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निठारी के एक और केस में कोली को फांसी की सजा
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:54 AM IST
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सुरेंद्र कोली
- फोटो : अमर उजाला
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निठारी प्रकरण के एक और मामले में सुरेंद्र कोली को सीबीआई विशेष कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने दोषी सुरेंद्र कोली पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
न्यायाधीश ने यह फैसला घरों में काम करने वाली महिला की रेप और हत्या के मामले में दिया है। इससे पूर्व भी इस आरोपी को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट से निठारी के ही 5 मामलों में फांसी की सजा मिल चुकी है। शुक्रवार को उसे छठे मामले में सजा सुनाई गई।
शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच सुरेंद्र कोली को डासना जेल से कोर्ट लाया गया। सुबह 11 बजे सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने सजा पर बहस करते हुए कहा कि कोली का यह प्रकरण ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में आरोपी को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। सजा पर बहस पूरी होने पर न्यायाधीश ने दोपहर दो बजे तक के लिए फैसला रिजर्व कर लिया।
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पौने दो बजे सदर हवालात से सुरेंद्र कोली को कोर्ट परिसर में लाया गया। ठीक दो बजे उसे विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में पेश किया गया। डिफेंस के अधिवक्ता अली मोहम्मद ने कोर्ट में अर्जी देकर फैसला बाद में सुनाए जाने की मांग की। इस पर न्यायाधीश का कहना था कि अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का कोई स्टे आदेश है तो उसे पेश किया जाए, अन्यथा अदालत का समय न बर्बाद किया जाए।
इसके बाद न्यायाधीश ने कोली को हत्या के मामले में फांसी और 10 हजार, अपहरण में आजीव कारावास और 10 हजार, रेप में आजीवन कारावास और 10 हजार के साथ ही साक्ष्य मिटाने के मामले में 7 साल कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कोली के गले में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए।
कोर्ट की टिप्पणी :
‘सजा का तात्पर्य प्रतिशोध लेना नहीं है। ’खून के बदले खून’ का सिद्धांत किसी भी सभ्य समाज में लागू नहीं किया जा सकता, फिर भी राज्य का काम ऐसा समाज बनाना है, जिसे सभ्य और सुसंस्कृत कहा जा सके।
यह तभी संभव है जब दोषसिद्ध अभियुक्त जैसे दरिंदे, जो समाज के लिए खतरा व नासूर बन चुके हों, उन्हें सजा-ए-मौत के दंड से दंडित किया जाए। ऐसे अपराधी को महिमामयी मिट्टी से बने इस सुंदर और महान देश में जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है।
ऐसे घृणित कृत्य के लिए समाज का एक ही स्वर गूंज रहा है, ‘फांसी दो-फांसी दो। ऐसे अपराधी के लिए कठोरतम सजा इसलिए भी आवश्यक है, ताकि कोई व्यक्ति इस प्रकार की दुस्साहसिक घटना करने से पूर्व हजार बार सोचे और समाज में इसका सकारात्मक संदेश जाए।’ - पवन कुमार तिवारी, विशेष न्यायाधीश सीबीआई
छह में सजा, दस में इंतजार...और राज ही रह गए तीन मामले
दिल दहला देने वाले निठारी कांड के छह मामलों में गाजियाबाद की सीबीआई विशेष कोर्ट फैसले सुना चुकी है, मगर इसी कांड से जुडे़ दस मामले अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं। इन दस मामलों में भी अभी फैसला आना बाकी है।
इसके साथ ही निठारी कांड से जुडे़ तीन मामले ऐसे भी हैं, जिनसे अब कभी पर्दा नहीं उठ पाएगा। सीबीआई इनमें अपनी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। इस कारण शेखराजा, कुमारी सोनी समेत तीन मामले हमेशा के लिए मिस्ट्री बनकर रह गए।
29 दिसंबर 2006 को जब खूनी कोठी संख्या डी-5 के पीछे नाले से एक के बाद एक 16 मानव खोपड़ियां और अन्य अवशेष बरामद हुए तो देश की राजनीति तक में भूचाल आ गया। बरामद मानव खोपड़ियां और अन्य अवशेष मिलने के बाद निठारी कांड के इस प्रकरण में कुल 19 एफआईआर दर्ज की गईं।
पुलिस, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ के हाथों से होकर 11 जनवरी 2007 को यह पूरा प्रकरण राज्य सरकार द्वारा सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई ने अपनी पड़ताल शुरू की। सीबीआई ने कुल 19 एफआईआर में से 16 में अपनी चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी।
इन 16 मामलों में से अब तक 6 मामलों में गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट कोली को फांसी की सजा सुना चुकी हैं, हालंाकि एक मामले में कोली की फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। बाकी बचे दस मामले अभी विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में विचाराधीन हैं।
इसके अलावा तीन मामलों आरसी-4, आरसी18 और आरसी-19 की गहन पड़ताल के बाद भी सीबीआई उनमें किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। यही कारण रहा कि इन तीन मामलों में सीबीआई ने अपनी फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर) कोर्ट में दाखिल कर दीं।
यह तीन मामले बालक शेखराजा, कुमारी सोनी और एक अज्ञात बालक से संबंधित हैं। सीबीआई यह तक पता लगाने में नाकाम रही कि आखिर इन तीन बच्चों को जमीन निगल गई या आसमान।
कोर्ट में कोली बोला ‘अन्याय हुआ है’
सजा सुनाए जाने से पूर्व शुक्रवार सुबह सजा पर बहस के दौरान सुरेंद्र कोली आक्रोशित हो गया। कोली का कहना था कि उसके साथ अन्याय हुआ है। अभियोजन पक्ष अपने केस को साबित नहीं कर सका है।
न्यायाधीश का कहना था कि पूर्व में उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष इकबालिया बयान भी दिया था। इस पर कोली का कहना था कि उसे 70 दिनों से ज्यादा रिमांड पर लिया गया। इतना रिमांड तो किसी आतंकवादी का भी नहीं लिया जाता।
रिमांड के दौरान उसे यातनाएं दी जाती थीं, इसी के चलते उसने ऐसा बयान दिया था। सजा सुनाए जाने के समय अदालत के कटघरे में खड़े कोली के चेहरे पर उड़तीं हवाइयां साफ नजर आ रहीं थीं।
अभियोजन ने मांगी फांसी की सजा
सजा पर बहस करते हुए सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने कहा कि अभियुक्त ने एक ऐसी असहाय निर्धन स्त्री को अपना शिकार बनाया जोकि फटे हुए कपडे़ पहनती थी और झाड्ऱू पोंछे का काम करती थी।
अपनी हवस का शिकार बनाकर अभियुक्त ने उसकी हत्या कर दी। एक पशु के द्वारा भी ऐसा कृत्य नहीं किया जाता। मृतका की आत्मा को तभी शांति मिलेगी, जब कोर्ट अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाएगी।
अब तक छह मामलों में कोर्ट सुना चुकी है फैसला
सुरेंद्र कोली को इससे पूर्व गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट से निठारी कांड के ही पांच अन्य मामलों में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। बुधवार को उसे निठारी के छठे मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोषी ठहराया है।
1. विशेष सीबीआई न्यायाधीश रमा जैन ने 13 फरवरी 2009 को सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई थी। कालांतर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर दिया, जबकि सुरेंद्र कोली की सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया।
2. सीबीआई के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने कोली को निठारी कांड के ही दूसरे मामले में सजा 12 मई 2010 को फांसी की सजा सुनाई।
3. निठारी के तीसरे मामले में सीबीआई कोर्ट ने आरोपी सुरेंद्र कोली को 28 सितंबर 2010 को फांसी की सजा सुनाई।
4. वर्ष 2010 के ही दिसंबर माह में सीबीआई कोर्ट ने एक और मामले में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई।
5. 24 दिसंबर 2012 को सीबीआई के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने पांचवें मामले में भी सुरेंद्र कोली को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
6. 07 अक्तूबर 2016 को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने सुरेंद्र कोली को फांसी और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
निठारी कांड के कुछ महत्वपूर्ण प्वाइंट:
- अभियोजन की ओर से इस मामले में कोर्ट के समक्ष कुल 50 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
- डिफेंस की ओर से भी एक गवाह सफाई कर्मचारी इशरत की गवाही कोर्ट में हुई थी।
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न्यायाधीश ने यह फैसला घरों में काम करने वाली महिला की रेप और हत्या के मामले में दिया है। इससे पूर्व भी इस आरोपी को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट से निठारी के ही 5 मामलों में फांसी की सजा मिल चुकी है। शुक्रवार को उसे छठे मामले में सजा सुनाई गई।
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शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच सुरेंद्र कोली को डासना जेल से कोर्ट लाया गया। सुबह 11 बजे सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने सजा पर बहस करते हुए कहा कि कोली का यह प्रकरण ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में आरोपी को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। सजा पर बहस पूरी होने पर न्यायाधीश ने दोपहर दो बजे तक के लिए फैसला रिजर्व कर लिया।
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पौने दो बजे सदर हवालात से सुरेंद्र कोली को कोर्ट परिसर में लाया गया। ठीक दो बजे उसे विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में पेश किया गया। डिफेंस के अधिवक्ता अली मोहम्मद ने कोर्ट में अर्जी देकर फैसला बाद में सुनाए जाने की मांग की। इस पर न्यायाधीश का कहना था कि अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का कोई स्टे आदेश है तो उसे पेश किया जाए, अन्यथा अदालत का समय न बर्बाद किया जाए।
इसके बाद न्यायाधीश ने कोली को हत्या के मामले में फांसी और 10 हजार, अपहरण में आजीव कारावास और 10 हजार, रेप में आजीवन कारावास और 10 हजार के साथ ही साक्ष्य मिटाने के मामले में 7 साल कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कोली के गले में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए।
कोर्ट की टिप्पणी :
‘सजा का तात्पर्य प्रतिशोध लेना नहीं है। ’खून के बदले खून’ का सिद्धांत किसी भी सभ्य समाज में लागू नहीं किया जा सकता, फिर भी राज्य का काम ऐसा समाज बनाना है, जिसे सभ्य और सुसंस्कृत कहा जा सके।
यह तभी संभव है जब दोषसिद्ध अभियुक्त जैसे दरिंदे, जो समाज के लिए खतरा व नासूर बन चुके हों, उन्हें सजा-ए-मौत के दंड से दंडित किया जाए। ऐसे अपराधी को महिमामयी मिट्टी से बने इस सुंदर और महान देश में जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है।
ऐसे घृणित कृत्य के लिए समाज का एक ही स्वर गूंज रहा है, ‘फांसी दो-फांसी दो। ऐसे अपराधी के लिए कठोरतम सजा इसलिए भी आवश्यक है, ताकि कोई व्यक्ति इस प्रकार की दुस्साहसिक घटना करने से पूर्व हजार बार सोचे और समाज में इसका सकारात्मक संदेश जाए।’ - पवन कुमार तिवारी, विशेष न्यायाधीश सीबीआई
छह में सजा, दस में इंतजार...और राज ही रह गए तीन मामले
दिल दहला देने वाले निठारी कांड के छह मामलों में गाजियाबाद की सीबीआई विशेष कोर्ट फैसले सुना चुकी है, मगर इसी कांड से जुडे़ दस मामले अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं। इन दस मामलों में भी अभी फैसला आना बाकी है।
इसके साथ ही निठारी कांड से जुडे़ तीन मामले ऐसे भी हैं, जिनसे अब कभी पर्दा नहीं उठ पाएगा। सीबीआई इनमें अपनी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। इस कारण शेखराजा, कुमारी सोनी समेत तीन मामले हमेशा के लिए मिस्ट्री बनकर रह गए।
29 दिसंबर 2006 को जब खूनी कोठी संख्या डी-5 के पीछे नाले से एक के बाद एक 16 मानव खोपड़ियां और अन्य अवशेष बरामद हुए तो देश की राजनीति तक में भूचाल आ गया। बरामद मानव खोपड़ियां और अन्य अवशेष मिलने के बाद निठारी कांड के इस प्रकरण में कुल 19 एफआईआर दर्ज की गईं।
पुलिस, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ के हाथों से होकर 11 जनवरी 2007 को यह पूरा प्रकरण राज्य सरकार द्वारा सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई ने अपनी पड़ताल शुरू की। सीबीआई ने कुल 19 एफआईआर में से 16 में अपनी चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी।
इन 16 मामलों में से अब तक 6 मामलों में गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट कोली को फांसी की सजा सुना चुकी हैं, हालंाकि एक मामले में कोली की फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। बाकी बचे दस मामले अभी विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में विचाराधीन हैं।
इसके अलावा तीन मामलों आरसी-4, आरसी18 और आरसी-19 की गहन पड़ताल के बाद भी सीबीआई उनमें किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। यही कारण रहा कि इन तीन मामलों में सीबीआई ने अपनी फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर) कोर्ट में दाखिल कर दीं।
यह तीन मामले बालक शेखराजा, कुमारी सोनी और एक अज्ञात बालक से संबंधित हैं। सीबीआई यह तक पता लगाने में नाकाम रही कि आखिर इन तीन बच्चों को जमीन निगल गई या आसमान।
कोर्ट में कोली बोला ‘अन्याय हुआ है’
सजा सुनाए जाने से पूर्व शुक्रवार सुबह सजा पर बहस के दौरान सुरेंद्र कोली आक्रोशित हो गया। कोली का कहना था कि उसके साथ अन्याय हुआ है। अभियोजन पक्ष अपने केस को साबित नहीं कर सका है।
न्यायाधीश का कहना था कि पूर्व में उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष इकबालिया बयान भी दिया था। इस पर कोली का कहना था कि उसे 70 दिनों से ज्यादा रिमांड पर लिया गया। इतना रिमांड तो किसी आतंकवादी का भी नहीं लिया जाता।
रिमांड के दौरान उसे यातनाएं दी जाती थीं, इसी के चलते उसने ऐसा बयान दिया था। सजा सुनाए जाने के समय अदालत के कटघरे में खड़े कोली के चेहरे पर उड़तीं हवाइयां साफ नजर आ रहीं थीं।
अभियोजन ने मांगी फांसी की सजा
सजा पर बहस करते हुए सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने कहा कि अभियुक्त ने एक ऐसी असहाय निर्धन स्त्री को अपना शिकार बनाया जोकि फटे हुए कपडे़ पहनती थी और झाड्ऱू पोंछे का काम करती थी।
अपनी हवस का शिकार बनाकर अभियुक्त ने उसकी हत्या कर दी। एक पशु के द्वारा भी ऐसा कृत्य नहीं किया जाता। मृतका की आत्मा को तभी शांति मिलेगी, जब कोर्ट अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाएगी।
अब तक छह मामलों में कोर्ट सुना चुकी है फैसला
सुरेंद्र कोली को इससे पूर्व गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट से निठारी कांड के ही पांच अन्य मामलों में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। बुधवार को उसे निठारी के छठे मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोषी ठहराया है।
1. विशेष सीबीआई न्यायाधीश रमा जैन ने 13 फरवरी 2009 को सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई थी। कालांतर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर दिया, जबकि सुरेंद्र कोली की सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया।
2. सीबीआई के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने कोली को निठारी कांड के ही दूसरे मामले में सजा 12 मई 2010 को फांसी की सजा सुनाई।
3. निठारी के तीसरे मामले में सीबीआई कोर्ट ने आरोपी सुरेंद्र कोली को 28 सितंबर 2010 को फांसी की सजा सुनाई।
4. वर्ष 2010 के ही दिसंबर माह में सीबीआई कोर्ट ने एक और मामले में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई।
5. 24 दिसंबर 2012 को सीबीआई के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने पांचवें मामले में भी सुरेंद्र कोली को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
6. 07 अक्तूबर 2016 को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने सुरेंद्र कोली को फांसी और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
निठारी कांड के कुछ महत्वपूर्ण प्वाइंट:
- अभियोजन की ओर से इस मामले में कोर्ट के समक्ष कुल 50 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
- डिफेंस की ओर से भी एक गवाह सफाई कर्मचारी इशरत की गवाही कोर्ट में हुई थी।