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Ghaziabad News: अटौर में कोलोनाइजरों ने डूबो दिए डेढ़ सौ घर
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गाजियाबाद। अटौर क्षेत्र में कोलोनाइजरों ने 150 घर हिंडन के पानी में डूबो दिए। अवैध कॉलोनी विकसित होने में दस वर्ष लग गए, लेकिन न तो इस तरफ कभी जीडीए का प्रवर्तन दस्ता पहुंचा और ना ही सिंचाई विभाग ने कभी रोका। कर्मचारी आते सुविधा शुल्क लेकर चले जाते। इस अवधि में लोगों ने सपनों का आशियाना बना लिया, लेकिन हिंडन की बाढ़ ने सब तहस-नहस कर दिया। बाढ़ का पानी घुसने पर सभी 750 लोगों को एनडीआरएफ की टीम ने सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। रविवार को अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया तो लोगों ने अपना दर्द बयां किया।
इन काॅलोनियों में रहने वाले अधिकांश लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के हैं, जबकि 25 परिवार अटौर गांव के रहने वाले हैं। जलभराव होने से लगभग चार हजार बीघे खेत की फसल भी जलमग्न हो गई है। लोगों का कहना है कि गाजियाबाद शहर का नाम सुनकर रोजी-कमाने के लिए आकर रहने लगे थे। आसपास के लोगों ने बताया कि जमीन सस्ती है तो अपनी हैसियत के अनुसार भूखंड लेकर मकान भी खड़ा कर लिया, इस दौरान किसी ने नहीं बताया कि यह डूब क्षेत्र है और हिंडन (खादर) का पानी भी आता है।
प्रशासन से की शिकायत तो डीलरों ने कर दिया था हमला
बाढ़ से घर छोड़कर फार्म हाउस में रह रहे प्रिंस ने बताया कि दो साल से लगातार प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं कि हिंडन का पानी आने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। एक बार प्रशासन की टीम आई तो डीलरों ने हमला कर दिया था। इसकी कई जगह शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज घर छोड़कर शरणार्थी बनकर रहना पड़ रहा है।
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13 साल से रह रहे हैं क्षेत्र में
अलीगढ़ के रहने वाले प्रताप ने बताया कि गाजियाबाद में 13 वर्ष से रहकर मजदूरी करते हैं। डीलर ने सस्ती जमीन दिलाई थी। पांच साल पहले घर बना लिया था। बाढ़ में सब डूब गया, अब सात लोग फार्म हाउस में रुके हैं।
चार वर्ष से बना लिया था आशियाना
पौड़ी गढ़वाल के सुमन ने बताया कि एक निजी स्कूल में बस चलाते हैं। चार साल पहले कालोनी में जमीन लेकर मकान बनाया था। अब बाढ़ का पानी घर में घुसा तो परिवार के सात सदस्यों के साथ शिविर में रह रहे हैं।
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इन काॅलोनियों में रहने वाले अधिकांश लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के हैं, जबकि 25 परिवार अटौर गांव के रहने वाले हैं। जलभराव होने से लगभग चार हजार बीघे खेत की फसल भी जलमग्न हो गई है। लोगों का कहना है कि गाजियाबाद शहर का नाम सुनकर रोजी-कमाने के लिए आकर रहने लगे थे। आसपास के लोगों ने बताया कि जमीन सस्ती है तो अपनी हैसियत के अनुसार भूखंड लेकर मकान भी खड़ा कर लिया, इस दौरान किसी ने नहीं बताया कि यह डूब क्षेत्र है और हिंडन (खादर) का पानी भी आता है।
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प्रशासन से की शिकायत तो डीलरों ने कर दिया था हमला
बाढ़ से घर छोड़कर फार्म हाउस में रह रहे प्रिंस ने बताया कि दो साल से लगातार प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं कि हिंडन का पानी आने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। एक बार प्रशासन की टीम आई तो डीलरों ने हमला कर दिया था। इसकी कई जगह शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज घर छोड़कर शरणार्थी बनकर रहना पड़ रहा है।
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13 साल से रह रहे हैं क्षेत्र में
अलीगढ़ के रहने वाले प्रताप ने बताया कि गाजियाबाद में 13 वर्ष से रहकर मजदूरी करते हैं। डीलर ने सस्ती जमीन दिलाई थी। पांच साल पहले घर बना लिया था। बाढ़ में सब डूब गया, अब सात लोग फार्म हाउस में रुके हैं।
चार वर्ष से बना लिया था आशियाना
पौड़ी गढ़वाल के सुमन ने बताया कि एक निजी स्कूल में बस चलाते हैं। चार साल पहले कालोनी में जमीन लेकर मकान बनाया था। अब बाढ़ का पानी घर में घुसा तो परिवार के सात सदस्यों के साथ शिविर में रह रहे हैं।