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उलझी जांच, उपद्रव करने वालों पर नहीं आई आंच-Cordination
Updated Mon, 24 Sep 2018 06:00 PM IST
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उलझी जांच, उपद्रवियों पर नहीं आई आंच
गाजियाबाद। चुनावी साल के चलते पुलिस भी राजनीति के फेर में उलझ गई है। यही वजह है कि नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद वह भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं और दलित आंदोलन के उपद्रवियों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। दो बड़े मामलों में पुलिस के कार्रवाई से पीछे हटने के अब कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। मामला वोट बैंक और सत्ताधारी दल से जुड़ा हुआ है, लिहाजा पुलिस भी अब आरोपियों को राजनीतिक चश्मे से देख रही है।
केस-एक
कविनगर थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग समुदाय के युवक-युवती के प्रेम विवाह में रोड़ा बने भाजपाइयों ने दिसंबर 2017 में एएलटी रोड जाम कर जमकर हंगामा किया था। भाजपा के तत्कालीन महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा समेत कई बड़े नेता भी इसमें शामिल थे। बाद में पुलिस ने भाजपा महानगर अध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ताओं पर बलवे समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस एक भी कार्यकर्ता की गिरफ्तारी तक नहीं कर सकी। विवेचना के बहाने पुलिस गिरफ्तारी से बच रही है।
केस-2
इसके बाद एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में दो अप्रैल 2018 को दलित आंदोलन के नाम पर गाजियाबाद में जमकर उपद्रव हुआ। उपद्रवियों ने ट्रेन रोकी, पुलिसकर्मियों की बाइक जलाई, पत्थरबाजी की और सड़क जाम की। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस ने जिले के सभी थानों में करीब 1200 से ज्यादा उपद्रवियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किए। इनमें 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को नामजद किया गया था। उपद्रवियों पर गैरजमानती धाराएं भी लगी थीं। मामले की जांच के लिए एसएसपी ने एसआईअी का गठन किया तो शुरूआत में पुलिस का रुख सख्त लगा, लेकिन अब यह जांच भी फाइलों में बंद हो गई। इस मामले में भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
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केस-3
अंबेडकर प्रतिमा लगाने के मामले में बैकफुट पर पुलिस
जनवरी 2018 में कचहरी में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाए जाने पर भी जमकर विवाद हुआ था। पुलिस और प्रशासन ने लगाई गई प्रतिमा को रातों रात हटवा दिया गया था। इस मामले में भी पुलिस ने बार एसोसिएशन के कई पदाधिकारियों समेत अन्य लोगों पर नामजद केस दर्ज किया था। पुलिस इस मामले में भी कार्रवाई नहीं कर पाई है। यह मामला भी अभी फाइलों में बंद है।
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सत्ताधारी दल को वोट बैंक बिखर जाने का डर
वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। एससी-एसटी एक्ट को लेकर सरकार पहले ही दलित और गैर दलितों के बीच हो रहे द्वंद में फंसी नजर आ रही है। ऐसे में दलित आंदोलन में उपद्रव का मामला हो या बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा लगाने का मामला, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई तो सत्ताधारी दल से बड़ा वोट बैंक खिसक सकता है। माना जा रहा है कि इसी वजह से पुलिस इस मामले में हाथ नहीं डालना चाह रही है और दोनों मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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कोट
इन मामलों में विवेचना चल रही है। विवेचना पूरी होने पर कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है तो उसमें न्यायालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - वैभव कृष्ण, एसएसपी
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गाजियाबाद। चुनावी साल के चलते पुलिस भी राजनीति के फेर में उलझ गई है। यही वजह है कि नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद वह भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं और दलित आंदोलन के उपद्रवियों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। दो बड़े मामलों में पुलिस के कार्रवाई से पीछे हटने के अब कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। मामला वोट बैंक और सत्ताधारी दल से जुड़ा हुआ है, लिहाजा पुलिस भी अब आरोपियों को राजनीतिक चश्मे से देख रही है।
केस-एक
कविनगर थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग समुदाय के युवक-युवती के प्रेम विवाह में रोड़ा बने भाजपाइयों ने दिसंबर 2017 में एएलटी रोड जाम कर जमकर हंगामा किया था। भाजपा के तत्कालीन महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा समेत कई बड़े नेता भी इसमें शामिल थे। बाद में पुलिस ने भाजपा महानगर अध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ताओं पर बलवे समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस एक भी कार्यकर्ता की गिरफ्तारी तक नहीं कर सकी। विवेचना के बहाने पुलिस गिरफ्तारी से बच रही है।
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केस-2
इसके बाद एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में दो अप्रैल 2018 को दलित आंदोलन के नाम पर गाजियाबाद में जमकर उपद्रव हुआ। उपद्रवियों ने ट्रेन रोकी, पुलिसकर्मियों की बाइक जलाई, पत्थरबाजी की और सड़क जाम की। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस ने जिले के सभी थानों में करीब 1200 से ज्यादा उपद्रवियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किए। इनमें 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को नामजद किया गया था। उपद्रवियों पर गैरजमानती धाराएं भी लगी थीं। मामले की जांच के लिए एसएसपी ने एसआईअी का गठन किया तो शुरूआत में पुलिस का रुख सख्त लगा, लेकिन अब यह जांच भी फाइलों में बंद हो गई। इस मामले में भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
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केस-3
अंबेडकर प्रतिमा लगाने के मामले में बैकफुट पर पुलिस
जनवरी 2018 में कचहरी में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाए जाने पर भी जमकर विवाद हुआ था। पुलिस और प्रशासन ने लगाई गई प्रतिमा को रातों रात हटवा दिया गया था। इस मामले में भी पुलिस ने बार एसोसिएशन के कई पदाधिकारियों समेत अन्य लोगों पर नामजद केस दर्ज किया था। पुलिस इस मामले में भी कार्रवाई नहीं कर पाई है। यह मामला भी अभी फाइलों में बंद है।
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सत्ताधारी दल को वोट बैंक बिखर जाने का डर
वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। एससी-एसटी एक्ट को लेकर सरकार पहले ही दलित और गैर दलितों के बीच हो रहे द्वंद में फंसी नजर आ रही है। ऐसे में दलित आंदोलन में उपद्रव का मामला हो या बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा लगाने का मामला, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई तो सत्ताधारी दल से बड़ा वोट बैंक खिसक सकता है। माना जा रहा है कि इसी वजह से पुलिस इस मामले में हाथ नहीं डालना चाह रही है और दोनों मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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कोट
इन मामलों में विवेचना चल रही है। विवेचना पूरी होने पर कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है तो उसमें न्यायालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - वैभव कृष्ण, एसएसपी