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Ghaziabad News: सीबीआई ने 50 दिन तक सर्विलांस पर लिया था उपायुक्त का फोन
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आशुतोष यादव
गाजियाबाद। सीबीआई ने उप आयुक्त शशिकांत, मेसर्स अबान एक्जिम प्रा. लिमिटेड के प्रमोटर नरेंद्र चुघ और सतीश गुप्ता के मोबाइल नंबर पर सर्विलांस पर लिया था। जांच में पता चला था कि नौ अक्तूबर 2013 से 29 नवंबर 2013 के बीच 50 दिन में 67 बार तीनों की बातचीत हुई थी। इसके बाद उपायुक्त के आवास नोएडा सेक्टर 61 में रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। केंद्रीय स्तर के अधिकारी होने से सीबीआई ने शशिकांत के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लेने और उसकी रिकार्डिंग के लिए भारत सरकार के केंद्रीय सचिव से अनुमति ली थी। उसके बाद तीनों के मोबाइन नंबर सर्विलांस पर लगाए गए थे।
सीबीआई के अनुसार नरेंद्र चुघ ने 2529 टायरों का विदेश से आयात किया था। इसकी कीमत 40,87,838 रुपये थी। इस पर सीमा शुल्क 11,79,417 रुपये तत्कालीन उपायुक्त शशिकांत के निर्देशन में जमा किया जाना था। सीमा शुल्क कम होने पर उसे सीज कर दिया गया था। बाद में जांच कराने पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानदंडों के अनुसार टायर देश के वाहनों में उपयोग करने लायक नहीं पाए गए थे। इसलिए उन्हें भारत में उपयोग की अनुमति नहीं मिली और संबंधित कंपनी पर आठ लाख रुपये का जुर्माना लगाकर 17 जुलाई को उसे वापस करने का आदेश दिया गया। टायर की आपूर्ति करने वाली कंपनी अबान एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड ने आयुक्त सीमा शुल्क (अपील) के यहां अपील किया।
सुनवाई के बाद आयुक्त ने 19 अगस्त 2013 को आदेश दिया था कि जब्त किए गए सामान को वापस कर दिया जाए। जुर्माना राशि आठ लाख से घटाकर पांच लाख रुपये कर दी थी। इसके बाद नरेंद्र के जानकार मध्यस्थ सतीश गुप्ता ने सीमा शुल्क (आयात) के उपायुक्त शशिकांत से संपर्क किया। उस समय आईसीडी दादरी कंटेनर डिपो में शशिकांत की ड्यूटी आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क लगाने और तस्करी की रोकथाम की जिम्मेदारी थी। लेकिन शशिकांत जब्त टायर की खेप को छोड़ने के लिए सहमत हो गए। इसके लिए सतीश गुप्ता से रुपये की व्यवस्था करने के लिए कहा। नरेंद्र चुघ से शशिकांत ने पांच लाख रुपये मांगे। खेप को छुड़ाने के लिए शशिकांत ने नरेंद्र चुघ को सतीश गुप्ता से संपर्क करने के लिए भी कहा।
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गाजियाबाद। सीबीआई ने उप आयुक्त शशिकांत, मेसर्स अबान एक्जिम प्रा. लिमिटेड के प्रमोटर नरेंद्र चुघ और सतीश गुप्ता के मोबाइल नंबर पर सर्विलांस पर लिया था। जांच में पता चला था कि नौ अक्तूबर 2013 से 29 नवंबर 2013 के बीच 50 दिन में 67 बार तीनों की बातचीत हुई थी। इसके बाद उपायुक्त के आवास नोएडा सेक्टर 61 में रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। केंद्रीय स्तर के अधिकारी होने से सीबीआई ने शशिकांत के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लेने और उसकी रिकार्डिंग के लिए भारत सरकार के केंद्रीय सचिव से अनुमति ली थी। उसके बाद तीनों के मोबाइन नंबर सर्विलांस पर लगाए गए थे।
सीबीआई के अनुसार नरेंद्र चुघ ने 2529 टायरों का विदेश से आयात किया था। इसकी कीमत 40,87,838 रुपये थी। इस पर सीमा शुल्क 11,79,417 रुपये तत्कालीन उपायुक्त शशिकांत के निर्देशन में जमा किया जाना था। सीमा शुल्क कम होने पर उसे सीज कर दिया गया था। बाद में जांच कराने पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानदंडों के अनुसार टायर देश के वाहनों में उपयोग करने लायक नहीं पाए गए थे। इसलिए उन्हें भारत में उपयोग की अनुमति नहीं मिली और संबंधित कंपनी पर आठ लाख रुपये का जुर्माना लगाकर 17 जुलाई को उसे वापस करने का आदेश दिया गया। टायर की आपूर्ति करने वाली कंपनी अबान एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड ने आयुक्त सीमा शुल्क (अपील) के यहां अपील किया।
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सुनवाई के बाद आयुक्त ने 19 अगस्त 2013 को आदेश दिया था कि जब्त किए गए सामान को वापस कर दिया जाए। जुर्माना राशि आठ लाख से घटाकर पांच लाख रुपये कर दी थी। इसके बाद नरेंद्र के जानकार मध्यस्थ सतीश गुप्ता ने सीमा शुल्क (आयात) के उपायुक्त शशिकांत से संपर्क किया। उस समय आईसीडी दादरी कंटेनर डिपो में शशिकांत की ड्यूटी आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क लगाने और तस्करी की रोकथाम की जिम्मेदारी थी। लेकिन शशिकांत जब्त टायर की खेप को छोड़ने के लिए सहमत हो गए। इसके लिए सतीश गुप्ता से रुपये की व्यवस्था करने के लिए कहा। नरेंद्र चुघ से शशिकांत ने पांच लाख रुपये मांगे। खेप को छुड़ाने के लिए शशिकांत ने नरेंद्र चुघ को सतीश गुप्ता से संपर्क करने के लिए भी कहा।
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