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Ghaziabad News: सगी बहन से दुष्कर्म के आरोपी दोनों भाई साक्ष्य के अभाव में बरी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 21 Aug 2025 01:14 AM IST
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Both the brothers accused of raping their real sister were acquitted due to lack of evidence
गाजियाबाद।
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नाबालिग बहन से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी सगे भाइयों को साक्ष्य के अभाव में पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश नीरज गौतम ने बरी कर दिया। दुष्कर्म के बाद किशोरी गर्भवती भी हुई थी लेकिन भ्रूण की डीएनए जांच नहीं होने से आरोपियों को संदेह का लाभ मिल गया। बेटी से दुष्कर्म की रिपोर्ट मां ने वर्ष 2024 में टीला मोड़ थाने में अपने दोनों बेटों के खिलाफ दर्ज कराई थी लेकिन अदालत में मां और बेटी अपने दिए बयान से पलट गई थीं।
टीला मोड़ थाने में दर्ज रिपोर्ट में महिला ने पुलिस को बताया था कि उनकी 13 वर्षीय बेटी कक्षा आठ में पढ़ती है। बेटी के पेट में कुछ दिन से दर्द था। वह उसे 10 मई 2024 को ईएसआई अस्पताल लेकर गईं। डाक्टर ने जांच के बाद बताया था कि वह 22 सप्ताह की गर्भवती है। पूछने पर बेटी ने बताया कि अलग-अलग समय पर उसके सगे दोनों भाई दो वर्ष से दुष्कर्म कर रहे थे। पुलिस ने किशोरी की जांच कराई। पुलिस को दिए बयान में बताया था कि जब वह 11 वर्ष की थी तब सोते समय उनके दूसरे नंबर के भाई ने दुष्कर्म किया। परेशान होने पर किशोरी ने मां को बताया। मां ने कहा कि वह उसे डांट देगी। जब वह 13 वर्ष की थी तो बड़े भाई ने पैसे का लालच देकर शराब के नशे उनके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने पीड़िता को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। किशोरी ने मजिस्ट्रेट के सामने भी यही बयान दिए। पुलिस ने दोनों भाइयों को जेल भेज दिया था। विवेचक ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया।
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अदालत में बयान से मुकरीं मां-बेटी
अदालत में बयान दर्ज कराते समय महिला अपने बयान से मुकर गईं। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी गैर मौजूदगी में दो लड़के घर आते थे। वह धमकी देकर बेटी के साथ दुष्कर्म करते थे। किशोरी उन लड़कों को जानती नहीं थी। इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने जब वह थाने पहुंचीं तो पुलिस ने सफेद कागज पर उनके हस्ताक्षर करा लिए। कागज पर पुलिस ने क्या लिखा उन्हें नहीं पता। बेटी ने अपने भाइयों पर दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया था। पिता ने भी इसी तरह का कोर्ट में बयान दिया। वहीं, किशोरी ने भी पहले दिए गए बयान को बदल दिया। किशोरी ने कहा कि पुलिस के दबाव में आकर उन्होंने अपने भाइयों का नाम लिया था। मजिस्ट्रेट के सामने भी पुलिस के दबाव में भाइयों का नाम लिया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्य के अभाव में दोनों भाइयों को दोषमुक्त कर दिया। दोनों को जेल से रिहा करने का आदेश दिया।
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