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Ghaziabad News: वैशाली की सोसायटी में बिल्डर ने 110 अतिरिक्त फ्लैट का कर लिया निर्माण, जांच शुरू
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गाजियाबाद। इंदिरापुरम की एक्सप्रेस गार्डन सोसायटी की तरह वैशाली सेक्टर-9 स्थित सुपरटेक एस्टेट सोसायटी में भी नक्शे के विरुद्ध 247 की बजाय 110 अतिरिक्त फ्लैटों का निर्माण कर लिया। इन अतिरिक्त फ्लैटों के बन जाने से सोसायटी के लोगों को पार्किंग की दिक्कत हो रही है। वहीं, इनमें रहने वाले फ्लैट मालिक एओए के चुनाव में वोट नहीं डाल पा रहे हैं। मामले में जीडीए सचिव ने जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है।
हाल ही में इंदिरापुरम की एक्सप्रेस गार्डन सोसायटी में 134 अतिरिक्त फ्लैटों का निर्माण कर लिए जाने पर हाईकोर्ट ने प्राधिकरण अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इस मामले में जीडीए उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होकर जवाब देना पड़ा। इसके बाद अब वैशाली की सुपरटेक एस्टेट सोसायटी का मामला उजागर होने पर प्राधिकरण में हड़कंप मचा है। सुपरटेक एस्टेट सोसायटी की डीड ऑफ डिक्लेयरेशन (डीओडी) भी जीडीए से स्वीकृत नहीं है। जीडीए ने वर्ष 2003-04 में सुपरटेक एस्टेट सोसायटी का नक्शा पास किया था और उस वक्त 247 फ्लैट बनाने की अनुमति दी गई थी। निर्माण पूरा होने पर जीडीए ने 247 फ्लैटों का संपूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डर ने नियमों को दरकिनार कर 247 बड़े फ्लैटों का विभाजन कर 357 फ्लैट बना लिए और सभी को बेच दिया गया। स्वीकृत नक्शे के अनुसार ग्रीन बेल्ट के लिए पर्याप्त जमीन नहीं छोड़ी गई। वर्ष 2009 में बिल्डर ने संशोधित संपूर्णता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया, जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बजाय मामले को फाइलों में दबा दिया।
अब इस मामले में जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने अधिशासी अभियंता राजकुमार वर्मा की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है। कमेटी में सहायक अभियंता बलवीर सिंह, दान सिंह मेहरा और तीन अवर अभियंताओं को शामिल किया गया है। कमेटी की ओर से जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस मामले में कार्रवाई हो सकती है।
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हाल ही में इंदिरापुरम की एक्सप्रेस गार्डन सोसायटी में 134 अतिरिक्त फ्लैटों का निर्माण कर लिए जाने पर हाईकोर्ट ने प्राधिकरण अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इस मामले में जीडीए उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होकर जवाब देना पड़ा। इसके बाद अब वैशाली की सुपरटेक एस्टेट सोसायटी का मामला उजागर होने पर प्राधिकरण में हड़कंप मचा है। सुपरटेक एस्टेट सोसायटी की डीड ऑफ डिक्लेयरेशन (डीओडी) भी जीडीए से स्वीकृत नहीं है। जीडीए ने वर्ष 2003-04 में सुपरटेक एस्टेट सोसायटी का नक्शा पास किया था और उस वक्त 247 फ्लैट बनाने की अनुमति दी गई थी। निर्माण पूरा होने पर जीडीए ने 247 फ्लैटों का संपूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डर ने नियमों को दरकिनार कर 247 बड़े फ्लैटों का विभाजन कर 357 फ्लैट बना लिए और सभी को बेच दिया गया। स्वीकृत नक्शे के अनुसार ग्रीन बेल्ट के लिए पर्याप्त जमीन नहीं छोड़ी गई। वर्ष 2009 में बिल्डर ने संशोधित संपूर्णता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया, जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बजाय मामले को फाइलों में दबा दिया।
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अब इस मामले में जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने अधिशासी अभियंता राजकुमार वर्मा की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है। कमेटी में सहायक अभियंता बलवीर सिंह, दान सिंह मेहरा और तीन अवर अभियंताओं को शामिल किया गया है। कमेटी की ओर से जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस मामले में कार्रवाई हो सकती है।
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