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दहेज हत्या के आरोपी की जेल में मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 13 Apr 2016 12:54 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दहेज हत्या के आरोप में तीन साल से जेल में बंद जनक (36) की मंगलवार को रहस्यमय हालात में मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही मौत के कारणों का पता चलेगा। पुलिस छानबीन कर रही है।
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जेल अधीक्षक शिव प्रकाश यादव ने बताया कि जनक बैरक नंबर सात बी में बंद था। सुबह करीब साढ़े सात बजे वह बैरक के जंगले पर स्ट्रेचिंग कर रहा था, अचानक वह पीछे की ओर गिरा और बेहोश हो गया।
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उसे अस्पताल ले जाया जा रहा था, रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इसकी मजिस्ट्रेटी जांच होगी। मृतक के जीजा दलजीत ने बताया कि जनक के माता-पिता की मौत हो चुकी है। 21 अप्रैल 2006 को जनक की शादी आश्रम (दिल्ली) निवासी ज्योति से हुई थी। 22 फरवरी 2013 में ज्योति की मौत हो गई थी।
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ससुरालवालों ने इसे सुसाइड बताया था, जबकि मायके पक्ष ने दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 26 फरवरी 2013 को इंदिरापुरम पुलिस ने जनक को जेल भेजा था। एक अप्रैल को जीजा ने मुलाकात कर उसके माता पिता की मौत की जानकारी जनक को दी थी। उसकी सात अप्रैल को पेशी थी, उस दिन ही उसकी मां की तेरहवीं भी थी।
परिजनों ने जताया हत्या का अंदेशा
परिजनों का कहना है कि जिस तरह से जनक के सिर में पीछे चोट के निशान मिले हैं, उससे अंदेशा है कि उसकी हत्या की गई है। उनका दावा है कि जनक पर दहेज हत्या का आरोप गलत था, उनकी पत्नी ने सुसाइड किया था।
पाकी से उठा माता-पिता का साया
दलजीत ने बताया कि जनक और ज्योति की पांच साल की बेटी पाकी है। उससे माता-पिता का साया उठ गया है। पाकी की परवरिश उसकी बुआ कर रही है।