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देश भरोसे पर नहीं संविधान और कानून से चलता है, एमएसपी पर कानून और ठोस नीति बननी चाहिए: टिकैत
Mon, 08 Feb 2021 09:55 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 08 Feb 2021 09:55 PM IST
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राकेश टिकैत
- फोटो : एएनआई
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज कहा कि MSP थी, MSP है और MSP रहेगी, लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कानून बनेगा। देश भरोसे पर नहीं चलता। देश संविधान और कानून से चलता है।
एमएसपी पर कानून और ठोस नीति बननी चाहिए: टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार बातचीत करना चाहती है तो किसान और कमेटी तैयार हैं। हम सरकार से चर्चा करना चाहते हैं। हमने सरकार से कहा कि वह तीनों कृषि कानूनों को वापस ले ले और एमएसपी पर कानून बनाए। प्रधानमंत्री आम जनता से गैस सिलिंडर पर सब्सिडी छोड़ने की अपील कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री से गुजारिश है कि वह एक अपील अपने सांसदों और विधायकों से पेंशन छोड़ने के लिए करें। जो भी सांसद, विधायक पेंशन छोड़ेंगे, हम उसका धन्यवाद करेंगे। टिकैत ने कहा कि सरकार नए कृषि कानूनों में काला-सफेद की बात कर रही है। सरकार 15 संशोधन को तैयार है तो सरकार ने इन्हें काला तो मान ही लिया है। कौन सी चीज काली है ये सरकार ही बताए।
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राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि मंत्री पूछ रहे हैं कि कानून में काला क्या है तो कृषि मंत्री जो संशोधन करना चाहते हैं वह कर दें। फिर जो बचेगा उसको देखेंगे। पहले सरकार बताए कि बिल में क्या-क्या काला है। उन्होंने कहा कि देश में भूख पर व्यापार नहीं होगा। भूख पर व्यापार करने वालों को देश से बाहर निकाला जाएगा। जिस तरह से फ्लाइट के टिकट एक ही दिन में तीन से चार बार ऊपर नीचे होते हैं।
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एमएसपी पर कानून और ठोस नीति बननी चाहिए: टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार बातचीत करना चाहती है तो किसान और कमेटी तैयार हैं। हम सरकार से चर्चा करना चाहते हैं। हमने सरकार से कहा कि वह तीनों कृषि कानूनों को वापस ले ले और एमएसपी पर कानून बनाए। प्रधानमंत्री आम जनता से गैस सिलिंडर पर सब्सिडी छोड़ने की अपील कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री से गुजारिश है कि वह एक अपील अपने सांसदों और विधायकों से पेंशन छोड़ने के लिए करें। जो भी सांसद, विधायक पेंशन छोड़ेंगे, हम उसका धन्यवाद करेंगे। टिकैत ने कहा कि सरकार नए कृषि कानूनों में काला-सफेद की बात कर रही है। सरकार 15 संशोधन को तैयार है तो सरकार ने इन्हें काला तो मान ही लिया है। कौन सी चीज काली है ये सरकार ही बताए।
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राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि मंत्री पूछ रहे हैं कि कानून में काला क्या है तो कृषि मंत्री जो संशोधन करना चाहते हैं वह कर दें। फिर जो बचेगा उसको देखेंगे। पहले सरकार बताए कि बिल में क्या-क्या काला है। उन्होंने कहा कि देश में भूख पर व्यापार नहीं होगा। भूख पर व्यापार करने वालों को देश से बाहर निकाला जाएगा। जिस तरह से फ्लाइट के टिकट एक ही दिन में तीन से चार बार ऊपर नीचे होते हैं।
इसी तरह से अनाज की कीमतें भी आने वाले समय में आदमी की भूख को देखते हुए तय की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार एमएसपी है, एमएसपी रहेगा, कहकर उलझा रही है। हमने कब कहा कि एमएसपी खत्म हो रहा है। हम तो कह रहे हैं कि एमएसपी पर कानून बने। एमएसपी पर कानून बनेगा तो देश के किसानों को फायदा होगा।
एमएसपी पर कानून नहीं है इसलिए देश में व्यापारी किसानों को लूटता है। प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानूनों से छोटे किसानों को फायदा होने की बात पर राकेश टिकैत ने कहा कि पहले तो सरकार ने आंदोलन को पंजाब का बताया फिर जाट का, उसके बाद इसे सिख का आंदोलन बताया। किसान कोई छोटा बड़ा किसान नहीं होता। यह देश का किसान एक है। न कोई छोटा है न कोई बड़ा है।
देश में ऋषि और कृषि पद्धति से छेड़खानी नहीं होने दी जाएगी
राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की इस लड़ाई में संत समाज हमारे साथ खड़ा है। देश को लेकर कोई भी मामला हो पूरे संत समाज आगे आकर लड़ा है। देश में ऋषि और कृषि पद्धति से छेड़खानी नहीं होने दी जाएगी। किसान और संत समाज इस लड़ाई को मजबूती के साथ लड़ेगा। जो विश्वास किसान संगठनों पर संतों ने किया है वह विश्वास कायम रहेगा। यह लड़ाई अंतिम दौर तक जाएगी।
एमएसपी पर कानून नहीं है इसलिए देश में व्यापारी किसानों को लूटता है। प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानूनों से छोटे किसानों को फायदा होने की बात पर राकेश टिकैत ने कहा कि पहले तो सरकार ने आंदोलन को पंजाब का बताया फिर जाट का, उसके बाद इसे सिख का आंदोलन बताया। किसान कोई छोटा बड़ा किसान नहीं होता। यह देश का किसान एक है। न कोई छोटा है न कोई बड़ा है।
देश में ऋषि और कृषि पद्धति से छेड़खानी नहीं होने दी जाएगी
राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की इस लड़ाई में संत समाज हमारे साथ खड़ा है। देश को लेकर कोई भी मामला हो पूरे संत समाज आगे आकर लड़ा है। देश में ऋषि और कृषि पद्धति से छेड़खानी नहीं होने दी जाएगी। किसान और संत समाज इस लड़ाई को मजबूती के साथ लड़ेगा। जो विश्वास किसान संगठनों पर संतों ने किया है वह विश्वास कायम रहेगा। यह लड़ाई अंतिम दौर तक जाएगी।