बच्चों पर मंडरा रहा मोतियाबिंद का खतरा: चोट, आनुवांशिक और गर्भ में बीमारी से हो सकती समस्या, पढ़ें लक्षण
एमएमजी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार का कहना है कि वंशानुगत (एक से ज्यादा अनुवाशिंक या क्रोमोसोमल विकार), मेटाबोलिज्म के विकार (गैलैक्टोसीमिया) या गर्भ में रहते हुए किसी से मिले हुए संक्रमण (रुबेला) या गर्भावस्था के दौरान मां की किसी अन्य बीमारी के कारण हो रहे हैं।
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चोट लगने, आनुवांशिक और गर्भावस्था के दौरान बच्चे में संक्रमण या किसी तरह की बीमारी का दुष्प्रभाव बच्चों की आंखों में मोतियाबिंद के रूप में हो रहा है। एमएमजी अस्पताल में दो महीने में आठ से 11 वर्ष के 10 बच्चों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया। इनमें से चार बच्चों की आंखों में चोट लगने, तीन बच्चों में आनुवांशिक (माता-पिता दोनों को मोतियाबिंद) मोतियाबिंद की पुष्टि हुई थी।
एमएमजी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार का कहना है कि वंशानुगत (एक से ज्यादा अनुवाशिंक या क्रोमोसोमल विकार), मेटाबोलिज्म के विकार (गैलैक्टोसीमिया) या गर्भ में रहते हुए किसी से मिले हुए संक्रमण (रुबेला) या गर्भावस्था के दौरान मां की किसी अन्य बीमारी के कारण हो रहे हैं। खेलते समय बच्चे की आंख में चोट लगने, रेडिएशन के संपर्क में आने से मोतियाबिंद हो जाता है। डॉ. नरेंद्र का कहना है कि बच्चों में मोतियाबिंद के कई अन्य कारण भी होते हैं।
बच्चों में मोतियाबिंद का कारण
ट्रॉमेटिक मोतियाबिंद: खेलते समय या किसी खेल के दौरान बच्चे को लगी कोई भी चोट मोतियाबिंद का कारण बन सकती है। अगर चोट लगने के समय नहीं तो कुछ वर्षों के बाद मोतियाबिंद हो सकता है।
जन्मजात मोतियाबिंद: जन्म के समय या बचपन में भी बच्चों को मोतियाबिंद होने की संभावना होती है। यह परेशानी एक साथ दोनों आंखों में भी हो सकती है। लेकिन, इस मोतियाबिंद को हटाने की जरूरत नहीं पड़ती और इससे देखने में भी कोई परेशानी नहीं होती। रेडिएशन मोतियाबिंद : बच्चे के रेडिएशन के संपर्क में आने के कारण होने वाले मोतियाबिंद को रेडिएशन मोतियाबिंद के रूप में जाना जाता है।
माध्यमिक मोतियाबिंद: डायबिटीज या किसी अन्य बीमारी के कारण होने वाले मोतियाबिंद को सेकेंडरी मोतियाबिंद माना जाता है, साथ ही कुछ दवाओं और स्टेरॉयड के उपयोग से भी ये समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चों में मोतियाबिंद के लक्षण
दृष्टि का कमजोर होना: इससे बच्चे को लोगों और अन्य वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है
भैंगापन: दोनों आंखों का अलग-अलग दिशाओं में इशारा करने के लक्षण होने पर भी मोतियाबिंद होता है।
तीव्र नेत्र गति: निस्तागमुस की परेशानी होने पर आंखों की गति को तेज कर देता है जैसे पलकें झपकाना और हिलना।
रंगों का फीका दिखना, धुंधली नजर, आंखों को रोशनी बहुत तेज लगना, दृष्टि कम हो जाना