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Ghaziabad News: उम्र की बाधा तोड़ 1595 लोगों ने उल्लास अभियान से सीखा ककहरा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 01:16 AM IST
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Breaking age barriers, 1,595 people learned the basics of reading and writing through the 'Ullas' campaign.
- 59 साल के हरिराम ने पहली बार लिखा अपना नाम, खुशी का न रहा ठिकाना
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- पढ़ाई से वंचित लोगों को शिक्षा से जोड़ रहा अभियान, महिलाएं भी पढ़ाई को आगे आईं
- इस सत्र में 1595 लोगों ने कराया पंजीकरण, शाम को स्कूलों में लगती हैं पाठशाला
- बैंक फॉर्म से डिजिटल भुगतान तक आसान हो रहे काम, जागरूकता बढ़ाने पर जोर
चारू शर्मा
साहिबाबाद। कहते हैं कि पढ़ाई-लिखाई की कोई उम्र नहीं होती। यह कहावत गाजियाबाद के 59 साल के हरिराम समेत 1595 लोगों पर सटीक बैठ रही है। उम्र एक पड़ाव पर आकर जहां लोग चारपाई थाम लेते हैं वहां इन बुजुर्गों और वयस्कों ने ककहरा सीखने की ललक को जुनून में बदल दिया। उन्होंने मेहनत की और रोजमर्रा के काम में आने वाली परेशानियों को बाय बाय कर दिया। वह बैंक से लेकर बाजार जाकर अब स्वयं हिसाब-किताब कर रहे हैं।
इंदिरापुरम निवासी 59 साल के हरिराम के पोते-पोतियां है। वह कुछ दिन पहले तक नाम लिखना तो दूर एक शब्द तक नहीं लिख पाते थे, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहे उल्लास अभियान से जुड़कर पढ़ाई का ककहरा शुरू किया। अब वह न सिर्फ अपना नाम लिखते हैं बल्कि पुस्तक भी पढ़ना शुरू कर दिए हैं। यह अकेले हरिराम की कहानी नहीं है बल्कि जिले के 1595 लोगों का जुनून है। चूंकि यह लोग बचपन में पारिवारिक और आर्थिक समेत अन्य कारणों से से पढ़ाई नहीं कर पाएं। अब हरिराम समेत अन्य लोग जब पोते-पोतियों को स्कूल छोड़ने जाते तो अनपढ़ होने का मलाल होता। हरिराम बताते हैं कि उसी मलाल ने उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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शाम होते ही जिले के कई स्कूलों में शुरू होती हैं पाठशाला
शाम होते ही कई स्कूलों में वयस्कों की पाठशालाएं लगती हैं। दिनभर काम करने के बाद महिलाएं और पुरुष यहां पहुंचकर अक्षर ज्ञान, गिनती और सामान्य पढ़ाई का अभ्यास करते हैं। महिलाओं के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ घर के खर्च का हिसाब रखने, बैंक से जुड़े काम समझने और जरूरी कागजात पढ़ने में मिल रहा है। कई शिक्षार्थियों को बैंक फॉर्म भरने, मोबाइल फोन से डिजिटल भुगतान करने और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी समझने में भी आसानी हो रही है।
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मार्च में हुईं परीक्षा में 1883 वयस्क हुए उत्तीर्ण

साल में दो बार वयस्कों की परीक्षाएं होती हैं। मार्च 2026 में 1994 वयस्क परीक्षा में बैठे और 1883 उत्तीर्ण हुए। इन सभी उत्तीर्ण वयस्कों को जल्द शिक्षा विभाग प्रमाणपत्र देगा। इस सत्र 2026-27 की परीक्षा भी सितंबर के अंत में शुरू की जाएंगी। अगस्त से ही जैसे-जैसे स्कूलों से सहयोग मिला कक्षाएं शुरू कर दी हैं।

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वर्ष 2022-23 में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान देना नहीं है। बल्कि वयस्कों और बुजुर्गाें को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सक्षम बनाना भी है। - ओपी यादव, बेसिक शिक्षा विभाग, गाजियाबाद
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