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Ghaziabad News: दहेज उत्पीड़न के आरोपी अरशद को मिली अग्रिम जमानत
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गाजियाबाद। अंकुर विहार थाना क्षेत्र में दहेज की मांग, मारपीट और महिला से अभद्रता के आरोप में नामजद अरशद को कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अपर सत्र न्यायाधीश नीरज गौतम की अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को राहत दी।
महिला की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार उनका निकाह एक जुलाई 2020 को कय्यूम मलिक के साथ हुआ था। आरोप है कि शादी में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से पांच लाख रुपये नकद और सोने की अंगूठी की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने पर महिला के साथ मारपीट और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि 20 जनवरी 2026 को देवर अरशद शराब के नशे में घर आया और उनके साथ अभद्रता की। इसके अगले दिन चाय में दवा मिलाकर पिलाने का आरोप लगाया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। अरशद की ओर से अदालत में आरोपों को गलत बताते हुए कहा गया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। अभियोजन ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई और मेडिकल जांच में महिला के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को 50 हजार रुपये के दो जमानती और इतनी ही राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर अग्रिम जमानत मंजूर कर दी।
महिला की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार उनका निकाह एक जुलाई 2020 को कय्यूम मलिक के साथ हुआ था। आरोप है कि शादी में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से पांच लाख रुपये नकद और सोने की अंगूठी की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने पर महिला के साथ मारपीट और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि 20 जनवरी 2026 को देवर अरशद शराब के नशे में घर आया और उनके साथ अभद्रता की। इसके अगले दिन चाय में दवा मिलाकर पिलाने का आरोप लगाया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। अरशद की ओर से अदालत में आरोपों को गलत बताते हुए कहा गया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। अभियोजन ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई और मेडिकल जांच में महिला के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को 50 हजार रुपये के दो जमानती और इतनी ही राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर अग्रिम जमानत मंजूर कर दी।
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