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Ghaziabad News: राजनीतिक दलों के सामने 39 दिन में किला फतह करने की चुनौती

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 18 Mar 2024 01:20 AM IST
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Challenge for political parties to conquer the fort in 39 days
राजीव शर्मा
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गाजियाबाद। चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन अभी राजनीतिक दल तैयार नहीं है। अभी न तो दलों के प्रत्याशी तय हुए और न ही किसी दल की रैली की तैयारी है। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने अब महज 39 दिनों में किला फतह करने की बड़ी चुनौती है। प्रत्याशियों को भी प्रचार करने के लिए बेहद कम समय मिलेगा।
दरअसल, सभी राजनीतिक दल गाजियाबाद में प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने से पहले जातीय समीकरण देख रहे हैं। भाजपा ने प्रत्याशियों की दो सूची जारी कर दी है, लेकिन गाजियाबाद लोकसभा सीट पर प्रत्याशी का नाम अभी तय नहीं किया है। चर्चा है कि विपक्ष भी भाजपा के प्रत्याशी का नाम तय होने का इंतजार कर रहा है, इसके बाद जातीय समीकरणों को साधने का गणित तय करने के बाद प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। गाजियाबाद में लोकसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान होना है और इसके लिए 28 मार्च को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। चार अप्रैल तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मतदान से 48 घंटे पूर्व चुनाव प्रचार थम जाएगा। यानी नामांकन के बाद प्रत्याशी को चुनाव प्रचार के लिए महज 20 दिन का समय मिलेगा। ऐसे में न सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए बल्कि प्रत्याशी के लिए भी राजनीतिक के इस किले को फतह करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।
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इसी सप्ताह में तय हो सकते हैं सभी दलों के प्रत्याशियों के नाम
भाजपा जल्द ही तीसरी दो दिन के अंदर आ सकती है। मुरादाबाद और सहारनपुर के प्रत्याशी भी भाजपा ने अभी तय नहीं किए हैं और यहां पहले चरण में मतदान होना है। अगर प्रत्याशी के नाम तय करने में होली तक का इंतजार किया गया तो प्रत्याशियों के सामने पूरे क्षेत्र में प्रचार करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में चर्चा है कि इन दोनों सीटों के साथ-साथ भाजपा पश्चिम क्षेत्र की होल्ड की गई सभी चारों सीटों के प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती है। इनमें मुरादाबाद और सहारनपुर के साथ-साथ गाजियाबाद और मेरठ लोकसभा सीट भी शामिल हैं।
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वैश्य और ठाकुर में फंसा पेंच
चर्चा है कि भाजपा की ओर से गाजियाबाद और मेरठ सीट पर प्रत्याशी के नाम की घोषणा अब तक न किए जाने के पीछे वैश्य और ठाकुर का पेंच फंसा हुआ है। अगर मेरठ और गाजियाबाद के मौजूदा सांसदों का टिकट बदला जाता है तो इन दोनों क्षेत्र में किस बिरादरी को टिकट दिया जाएगा, यह तय करने में देखा जा रहा है कि बिरादरियों की नाराजगी पार्टी को न झेलनी पड़ जाए। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि भाजपा के एक अन्य सहयोगी दल के एक बड़े नेता भी मेरठ से दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नफे-नुकसान का आकलन करने के बाद ही प्रत्याशियों का नाम तय करेगा।
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