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निगम की सुस्ती: शासन के सख्त आदेश भी नहीं आए काम, बवाल के बाद याद आई प्रतिमा की सुरक्षा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:51 AM IST
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Corporation's lethargy: Even strict government orders proved ineffective; the need to secure the statue was realized only after an uproar.

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गाजियाबाद। नवयुग मार्केट स्थित पार्क में डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के साथ असामाजिक तत्वों की हरकत ने नगर निगम की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद निगम ने अपने कार्यालय के ठीक सामने लगी प्रतिमा की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया। बवाल होते ही बजट भी मिल गया और काम भी आनन-फानन में शुरू करा दिया गया।

24 दिसंबर 2025 को प्रदेश के सभी नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए थे। शासनादेश में कहा गया था कि प्रदेश में जहां भी बाबा साहेब की मूर्तियों की सुरक्षा पुख्ता नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर बाउंड्रीवॉल, छतरी और अन्य सुरक्षा इंतजाम कराए जाएं और 30 दिसंबर 2025 तक पूरा विवरण शासन के पोर्टल पर अपलोड किया जाए। लेकिन नौ महीने बीतने के बाद भी नगर निगम ने इस पर कार्रवाई जरूरी नहीं समझी।
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हैरानी की बात है कि आदेश के बावजूद समय रहते प्रतिमा के चारों ओर टफन ग्लास और सीसीटीवी कैमरे जैसे पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। यदि समय रहते सुरक्षा ढांचा तैयार हो जाता तो असामाजिक तत्व प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस नहीं कर पाते।
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नवयुग मार्केट में बवाल के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जब दिसंबर में ही सुरक्षा ऑडिट के आदेश आ चुके थे तो इस मुख्य पार्क को नजरअंदाज क्यों किया गया? इसकी जवाबदेही किसकी है? समय रहते प्रबंध न करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई? जो काम सामान्य प्रक्रिया में होना था, वह किसी अनहोनी के बाद ही क्यों शुरू कराया गया?
वार्ड 27 के पार्षद नरेश जाटव का कहना है कि यदि शासन के आदेशों का समय पर पालन होता तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। अब देखना होगा कि क्या निगम इस ढिलाई से सबक लेकर शहर की अन्य संवेदनशील जगहों पर समय रहते सुरक्षा प्रबंध करेगा या अगली घटना का इंतजार करेगा।

मुख्य अभियंता एनके चौधरी ने बताया कि आंबेडकर प्रतिमा पर छतरी पहले से बनी हुई है। इस तरह की घटना का अंदाजा नहीं था। अब सुरक्षा की दृष्टि से टफन ग्लास लगाने का काम तत्काल शुरू करा दिया गया है।
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