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आयकर विभाग पार्ट -2
Updated Sat, 17 Jun 2017 01:06 AM IST
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छापामारी को आयकर विभाग ने झोंकी पूरी ताकत
आयकर विभाग ने ऑपरेशन क्लीन मनी और क्लीन प्रॉपर्टी को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है। गोपनीय जानकारी जुटाने से लेकर कार्रवाई में विभाग के तेजतर्रार अधिकारियों व निरीक्षकों को लगाया है।
शुक्रवार को करीब 140 लोगों की टीम को कार्रवाई की जिम्मा सौंपा गया था। गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, दिल्ली से लेकर देहरादून ऑफिस तक के सीनियर अधिकारी व निरीक्षक लगाए गए थे, लेकिन कार्रवाई से पहले पूरा होम वर्क किया गया।
पूरी कार्रवाई मेरठ निवासी अजय चौधरी की कंपनी अजय कंस्ट्रक्शन और पूर्व चीफ इंजीनियर पुष्पेंद्र कुमार गोयल की गाजियाबाद स्थित कंपनी पीकेएस को ध्यान में रखकर की गई। सूत्रों के मुताबिक विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि सिंचाई विभाग के अधिकांश बड़े टेंडर इन्हीं दोनों कंपनियों को मिले हैं।
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अजय कंस्ट्रक्शन को मेरठ में तैनात सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर सुधीर कुमार शर्मा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा टेंडर मिले हैं। बाकी कंपनियों को टेंडर दिलाने में भी अजय चौधरी अहम भूमिका रही। विभागीय अधिकारियों जानकारी मिली कि चीफ इंजीनियर की कंपनी में अप्रत्यक्ष तौर पर हिस्सेदारी है।
उधर, पीकेएस इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड में सिंचाई विभाग के अभियंता खेमचंद की हिस्सेदारी होने की खुफिया जानकारी मिली। सूत्र बताते हैं कि खेमचंद की पत्नी कंपनी में पार्टनर हैं। इसके बाद आयकर की इंटेलीजेंस विंग ने रिकार्ड खंगाला तो दोनों कंपनियों कुछ अहम साक्ष्य हाथ लगे।
इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर गाजियाबाद इंटेलीजेंस विंग को लखनऊ स्थित निदेशक से छापेमारी की स्वीकृति लेने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। लखनऊ से स्वीकृति मिलने के बाद बृहस्पतिवार रात को पुलिस फोर्स मांगी गई। डीजीपी कार्यालय ने रात में ही फोर्स उपलब्ध कराने का आदेश दिया। इसके बाद विभाग ने सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी।
लंबे समय तक मलाईदार पदों पर रहने के बाद धनकुबेर बने इंजीनियर, ठेकेदारों के साथ ही तमाम विभागों के अधिकारियों की लंबी फेहरिस्त है जो अब आयकर की रडार पर हैं।
केंद्र सरकार द्वारा आयकर विभाग को कार्रवाई के लिए खुली छूट दी गई है। ऐसे में विभाग के निशाने पर कई अधिकारी और ठेकेदार हैं। कार्रवाई के लिए विभाग की इंटेलीजेंस विंग खुफिया जानकारी जुटाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इसी का नतीजा है कि अब ताबड़तोड़ छापामारी हो रही है।
बीते महीने तीन आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद आयकर की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। सूत्र बताते हैं कि आयकर ने तमाम विकास प्राधिकरणों, सिंचाई, बिजली, जल निगम, नगर निगमों से लेकर स्वास्थ्य व पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों के उन अधिकारियों और इंजीनियरों को चिह्नित किया है, जो लंबे समय तक ही पद पर रहे हैं।
ऐसे अधिकारियों की लिस्ट बनाकर कुंडली खंगाली गई है, जिसमें काफी के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले हैं। अधिकारी एवं इंजीनियरों ने ठेकेदारों से गठजोड़ कर बेशुमार दौलत कमाई है। अब ऐसे लोगों की आयकर सिलसिलेवार तरीके से कार्रवाई कर शिकंजा कस रहा है।
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आयकर विभाग ने ऑपरेशन क्लीन मनी और क्लीन प्रॉपर्टी को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है। गोपनीय जानकारी जुटाने से लेकर कार्रवाई में विभाग के तेजतर्रार अधिकारियों व निरीक्षकों को लगाया है।
शुक्रवार को करीब 140 लोगों की टीम को कार्रवाई की जिम्मा सौंपा गया था। गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, दिल्ली से लेकर देहरादून ऑफिस तक के सीनियर अधिकारी व निरीक्षक लगाए गए थे, लेकिन कार्रवाई से पहले पूरा होम वर्क किया गया।
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पूरी कार्रवाई मेरठ निवासी अजय चौधरी की कंपनी अजय कंस्ट्रक्शन और पूर्व चीफ इंजीनियर पुष्पेंद्र कुमार गोयल की गाजियाबाद स्थित कंपनी पीकेएस को ध्यान में रखकर की गई। सूत्रों के मुताबिक विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि सिंचाई विभाग के अधिकांश बड़े टेंडर इन्हीं दोनों कंपनियों को मिले हैं।
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अजय कंस्ट्रक्शन को मेरठ में तैनात सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर सुधीर कुमार शर्मा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा टेंडर मिले हैं। बाकी कंपनियों को टेंडर दिलाने में भी अजय चौधरी अहम भूमिका रही। विभागीय अधिकारियों जानकारी मिली कि चीफ इंजीनियर की कंपनी में अप्रत्यक्ष तौर पर हिस्सेदारी है।
उधर, पीकेएस इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड में सिंचाई विभाग के अभियंता खेमचंद की हिस्सेदारी होने की खुफिया जानकारी मिली। सूत्र बताते हैं कि खेमचंद की पत्नी कंपनी में पार्टनर हैं। इसके बाद आयकर की इंटेलीजेंस विंग ने रिकार्ड खंगाला तो दोनों कंपनियों कुछ अहम साक्ष्य हाथ लगे।
इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर गाजियाबाद इंटेलीजेंस विंग को लखनऊ स्थित निदेशक से छापेमारी की स्वीकृति लेने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। लखनऊ से स्वीकृति मिलने के बाद बृहस्पतिवार रात को पुलिस फोर्स मांगी गई। डीजीपी कार्यालय ने रात में ही फोर्स उपलब्ध कराने का आदेश दिया। इसके बाद विभाग ने सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी।
लंबे समय तक मलाईदार पदों पर रहने के बाद धनकुबेर बने इंजीनियर, ठेकेदारों के साथ ही तमाम विभागों के अधिकारियों की लंबी फेहरिस्त है जो अब आयकर की रडार पर हैं।
केंद्र सरकार द्वारा आयकर विभाग को कार्रवाई के लिए खुली छूट दी गई है। ऐसे में विभाग के निशाने पर कई अधिकारी और ठेकेदार हैं। कार्रवाई के लिए विभाग की इंटेलीजेंस विंग खुफिया जानकारी जुटाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इसी का नतीजा है कि अब ताबड़तोड़ छापामारी हो रही है।
बीते महीने तीन आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद आयकर की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। सूत्र बताते हैं कि आयकर ने तमाम विकास प्राधिकरणों, सिंचाई, बिजली, जल निगम, नगर निगमों से लेकर स्वास्थ्य व पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों के उन अधिकारियों और इंजीनियरों को चिह्नित किया है, जो लंबे समय तक ही पद पर रहे हैं।
ऐसे अधिकारियों की लिस्ट बनाकर कुंडली खंगाली गई है, जिसमें काफी के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले हैं। अधिकारी एवं इंजीनियरों ने ठेकेदारों से गठजोड़ कर बेशुमार दौलत कमाई है। अब ऐसे लोगों की आयकर सिलसिलेवार तरीके से कार्रवाई कर शिकंजा कस रहा है।