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सिपाही व साथी के टुकड़े कर बहा दिए थे नाले में, एक गिरफ्तार-Ghaziabad city
Updated Sat, 08 Sep 2018 08:20 PM IST
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नोएडा, बिजनौर, हापुड़, बरेली, लखनऊ, शाहजहांपुर, इलाहाबाद के ध्यानार्थ :
चोर को पकड़ा तो 11 साल बाद खुला डबल मर्डर का राज
सिपाही व साथी के टुकड़े कर बहा दिए थे नाले में, हत्यारोपी गिरफ्तार
भाइयों और मामा के साथ मिलकर छोलस में कर दी थी सिपाही की हत्या
गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात सिपाही 2007 में हुआ था लापता
भाई ने कविनगर थाने में दर्ज कराई थी गुमशुदगी
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए गाजियाबाद पुलिस लाइंस में तैनात सिपाही की गुमशुदगी के राज से 11 साल बाद पर्दा उठा है। सिपाही और उसके एक साथी (पुलिस के मुखबिर) को गौतमबुद्धनगर के छोलस गांव में उन्हीं के कुछ पहचान के लोगों ने मौत के घाट उतार दिया था। हत्यारों ने दोनों के शवों के टुकड़े-टुकड़े कर नाले में बहा दिए। शुक्रवार को पुलिस ने एक मोबाइल चोर को पकड़ा और सख्ती से पूछताछ की तो सिपाही की हत्या का यह 11 साल पुराना राज खुला।
वर्ष 2007 में गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात सिपाही इकरार निवासी पेंदी, बिजनौर चुनाव ड्यूटी के बाद अचानक लापता हो गया था। पुलिस लाइंस में उसकी वापसी नहीं हुई तो अधिकारियों ने रजिस्टर में उसकी गैरहाजिरी लगा दी। लापता होने के चार दिन बाद 23 अप्रैल 2007 को सिपाही इकरार के भाई इसरार ने कविनगर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस की टीमों ने प्रयास किया, लेकिन इकरार का सुराग नहीं लगा। पुलिस अधिकारी भी शांत बैठ गए। शुक्रवार शाम सिहानी गेट थाना क्षेत्र से गुम हुए मोबाइल की तलाश करते हुए क्राइम ब्रांच ने एक चोर मेघू को गिरफ्तार किया और सख्ती से पूछताछ की तो मेघू ने जो खुलासा किया उससे पुलिस अधिकारियों के पैरों तले की जमीन खिसक गई। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि मेघू ने पूछताछ में खुलासा किया कि गाजियाबाद में तैनात सिपाही इकरार अली और उसके एक साथी विजयपाल की हत्या उसने अपने चार भाइयों राजवीर निवासी बझेड़ा हापुड़, पवन उर्फ पवनू, सुबोध, नीटू और मामा प्रकाश के साथ मिलकर छौलस गौतमबुद्ध नगर में की थी। पुलिस से बचने के लिए पांचों ने इकरार और विजयपाल के शव के टुकड़े किए और बोरे में भरकर नाले पर ले गए, यहां टुकड़े नाले में बहा दिए गए। एसएसपी ने बताया कि इकरार की घड़ी हत्यारोपी मेघू के पास से बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पवन उर्फ पवनू और सुधीर चोरी की अन्य वारदातों में डासना जेल में बंद है। नीटू के बारे में जानकारी की जा रही है।
रुपयों के लेनदेन में हुई हत्या
एसएसपी ने बताया कि हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया मेघू अपने मामा व भाइयों के साथ अटैची चोरी और जेबतराशी का काम करता था। मृतक विजयपाल पुलिस का मुखबिर था और मेघू और उसके साथ धंधे में शामिल लोगों से पैसा लेता था। वारदात के दिन भी विजयपाल अपने साथ सिपाही इकरार को लेकर गया था ताकि उन्हें पकड़वा सके। इस बात पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। पांचों आरोपियों ने सिपाही और विजयपाल को दबोच लिया और चापड़ से ताबड़तोड़ वार कर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद वह छोलस से कभी इलाहाबाद, शाहजहांपुर तो कभी बरेली, लखनऊ में जाकर वारदात करते रहे हैं।
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रुपये के बंटवारे को लेकर मामा को भी मार दी थी गोली
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि पकड़ा गया हत्यारोपी कुख्यात अपराधी है। वर्ष 2010 में इस गैंग ने चोरी की थी। इसमें उन्हें मोटी रकम और ज्वेलरी मिली थी। इसको लेकर पवन उर्फ पवनू और उसके मामा प्रकाश का झगड़ा हो गया था। इस पर पवनू ने मामा प्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसकी हत्या के आरोप में पवनू और मेघू जारचा थाने से जेल भी गए थे।
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चोर को पकड़ा तो 11 साल बाद खुला डबल मर्डर का राज
सिपाही व साथी के टुकड़े कर बहा दिए थे नाले में, हत्यारोपी गिरफ्तार
भाइयों और मामा के साथ मिलकर छोलस में कर दी थी सिपाही की हत्या
गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात सिपाही 2007 में हुआ था लापता
भाई ने कविनगर थाने में दर्ज कराई थी गुमशुदगी
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए गाजियाबाद पुलिस लाइंस में तैनात सिपाही की गुमशुदगी के राज से 11 साल बाद पर्दा उठा है। सिपाही और उसके एक साथी (पुलिस के मुखबिर) को गौतमबुद्धनगर के छोलस गांव में उन्हीं के कुछ पहचान के लोगों ने मौत के घाट उतार दिया था। हत्यारों ने दोनों के शवों के टुकड़े-टुकड़े कर नाले में बहा दिए। शुक्रवार को पुलिस ने एक मोबाइल चोर को पकड़ा और सख्ती से पूछताछ की तो सिपाही की हत्या का यह 11 साल पुराना राज खुला।
वर्ष 2007 में गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात सिपाही इकरार निवासी पेंदी, बिजनौर चुनाव ड्यूटी के बाद अचानक लापता हो गया था। पुलिस लाइंस में उसकी वापसी नहीं हुई तो अधिकारियों ने रजिस्टर में उसकी गैरहाजिरी लगा दी। लापता होने के चार दिन बाद 23 अप्रैल 2007 को सिपाही इकरार के भाई इसरार ने कविनगर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस की टीमों ने प्रयास किया, लेकिन इकरार का सुराग नहीं लगा। पुलिस अधिकारी भी शांत बैठ गए। शुक्रवार शाम सिहानी गेट थाना क्षेत्र से गुम हुए मोबाइल की तलाश करते हुए क्राइम ब्रांच ने एक चोर मेघू को गिरफ्तार किया और सख्ती से पूछताछ की तो मेघू ने जो खुलासा किया उससे पुलिस अधिकारियों के पैरों तले की जमीन खिसक गई। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि मेघू ने पूछताछ में खुलासा किया कि गाजियाबाद में तैनात सिपाही इकरार अली और उसके एक साथी विजयपाल की हत्या उसने अपने चार भाइयों राजवीर निवासी बझेड़ा हापुड़, पवन उर्फ पवनू, सुबोध, नीटू और मामा प्रकाश के साथ मिलकर छौलस गौतमबुद्ध नगर में की थी। पुलिस से बचने के लिए पांचों ने इकरार और विजयपाल के शव के टुकड़े किए और बोरे में भरकर नाले पर ले गए, यहां टुकड़े नाले में बहा दिए गए। एसएसपी ने बताया कि इकरार की घड़ी हत्यारोपी मेघू के पास से बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पवन उर्फ पवनू और सुधीर चोरी की अन्य वारदातों में डासना जेल में बंद है। नीटू के बारे में जानकारी की जा रही है।
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रुपयों के लेनदेन में हुई हत्या
एसएसपी ने बताया कि हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया मेघू अपने मामा व भाइयों के साथ अटैची चोरी और जेबतराशी का काम करता था। मृतक विजयपाल पुलिस का मुखबिर था और मेघू और उसके साथ धंधे में शामिल लोगों से पैसा लेता था। वारदात के दिन भी विजयपाल अपने साथ सिपाही इकरार को लेकर गया था ताकि उन्हें पकड़वा सके। इस बात पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। पांचों आरोपियों ने सिपाही और विजयपाल को दबोच लिया और चापड़ से ताबड़तोड़ वार कर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद वह छोलस से कभी इलाहाबाद, शाहजहांपुर तो कभी बरेली, लखनऊ में जाकर वारदात करते रहे हैं।
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रुपये के बंटवारे को लेकर मामा को भी मार दी थी गोली
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि पकड़ा गया हत्यारोपी कुख्यात अपराधी है। वर्ष 2010 में इस गैंग ने चोरी की थी। इसमें उन्हें मोटी रकम और ज्वेलरी मिली थी। इसको लेकर पवन उर्फ पवनू और उसके मामा प्रकाश का झगड़ा हो गया था। इस पर पवनू ने मामा प्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसकी हत्या के आरोप में पवनू और मेघू जारचा थाने से जेल भी गए थे।