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गाजियाबाद: तालाब की जमीन पर कब्जे का मामला एनजीटी पहुंचा, संयुक्त जांच समिति गठित, 8 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
Thu, 15 Oct 2026 05:46 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: Digvijay Singh
Updated Thu, 15 Oct 2026 05:46 PM IST
सार
समिति को आठ सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। याचिका में खसरा संख्या 186 और 190 का उल्लेख है। एनजीटी के आदेश के अनुसार, इन खसरा संख्याओं का कुल क्षेत्रफल 0.737 हेक्टेयर है।
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एनजीटी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गाजियाबाद में मसूरी के ग्राम सिकरोड़ा, मयूर विहार में तालाब की जमीन पर कथित कब्जे का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहुंच गया है। हेल्प एशियन फाउंडेशन के राष्ट्रीय सचिव चौधरी अफसर ने इस संबंध में याचिका दायर की है। एनजीटी ने 14 अक्तूबर को सुनवाई करते हुए संयुक्त जांच समिति गठित करने का आदेश दिया।
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समिति को आठ सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। याचिका में खसरा संख्या 186 और 190 का उल्लेख है। एनजीटी के आदेश के अनुसार, इन खसरा संख्याओं का कुल क्षेत्रफल 0.737 हेक्टेयर है। यह लगभग 7,370 वर्ग मीटर या 26 बीघे के बराबर है। संस्था ने आरोप लगाया है कि तालाब की जमीन पर अतिक्रमण कर आवासीय मकान बनाए जा रहे हैं। साथ ही, भूमि पर प्लॉटिंग और अन्य स्थायी निर्माण भी किए गए हैं। सरकारी अभिलेखों में कथित छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेज से कब्जे की आशंका भी जताई गई है। आजाद अली और उनकी टीम के कुछ अन्य लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, एनजीटी ने इस स्तर पर किसी को दोषी नहीं ठहराया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की।
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जांच समिति का गठन
एनजीटी ने एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इसमें उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय भी इसका हिस्सा होगा। उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के प्रतिनिधि भी समिति में होंगे। जिलाधिकारी गाजियाबाद को इस समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया है।
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समिति के कार्य और अगली सुनवाई
यह समिति पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांच करेगी। तालाब का मूल क्षेत्रफल और वर्तमान में बचा क्षेत्रफल निर्धारित किया जाएगा। कथित अतिक्रमण और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान भी की जाएगी। संबंधित सरकारी अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 1 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।