{"_id":"650deebc1fc162f071035caa","slug":"baby-died-due-to-forced-delivery-by-a-quack-ghaziabad-news-c-30-1-gbd1008-204787-2023-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: 134 अस्पताल और 45 सोसायटियों के पास एनओसी नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: 134 अस्पताल और 45 सोसायटियों के पास एनओसी नहीं
विज्ञापन
सुमित शिशौदिया
साहिबाबाद। बहुमंजिला इमारतों और अस्पतालों में लोगों की जान सुरक्षित नहीं हैं। 45 बहुमंजिला सोसायटियों और 134 अस्पतालों में छोटी सी भी आग लगी तो कई लोगों की जान जा सकती है। इनके पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमात्र पत्र नहीं है। विभाग ने इनमें से 35 सोसायटियों के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज करा रखा है।
बहुमंजिला इमारत का निर्माण होने के बाद रख-रखाव करने वाली एजेंसी को आग बुझाने के सभी नियम पूरे करने होते हैं। टीम सोसायटी का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर रिपोर्ट तैयार करती है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल का कहना है कि जनवरी 2023 में जिले के 276 नर्सिंग होम और अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इसमें सिर्फ 135 अस्पतालों के पास एनओसी मिली। जो जून महीने तक कुल इनकी संख्या बढ़ाकर 142 पहुंच गई। ऐसे में अभी चिंता की बात है कि 134 नर्सिंग होम और अस्पतालों ने एनओसी नहीं ली है। इनके अलावा 350 सोसायटियों में से सिर्फ 305 के पास ही एनओसी है। बाकी 45 सोसायटियों पर एनओसी नहीं है। इनमें से 35 के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर कराया है।
विज्ञापन
100 सोसायटियों में आपात स्थिति में निकलने का रास्ता नहीं:
चिंता की बात है कि शहर की सौ से अधिक ऐसी सोसायटियां ऐसी हैं जिनमें आग लगने के दौरान लोगों के निकलने के लिए आपात दरवाजा नहीं है। बृहस्पतिवार को लोनी अंकुर विहार की चार मंजिला बिल्डिंग में आग लगने पर भी यही स्थिति देखने को मिली। भूतल की पार्किंग में आग लगने पर लोग फंस गए और उन्हें छत पर जाने के लिए जान को खतरे में डालना पड़ा। कई बार निरीक्षण के दौरान अधिकारी इसका संज्ञान नहीं लेते हैं।
15 मीटर से ऊंची इमारतों में अग्निशमन उपकरण जरूरी:
शासन के आदेश के मुताबिक, शहर में 15 मीटर दूर से ऊंची बनी इमारतों में अग्निशमन उपकरण लगाने की जरूरत है। हालांकि, अधिकारी सभी सोसायटियों के लोगों को उपकरण लगाने के लिए जागरुक करते हैं। 15 मीटर से नीचे की इमारतों में अग्निशमन उपकरण लगाने पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता और न ही कभी इनका निरीक्षण होता है।
दमकल ने आठ किमी. की दूरी 50 मिनट में की पूरी
पुलिस से अपार्टमेंट में आग लगने की सूचना मिलने के बावजूद अग्निश्मन विभाग के अफसरों ने दिखाई तेजी
रिची कुमार
लोनी। लोनी फायर स्टेशन की दूरी करीब 8 किलोमीटर है। दमकल विभाग को इसे तय करने में करीब 50 मिनट लगे। सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि रात करीब 1.12 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। दो फायर टेंडर रवाना हुए। रास्ता खराब होने के कारण पानी के टैंकर पहुंचने में समय लगा। लोगों ने बताया कि दूसरी मंजिल में रहने वाले दीपा, सुरेंद्र नेगी, नितेश, अमित, शुभम, राहुल और पवन पांडेय के फ्लैट में आग पहुंच गई थी। इन लोगों के घर का कीमती लाखों का सामान जलकर राख हो गया है। आसपास के लोगों का कहना है कि दमकल विभाग के पानी के टैंकर करीब 2 बजे मौके पर पहुंचे थे। जबकि उन्हें 1.10 मिनट पर सूचना दे दी थी।
इमारत में नहीं थे आग बुझाने के इंतजाम
चार मंजिला इमारत में सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि भूतल की पार्किंग से लेकर ऊपर छत तक अग्निशमन के उपकरण नहीं थे। पार्किंग एरिया में ही मीटर का पैनल लगा था। आग लगने से बिजली के तार और मीटरों में लपटें तेजी से फैलने लगीं। स्थानीय निवासी नितेश ने बताया कि बिल्डिंग का निर्माण कार्य सात साल पहले हाजी मेहताब नाम के बिल्डर ने कराया था। लोगों का आरोप है कि चार मंजिला बिल्डिंग में आग बुझाने के कोई उपकरण नहीं है जबकि लोगों के निकलने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता बनाया हुआ है। प्रशासन या जीडीए के अधिकारियों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। लोगों ने कई बार अधिकारियों से व्यवस्था की मांग की लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
साहिबाबाद। बहुमंजिला इमारतों और अस्पतालों में लोगों की जान सुरक्षित नहीं हैं। 45 बहुमंजिला सोसायटियों और 134 अस्पतालों में छोटी सी भी आग लगी तो कई लोगों की जान जा सकती है। इनके पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमात्र पत्र नहीं है। विभाग ने इनमें से 35 सोसायटियों के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज करा रखा है।
बहुमंजिला इमारत का निर्माण होने के बाद रख-रखाव करने वाली एजेंसी को आग बुझाने के सभी नियम पूरे करने होते हैं। टीम सोसायटी का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर रिपोर्ट तैयार करती है।
विज्ञापन
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल का कहना है कि जनवरी 2023 में जिले के 276 नर्सिंग होम और अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इसमें सिर्फ 135 अस्पतालों के पास एनओसी मिली। जो जून महीने तक कुल इनकी संख्या बढ़ाकर 142 पहुंच गई। ऐसे में अभी चिंता की बात है कि 134 नर्सिंग होम और अस्पतालों ने एनओसी नहीं ली है। इनके अलावा 350 सोसायटियों में से सिर्फ 305 के पास ही एनओसी है। बाकी 45 सोसायटियों पर एनओसी नहीं है। इनमें से 35 के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर कराया है।
विज्ञापन
100 सोसायटियों में आपात स्थिति में निकलने का रास्ता नहीं:
चिंता की बात है कि शहर की सौ से अधिक ऐसी सोसायटियां ऐसी हैं जिनमें आग लगने के दौरान लोगों के निकलने के लिए आपात दरवाजा नहीं है। बृहस्पतिवार को लोनी अंकुर विहार की चार मंजिला बिल्डिंग में आग लगने पर भी यही स्थिति देखने को मिली। भूतल की पार्किंग में आग लगने पर लोग फंस गए और उन्हें छत पर जाने के लिए जान को खतरे में डालना पड़ा। कई बार निरीक्षण के दौरान अधिकारी इसका संज्ञान नहीं लेते हैं।
15 मीटर से ऊंची इमारतों में अग्निशमन उपकरण जरूरी:
शासन के आदेश के मुताबिक, शहर में 15 मीटर दूर से ऊंची बनी इमारतों में अग्निशमन उपकरण लगाने की जरूरत है। हालांकि, अधिकारी सभी सोसायटियों के लोगों को उपकरण लगाने के लिए जागरुक करते हैं। 15 मीटर से नीचे की इमारतों में अग्निशमन उपकरण लगाने पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता और न ही कभी इनका निरीक्षण होता है।
दमकल ने आठ किमी. की दूरी 50 मिनट में की पूरी
पुलिस से अपार्टमेंट में आग लगने की सूचना मिलने के बावजूद अग्निश्मन विभाग के अफसरों ने दिखाई तेजी
रिची कुमार
लोनी। लोनी फायर स्टेशन की दूरी करीब 8 किलोमीटर है। दमकल विभाग को इसे तय करने में करीब 50 मिनट लगे। सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि रात करीब 1.12 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। दो फायर टेंडर रवाना हुए। रास्ता खराब होने के कारण पानी के टैंकर पहुंचने में समय लगा। लोगों ने बताया कि दूसरी मंजिल में रहने वाले दीपा, सुरेंद्र नेगी, नितेश, अमित, शुभम, राहुल और पवन पांडेय के फ्लैट में आग पहुंच गई थी। इन लोगों के घर का कीमती लाखों का सामान जलकर राख हो गया है। आसपास के लोगों का कहना है कि दमकल विभाग के पानी के टैंकर करीब 2 बजे मौके पर पहुंचे थे। जबकि उन्हें 1.10 मिनट पर सूचना दे दी थी।
इमारत में नहीं थे आग बुझाने के इंतजाम
चार मंजिला इमारत में सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि भूतल की पार्किंग से लेकर ऊपर छत तक अग्निशमन के उपकरण नहीं थे। पार्किंग एरिया में ही मीटर का पैनल लगा था। आग लगने से बिजली के तार और मीटरों में लपटें तेजी से फैलने लगीं। स्थानीय निवासी नितेश ने बताया कि बिल्डिंग का निर्माण कार्य सात साल पहले हाजी मेहताब नाम के बिल्डर ने कराया था। लोगों का आरोप है कि चार मंजिला बिल्डिंग में आग बुझाने के कोई उपकरण नहीं है जबकि लोगों के निकलने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता बनाया हुआ है। प्रशासन या जीडीए के अधिकारियों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। लोगों ने कई बार अधिकारियों से व्यवस्था की मांग की लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया।