UP: छह हजार रुपये में नहीं चला घर, पहली महिला बस चालक प्रियंका ने छोड़ी नौकरी; फिर थामा ट्रक का स्टीयरिंग
प्रियंका ने बताया कि वर्ष 2015 में पति की मौत के बाद उन्होंने ट्रक चलाया था। परिवहन निगम से भर्ती निकलने पर सरकारी नौकरी के लिए उन्होंने आवेदन कर दिया। आवेदन के बाद जॉब लगी। लेकिन छह हजार रुपये ही मिले इसमें घर का खर्च चलाना मुश्किल था।
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सूबे की पहली महिला बस चालक प्रियंका शर्मा का छह हजार रुपये में घर नहीं चला तो परिवहन निगम की नौकरी छोड़ उन्होंने ट्रक चलाना शुरू कर दिया। शर्मा कौशांबी बस अड्डे में संविदा पर चालक थीं और 13 माह तक नौकरी की। इस दौरान उन्होंने गाजियाबाद से लखनऊ, गोरखपुर, रायबेरली, अयोध्या, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित अन्य शहरों में बसें चलाईं। वह पक्की नौकरी के लिए परिवहन निगम के अपर प्रबंध निदेशक और प्रबंध निदेशक से गुहार भी लगा चुकी हैं।
बिहार के बांका जिला की रहने वाली प्रियंका शर्मा दिल्ली के शालीमार बाग में रहती हैं। वर्ष 2022 में वह कौशांबी बस डिपो में संविदा पर चालक की नौकरी पर लगीं। उन्होंने बताया कि परिवहन निगम से कम और समय पर वेतन नहीं मिलने से परेशानी हो रही थी। छह हजार रुपये से बच्चों की पढ़ाई और घर नहीं चल पा रहा था। जिसकी वजह से दो माह पहले परिवहन निगम की नौकरी छोड़कर फिर से ट्रक चलाना शुरू कर दिया।
प्रियंका ने बताया कि वर्ष 2015 में पति की मौत के बाद उन्होंने ट्रक चलाया था। परिवहन निगम से भर्ती निकलने पर सरकारी नौकरी के लिए उन्होंने आवेदन कर दिया। आवेदन के बाद जॉब लगी। लेकिन छह हजार रुपये ही मिले इसमें घर का खर्च चलाना मुश्किल था। ऐसे में उन्होंने परिवहन निगम की नौकरी छोड़ दी और दोबारा ट्रक चलाने लगी।