माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "ईश्वर उपासना" संध्या क्यों,कैसे लाभों की चर्चा हेतु ऑनलाइन गोष्ठी आयोजन किया गया। वैदिक विद्वान आचार्य गवेन्द्र शास्त्री ने कहा कि संध्या करने से मन को प्रसन्नता की अनुभूति होती है। संध्या में कुल 19 वेद मंत्र है। प्रत्येक वेद मंत्र ईश्वर के प्रति समर्पित होने का भाव उत्पन्न करता है। संध्या से तीन प्रकार के विकार आदि,व्याधि व उपाधि अर्थात मनोविकार,शारीरिक विकार व बौद्धिक विकार का उपचार समाधि है। संध्या समाधि के लिए सर्वश्रेष्ठ साधन है। साथ ही उन्होंने चित्त की 5 अवस्थाओं का वर्णन भी बताया। संध्या से दीर्घायु,बुद्धि, तन व मन की पवित्रता के भाव उत्पन्न होते हैं।केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि संध्या की गहराई व महत्व को समझने की आज आवश्यकता है। संध्या के माध्यम से ही मनुष्य को सच्चे सुख की प्राप्ति हो सकती है। सभी को वैदिक संध्या का पाठ करके जीवन को उन्नत बनाना चाहिए।प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि संध्या की उपासना से अहंकार,ईर्ष्या,द्वेष आदि दोष दूर हो जाते हैं व ईश्वर भक्त कभी निराश नही होता। योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने गोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि संध्या से ईश्वर के प्रति समर्पण भाव उत्पन्न होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य नेत्री मृदुला चौटानी ने महर्षि दयानंद के गुणों के बारे में जानकारी देते हुए की। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आनन्द प्रकाश आर्य,डॉ सुषमा आर्या,डॉ रचना चावला,सुरेन्द्र शास्त्री, निरुपमा पुरी,ओम सपरा,वीरेश बुग्गा,नरेश खन्ना,राजेश आर्य,प्रवीन भाटिया,जगदीश मालिक आदि उपस्थित थे।