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Ghaziabad News: फर्जी दस्तावेजों से 24 पासपोर्ट जारी करने के मामले में सिपाही की अग्रिम जमानत खारिज
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गाजियाबाद। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 24 पासपोर्ट जारी करने के मामले में आरोपी सिपाही दीपक कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायाधीश लाल बाबू यादव की अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार भोजपुर थाने में दर्ज मुकदमे में आरोप है कि एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर के आधार पर 24 पासपोर्ट के लिए आवेदन किए गए। इन आवेदनों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में सामने आया कि पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितता हुई और गलत तरीके से सत्यापन रिपोर्ट लगाई गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी सिपाही दीपक कुमार का नाम सह-अभियुक्तों के बयानों में सामने आया है। आरोप है कि पासपोर्ट बनाने के लिए आवेदकों के फर्जी पते का सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में उच्च अधिकारियों के लॉगिन का इस्तेमाल कर ऑनलाइन रिपोर्ट लगाई गई। मामले की जांच में यह भी बताया गया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान प्रति पासपोर्ट दो हजार रुपये लेने की बात सामने आई है। अभियोजन का कहना था कि यह गंभीर प्रकृति का अपराध है और इसमें आरोपी की भूमिका की जांच अभी जारी है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टा आरोपी की भूमिका सामने आती है और मामला गंभीर प्रकृति का है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं है।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार भोजपुर थाने में दर्ज मुकदमे में आरोप है कि एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर के आधार पर 24 पासपोर्ट के लिए आवेदन किए गए। इन आवेदनों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में सामने आया कि पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितता हुई और गलत तरीके से सत्यापन रिपोर्ट लगाई गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी सिपाही दीपक कुमार का नाम सह-अभियुक्तों के बयानों में सामने आया है। आरोप है कि पासपोर्ट बनाने के लिए आवेदकों के फर्जी पते का सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में उच्च अधिकारियों के लॉगिन का इस्तेमाल कर ऑनलाइन रिपोर्ट लगाई गई। मामले की जांच में यह भी बताया गया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान प्रति पासपोर्ट दो हजार रुपये लेने की बात सामने आई है। अभियोजन का कहना था कि यह गंभीर प्रकृति का अपराध है और इसमें आरोपी की भूमिका की जांच अभी जारी है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टा आरोपी की भूमिका सामने आती है और मामला गंभीर प्रकृति का है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं है।
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