माह के बच्चे की हत्या के आरोप में कोर्ट ने पति, सास और ननद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश कमलेश कुमार ने तीनों पर छह-छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता महेश यादव ने बताया कि दिल्ली के समयपुर बादली निवासी जगदीश ने इस बाबत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जगदीश के अनुसार उसने अपनी बेटी लक्ष्मी की शादी घटना से करीब ढाई साल पहले लोनी में पाइप लाइन के पास रहने वाले ऋषि नामक युवक से की थी।
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आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग लक्ष्मी को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। तीन बार में वह अपनी बेटी को डेढ़ लाख रुपये दे भी चुका था। 15 अप्रैल 2008 को लक्ष्मी ने अपने पिता को फोन करके बताया कि दहेज में बाइक और 50 गज के प्लाट की मांग ससुराल वाले कर रहे हैं।
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मांग पूरी न होने पर उसे मारने की धमकी दे रहे हैं। इस पर वह अपनी बेटी की ससुराल गया और उसे समझा बुझाकर वापस अपने घर चला गया। सुबह उसे पता चला कि लक्ष्मी और उसके 11 माह के बेटे की ससुराल वालों ने हत्या कर दी है।

इस मामले में जगदीश ने अपने दामाद ऋषि, उसकी मां अंगूरी देवी और बहन रेखा को नामजद कराया था। सरकारी वकील ने बताया कि यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-एक में विचाराधीन था।

शुक्रवार को दोनों पक्षों की बहस के बाद न्यायाधीश कमलेश कुमार ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास और छह-छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

गर्भवती पुत्रवधू के हत्यारे ससुर को आजीवन कारावास

 गर्भवती पुत्रवधू को जलाकर मारने के आरोप में कोर्ट ने आरोपी ससुर को दोषी करार दिया है। स्पेशल जज एससी/एसटी एक्ट रामकिशोर शुक्ल ने आजीवन कारावास के साथ दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 

सरकारी वकील राजीव कुमार ने बताया कि 3 अगस्त 2013 को दिल दहला देने वाली यह वारदात लोनी कोतवाली क्षेत्र में घटी थी। यहां रहने वाले रामगोपाल और उसके बेटे प्रह्लाद के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था।

प्रह्लाद ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए अपने पिता रामगोपाल को नामजद किया था। उसने पुलिस को बताया था कि 13 अगस्त को जब वह अपने काम पर चला गया था तब उसके पिता ने उसकी गर्भवती पत्नी बीना के ऊपर केरोसिन डालकर आग लगा दी थी।

प्रह्लाद ने अपनी पत्नी को जीटीबी में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई थी। मरने से पहले बीना ने अपने ससुर के खिलाफ बयान भी दिया था।


सरकारी वकील ने बताया कि केस में सुनवाई के बाद शुक्रवार को न्यायाधीश रामकिशोर शुक्ल ने आरोपी रामगोपाल को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना दी।
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