{"_id":"6a457ca2bdfab06c1b043e13","slug":"commuters-suffering-daily-in-accidents-only-one-road-warrior-found-in-three-years-ghaziabad-news-c-30-gbd1037-921202-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: हादसों में रोज तड़प रहे राहगीर...तीन वर्ष में मिला सिर्फ एक राहवीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: हादसों में रोज तड़प रहे राहगीर...तीन वर्ष में मिला सिर्फ एक राहवीर
विज्ञापन
अनुराग श्रीवास्तव
गाजियाबाद। जिले की सड़कों पर हादसों के बाद अक्सर एक जैसी तस्वीर दिखती है। घायल जिंदगी व मौत से जूझता रहता है और आसपास खड़े लोग तमाशबीन बने रहते हैं। घायलों को समय रहते अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की राहवीर योजना भी जिले में अपेक्षित असर नहीं दिखा पा रही है।
हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन वर्षों में केवल एक व्यक्ति ने सड़क हादसे के घायल को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद की और योजना का लाभार्थी बना। यह आंकड़ा योजना के प्रति लोगों की जागरूकता और भागीदारी, दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
सरकार ने अप्रैल 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर इलाज दिलाने और आम लोगों को मदद के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गुड सेमेरिटन (नेक आदमी) योजना शुरू की थी। बाद में इसका नाम बदलकर राहवीर योजना कर दिया गया। योजना के तहत हादसे के बाद गोल्डन ऑवर यानी पहले एक घंटे के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
विज्ञापन
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि मददगार को किसी तरह की कानूनी या पुलिसिया कार्रवाई में नहीं उलझाया जाएगा। इसके बावजूद जिले में योजना का असर नगण्य रहा है।
-- --
कानून का डर अब भी नहीं हुआ खत्म
अधिवक्ता डॉ. राजकुमार चौहान बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश और सरकारी आश्वासनों के बावजूद लोगों में यह धारणा बनी हुई है कि घायल को अस्पताल पहुंचाने पर पुलिस और अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ेंगे। कई लोगों को यह भी डर रहता है कि कहीं उन्हें ही दुर्घटना का जिम्मेदार न मान लिया जाए। यही वजह है कि अधिकांश लोग मदद करने से बचते हैं।
-- --
हर साल बढ़ रहीं मौतें
आंकड़े बताते हैं कि सड़क हादसों में मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। वर्ष 2023 में 991 दुर्घटनाओं में 365 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2024 में 996 हादसों में 381 लोगों ने जान गंवाई। वर्ष 2025 में 1097 दुर्घटनाओं में 400 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 461 सड़क हादसों में ही 341 लोगों की जान जा चुकी है। इस तरह पिछले साढ़े तीन वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 1,487 लोगों की मौत हो चुकी है।
-- --
घटनाएं जो आईना दिखाती हैं
केस 1 : बीती 27 जून को दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर पीतल के बुश से भरा कैंटर एक ट्रक की टक्कर से पलट गया था। इसमें कैंटर का चालक गंभीर रूप से घायल होकर फंस गया था। आसपास के लोग घायल की मदद करने के बजाय कैंटर से बुश चोरी करने में लगे रहे। काफी देर बाद पहुंची पुलिस ने चालक को अस्पताल पहुंचाया था। गनीमत रही कि उसकी जान बच गई।
-- --
केस 2 : इसी वर्ष 13 मई को सिहानी गेट थाना क्षेत्र में मेरठ रोड तिराहे पर बाइक सवार नाबालिग और उसका दोस्त डिवाइडर से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, लेकिन किसी ने घायलों को अस्पताल नहीं पहुंचाया। बाद में पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनको बचाया नहीं जा सका।
-- --
समय पर मदद से घट सकता है मौत का आंकड़ा
आरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. सियाराम वर्मा का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में केवल एक व्यक्ति ने राहवीर योजना के तहत आवेदन किया है। उनका कहना है कि यदि सड़क हादसे के घायल को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसके बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लोगों को बिना किसी डर के आगे आकर मानवता का परिचय देना चाहिए।
विज्ञापन
गाजियाबाद। जिले की सड़कों पर हादसों के बाद अक्सर एक जैसी तस्वीर दिखती है। घायल जिंदगी व मौत से जूझता रहता है और आसपास खड़े लोग तमाशबीन बने रहते हैं। घायलों को समय रहते अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की राहवीर योजना भी जिले में अपेक्षित असर नहीं दिखा पा रही है।
हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन वर्षों में केवल एक व्यक्ति ने सड़क हादसे के घायल को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद की और योजना का लाभार्थी बना। यह आंकड़ा योजना के प्रति लोगों की जागरूकता और भागीदारी, दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
विज्ञापन
सरकार ने अप्रैल 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर इलाज दिलाने और आम लोगों को मदद के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गुड सेमेरिटन (नेक आदमी) योजना शुरू की थी। बाद में इसका नाम बदलकर राहवीर योजना कर दिया गया। योजना के तहत हादसे के बाद गोल्डन ऑवर यानी पहले एक घंटे के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
विज्ञापन
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि मददगार को किसी तरह की कानूनी या पुलिसिया कार्रवाई में नहीं उलझाया जाएगा। इसके बावजूद जिले में योजना का असर नगण्य रहा है।
कानून का डर अब भी नहीं हुआ खत्म
अधिवक्ता डॉ. राजकुमार चौहान बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश और सरकारी आश्वासनों के बावजूद लोगों में यह धारणा बनी हुई है कि घायल को अस्पताल पहुंचाने पर पुलिस और अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ेंगे। कई लोगों को यह भी डर रहता है कि कहीं उन्हें ही दुर्घटना का जिम्मेदार न मान लिया जाए। यही वजह है कि अधिकांश लोग मदद करने से बचते हैं।
हर साल बढ़ रहीं मौतें
आंकड़े बताते हैं कि सड़क हादसों में मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। वर्ष 2023 में 991 दुर्घटनाओं में 365 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2024 में 996 हादसों में 381 लोगों ने जान गंवाई। वर्ष 2025 में 1097 दुर्घटनाओं में 400 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 461 सड़क हादसों में ही 341 लोगों की जान जा चुकी है। इस तरह पिछले साढ़े तीन वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 1,487 लोगों की मौत हो चुकी है।
घटनाएं जो आईना दिखाती हैं
केस 1 : बीती 27 जून को दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर पीतल के बुश से भरा कैंटर एक ट्रक की टक्कर से पलट गया था। इसमें कैंटर का चालक गंभीर रूप से घायल होकर फंस गया था। आसपास के लोग घायल की मदद करने के बजाय कैंटर से बुश चोरी करने में लगे रहे। काफी देर बाद पहुंची पुलिस ने चालक को अस्पताल पहुंचाया था। गनीमत रही कि उसकी जान बच गई।
केस 2 : इसी वर्ष 13 मई को सिहानी गेट थाना क्षेत्र में मेरठ रोड तिराहे पर बाइक सवार नाबालिग और उसका दोस्त डिवाइडर से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, लेकिन किसी ने घायलों को अस्पताल नहीं पहुंचाया। बाद में पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनको बचाया नहीं जा सका।
समय पर मदद से घट सकता है मौत का आंकड़ा
आरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. सियाराम वर्मा का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में केवल एक व्यक्ति ने राहवीर योजना के तहत आवेदन किया है। उनका कहना है कि यदि सड़क हादसे के घायल को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसके बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लोगों को बिना किसी डर के आगे आकर मानवता का परिचय देना चाहिए।