{"_id":"67e058987018e1ec630712ba","slug":"charge-sheet-not-sent-against-the-then-eo-who-committed-irregularities-in-tenders-ghaziabad-news-c-135-1-hpr1005-121881-2025-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: टेंडरों में गड़बड़ी करने वाले तत्कालीन ईओ के खिलाफ नहीं भेजा आरोप-पत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: टेंडरों में गड़बड़ी करने वाले तत्कालीन ईओ के खिलाफ नहीं भेजा आरोप-पत्र
विज्ञापन
शुभम गोयल
हापुड़। नगर पालिका के टेंडरों में गड़बड़ी करने के आरोपी तत्कालीन ईओ सौरभनाथ को बचाने के प्रयास अभी भी जारी हैं। नगर विकास विभाग के सचिव मोहम्मद वासिफ ने एक बार फिर से पत्र भेजकर साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि आरोपी अधिकारी पर जल्द विभागीय कार्रवाई हो सके। जबकि, इससे पहले 27 दिसंबर 2024 को विभागीय कार्रवाई संस्थित कर आरोप-पत्र गठित कराकर साक्ष्यों सहित उपलब्ध कराने के निर्देश थे, लेकिन अभी तक भी इसे नहीं भेजा गया।
बीते वर्ष आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों, नलकूप संचालन के टेंडर को लेकर कई गंभीर आरोप लगे थे। मामले में शिकायत के बाद टेंडरों की जांच के लिए मंडलायुक्त ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में वर्तमान सीडीओ हापुड़ व तत्कालीन अपर आयुक्त मेरठ हिमांशु गौतम, एडीएम संदीप कुमार और तत्कालीन कोषाधिकारी को शामिल किया था। जांच में सामने आया था कि जलकल विभाग के नलकूप संचालन के टेंडर में बिना क्वालीफाई फर्म को भी पास कर दिया गया था। मामले में तत्कालीन ईओ सौरभ नाथ, अवर अभियंता कुंवरपाल (रिश्वत लेने के आरोप के मामले में अभी जेल में बंद हैं), मुख्य सफाई निरीक्षक आवेश कुमार को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में प्रथमदृश्यता सौरभ नाथ का तबादला अयोध्या नगर निगम में सहायक नगर आयुक्त के पद पर कर दिया गया था। अधिकारियों पर आरोप थे कि वह अपने चहेतों को टेंडर देने में लगे थे। वहीं, आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों के टेंडर में शिकायतों के बाद भी टेंडर प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर तत्कालीन ईओ की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए थे। जबकि, स्वयं एडीएम संदीप कुमार ने पत्र लिखकर जांच पूरी होने तक टेंडर प्रक्रिया को स्थगित रखने के निर्देश दिए थे।
मंडलायुक्त और डीएम ने भी शासन को भेजी थी रिपोर्ट
मामले में कमेटी द्वारा जांच पूरी करने के बाद मंडलायुक्त ने डीएम को भी पत्र भेजा था। डीएम प्रेरणा शर्मा ने शासन को कमेटी की जांच भी भेजी थी, लेकिन एक साल बाद भी उक्त प्रकरणों में कोई कार्रवाई आरोपी अधिकारियों पर नहीं हुई है। मात्र उक्त अधिकारियों को जवाब देने के लिए शासन स्तर से नोटिस जारी हुए थे। इस प्रकरण में स्वयं सदर विधायक ने भी शिकायतें की थीं।
विज्ञापन
फाइलें कर दी थीं गायब
एक फरवरी 2024 को जब नलकूप संचालन के टेंडर की फाइल एडीएम ने मंगाई थी तो जेई फाइल लेकर पहुंचे थे, लेकिन रात्रि में फाइल को गुपचुप तरीके से वापस लेकर चले गए थे। यहां तक कि अपना फोन नंबर तक बंद कर लिया था। बाद में एडीएम ने कर्मचारियों को जेई के घर भेजा था। अगले दिन जेई ने फोन की बैटरी खत्म होने की बात कही थी।
एडीएम संदीप कुमार ने बताया कि शासन के पत्र का संज्ञान लेकर आरोप-पत्र भेजा जाएगा। जांच टीम ने जो साक्ष्य जुटाए थे। उन सभी को इसमें शामिल कर शासन को भेजेंगे। जिससे कि विभागीय कार्रवाई हो सके।
विज्ञापन
हापुड़। नगर पालिका के टेंडरों में गड़बड़ी करने के आरोपी तत्कालीन ईओ सौरभनाथ को बचाने के प्रयास अभी भी जारी हैं। नगर विकास विभाग के सचिव मोहम्मद वासिफ ने एक बार फिर से पत्र भेजकर साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि आरोपी अधिकारी पर जल्द विभागीय कार्रवाई हो सके। जबकि, इससे पहले 27 दिसंबर 2024 को विभागीय कार्रवाई संस्थित कर आरोप-पत्र गठित कराकर साक्ष्यों सहित उपलब्ध कराने के निर्देश थे, लेकिन अभी तक भी इसे नहीं भेजा गया।
बीते वर्ष आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों, नलकूप संचालन के टेंडर को लेकर कई गंभीर आरोप लगे थे। मामले में शिकायत के बाद टेंडरों की जांच के लिए मंडलायुक्त ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में वर्तमान सीडीओ हापुड़ व तत्कालीन अपर आयुक्त मेरठ हिमांशु गौतम, एडीएम संदीप कुमार और तत्कालीन कोषाधिकारी को शामिल किया था। जांच में सामने आया था कि जलकल विभाग के नलकूप संचालन के टेंडर में बिना क्वालीफाई फर्म को भी पास कर दिया गया था। मामले में तत्कालीन ईओ सौरभ नाथ, अवर अभियंता कुंवरपाल (रिश्वत लेने के आरोप के मामले में अभी जेल में बंद हैं), मुख्य सफाई निरीक्षक आवेश कुमार को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में प्रथमदृश्यता सौरभ नाथ का तबादला अयोध्या नगर निगम में सहायक नगर आयुक्त के पद पर कर दिया गया था। अधिकारियों पर आरोप थे कि वह अपने चहेतों को टेंडर देने में लगे थे। वहीं, आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों के टेंडर में शिकायतों के बाद भी टेंडर प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर तत्कालीन ईओ की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए थे। जबकि, स्वयं एडीएम संदीप कुमार ने पत्र लिखकर जांच पूरी होने तक टेंडर प्रक्रिया को स्थगित रखने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
मंडलायुक्त और डीएम ने भी शासन को भेजी थी रिपोर्ट
मामले में कमेटी द्वारा जांच पूरी करने के बाद मंडलायुक्त ने डीएम को भी पत्र भेजा था। डीएम प्रेरणा शर्मा ने शासन को कमेटी की जांच भी भेजी थी, लेकिन एक साल बाद भी उक्त प्रकरणों में कोई कार्रवाई आरोपी अधिकारियों पर नहीं हुई है। मात्र उक्त अधिकारियों को जवाब देने के लिए शासन स्तर से नोटिस जारी हुए थे। इस प्रकरण में स्वयं सदर विधायक ने भी शिकायतें की थीं।
विज्ञापन
फाइलें कर दी थीं गायब
एक फरवरी 2024 को जब नलकूप संचालन के टेंडर की फाइल एडीएम ने मंगाई थी तो जेई फाइल लेकर पहुंचे थे, लेकिन रात्रि में फाइल को गुपचुप तरीके से वापस लेकर चले गए थे। यहां तक कि अपना फोन नंबर तक बंद कर लिया था। बाद में एडीएम ने कर्मचारियों को जेई के घर भेजा था। अगले दिन जेई ने फोन की बैटरी खत्म होने की बात कही थी।
एडीएम संदीप कुमार ने बताया कि शासन के पत्र का संज्ञान लेकर आरोप-पत्र भेजा जाएगा। जांच टीम ने जो साक्ष्य जुटाए थे। उन सभी को इसमें शामिल कर शासन को भेजेंगे। जिससे कि विभागीय कार्रवाई हो सके।