{"_id":"694132e344afcd25d1062a54","slug":"charges-framed-against-rakesh-tikait-and-others-including-former-mlas-in-two-cases-2025-12-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad: राकेश टिकैत और पूर्व विधायकों समेत अन्य पर दो मुकदमों में आरोप तय, 2 जनवरी को अगली सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad: राकेश टिकैत और पूर्व विधायकों समेत अन्य पर दो मुकदमों में आरोप तय, 2 जनवरी को अगली सुनवाई
Tue, 16 Dec 2025 03:52 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: आकाश दुबे
Updated Tue, 16 Dec 2025 03:52 PM IST
सार
अदालत में राकेश टिकैत अपने वकील चौधरी अजय वीर सिंह के साथ उपस्थित हुए। उन्होंने पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर विस्तृत बहस की और मांग की कि पुलिस द्वारा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर झूठे आरोप लगाए गए हैं।
विज्ञापन
कोर्ट परिसर में मौजूद किसान नेता राकेश टिकैत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गाजियाबाद की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में दो अलग-अलग मुकदमों में किसान नेता राकेश टिकैत, पूर्व विधायकों समेत अन्य आरोपियों पर आरोप तय किए गए हैं। स्पेशल जज एमपी-एमएलए निशांत मान की अदालत में यह सुनवाई हुई। मामले में आरोपी भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, पूर्व विधायक सुदेश शर्मा, पूर्व मंत्री दलवीर सिंह, पूर्व विधायक वीर पाल राठी, पूर्व विधायक भगवती प्रसाद, चेयरमैन अमरजीत सिंह बिडडी, पूर्व प्रमुख अजय पाल आदि पेश हुए। स्पेशल जज निशांत मान ने सभी लोगों पर आरोप तय कर साक्ष्य के लिए अगली तारीख 2 जनवरी नियत की है।
विज्ञापन
यह है मामला
साल 2014 में किसानों, रालोद कार्यकर्ताओं व भारतीय किसान यूनियन कार्यकर्ताओं द्वारा स्व. चौधरी अजित सिंह की दिल्ली में कोठी खाली करने के विरोध में मुरादनगर गंग नहर पर किये गये विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था, जिसमें पुलिस ने मुरादनगर थाने पर मुकदमा पंजीकृत किया था, जिसमें 36 व्यक्तियों को नामजद किया गया था। उपरोक्त सभी लोग न्यायलय में हाजिर हो रहे हैं।
विज्ञापन
राकेश टिकैत के वकील ने अपने पक्ष में कही यह बात
मंगलवार को राकेश टिकैत अपने वकील चौधरी अजय वीर सिंह के साथ न्यायलय में उपस्थित हुए और पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर विस्तृत बहस की तथा मांग की कि पुलिस द्वारा झूठे आरोप नेताओं व कार्यकर्ताओं पर लगाये गए हैं, कोई साक्ष्य पुलिस उपस्थित व्यक्तियों के खिलाफ प्रस्तुत नहीं कर सकी है इसलिए न्यायालय द्वारा उन्हें आरोपों से मुक्त किया जाए। सरकारी वकील बिशमबर सिंह ने कहा कि मुकदमे में परिक्षण के बाद ही तय हो सकेगा कि उपस्थित व्यक्तियों के खिलाफ साक्ष्य है या नहीं, इसलिए इस स्तर पर आरोप मुक्त नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन