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Ghaziabad News: मुख्यमंत्री के ओएसडी भी चुनाव मैदान में

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 12 Apr 2024 02:05 AM IST
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Chief Minister's OSD also in the election fray
गाजियाबाद। चुनाव मैदान में तीन राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों के अलावा पांच अन्य दलों के प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार मैदान में आईपीएस ऑफिसर और मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे आनंद कुमार हैं तो दूसरी तरफ किसान और मजदूर भी चुनाव भी हैं।
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14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसमें से राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों को तो सब जानते है लेकिन छोटे दलों और निर्दलीय प्रत्याशी भी जोर-शोर से चुनाव प्रचार कर रहे हैं। कोई पैदल घर-घर जाकर प्रचार कर रहा है तो कोई सभाओं में जाकर वोट मांग रहा है। चुनाव मैदान में सबसे अधिक पढ़े लिखे राष्ट्रीय निर्माण पार्टी के प्रत्याशी आनंद कुमार जो एमए पीएचडी हैं और 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी भी रहे हैं। वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ओएसडी भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि एससीएसटी एक्ट में संशोधन उनका मुख्य मुद्दा है। कई निर्दोष व्यक्ति सजा भुगत रहे हैं इसमें बदलाव होना चाहिए। इसके अलावा राजनीति का अपराधिकरण, भ्रष्टाचार, विधायक-सांसद की खरीद-फरोख्त के नाम पर सत्ता का जो खेल चल रहा है उसके विरोध में मैं पहली बार चुनाव मैदान में उतरा हूं।
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निर्दलीय प्रत्याशी पूजा सक्सेना ने बताया कि वह अभी घर-घर जाकर प्रचार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति का वोट अमूल्य होता है। मैं ऐसा कानून चाहती हैं कि जिन मुद्दों पर जनता प्रत्याशी को वोट देती है अगर वह प्रत्याशी उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता तो वह अपना वोट वापस ले सकता है, ऐसा कोई कानून बने। मसूरी के किसान औरंगजेब स्थानीय समस्याओं और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं। सबसे उम्रदराज निर्दलीय 73 वर्षीय नत्थू सिंह का भी स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार ही मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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पैदल और ई-रिक्शा से कर रहे हैं चुनाव प्रचार
निर्दलीय प्रत्याशी अवधेश कुमार ने चुनाव आयोग को अपने व्यवसाय में मजदूरी करना बताया है। उनसे इस बारे में पूछने पर हंसते हुए बताया कि मैं किसी और के कोचिंग सेंटर में छोटे बच्चों को पढ़ाता हूं, यह भी मजदूरी ही है। उनका कहना है कि गरीबों का नेता कोई नहीं है इसलिए मैंंने चुनाव लड़ने का मन बनाया। चुनाव में जीतता हूं या हारता हूं इससे फर्क नहीं पड़ेगा। मैं हमेशा जनता के बीच काम करता रहूंगा, उनकी समस्याएं सुलझाता रहूंगा। चुनाव लड़ने के लिए इतना पैसा नहीं है लेकिन दोस्त, परिवार के लोग सहयोग कर रहे हैं। पैदल, ई-रिक्शा, किसी की बाइक से चुनाव प्रचार कर रहा हूं। प्रचार की एक गाड़ी के लिए आवेदन किया है। गाड़ी की अनुमति मिल जाएगी तो गाड़ी से प्रचार करूंगा।
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