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Ghaziabad News: जमीन के नीचे बनेगा पानी का बैंक, चार इलाकों में होगी राहत की जमा पूंजी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 02:34 AM IST
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An underground water bank will be created, storing a vital reserve to bring relief to four areas.

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संजना तिवारी

साहिबाबाद। मोहन नगर जोन में पानी की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चार स्थानों पर भूमिगत जलाशय बनाने की तैयारी है। शालीमार गार्डन, ब्रिज विहार, मोहन नगर और शिवपुरी में 30-30 किली क्षमता के भूमिगत जलाशय बनाए जाएंगे। इन जलाशयों के निर्माण पर करीब छह करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना के तहत जलाशयों को आसपास के क्षेत्रों की जलापूर्ति व्यवस्था से जोड़ा जाएगा, इससे मांग बढ़ने के दौरान पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ कई इलाकों में आपूर्ति का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में भूमिगत जलाशयों में पानी का भंडारण कर जरूरत के अनुसार इसकी आपूर्ति की जा सकेगी। इससे सुबह-शाम पानी की अधिक मांग वाले समय में आपूर्ति व्यवस्था को संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है। जलाशय बनने के बाद अचानक आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भी कुछ समय के लिए स्थानीय स्तर पर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। महापौर सुनीता दयाल ने बताया कि शालीमार गार्डन, ब्रिज विहार, मोहन नगर और शिवपुरी में जलाशय बनने से इन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर पानी का भंडारण होने से दूर स्थित स्रोतों पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति को जरूरत के अनुसार नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि जलाशयों को मौजूदा जलापूर्ति नेटवर्क से जोड़कर क्षेत्रवार आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर किया जाए। इस परियोजना से करीब बीस हजार लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
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वर्तमान में कई स्थानों पर जर्जर हैं भूमिगत जलाशय

टीएचए में कई जगहों पर भूमिगत जलाशय से पानी देने का काम किया जाता है। किंतु यह जलाशय कई जगहों से खंडहर हो चुके हैं। आलम यह है कि शिकायतों के बाद भी इन जलाशयों की मरम्मत नहीं कराई गई है। वैशाली सेक्टर एक, दो, तीन, चार, वसुंधरा और कड़कड़ मॉडल स्थित कई जलाशयों में ऊपर लगे ढक्कन जर्जर अवस्था में हैं। स्थानीय निवासी धीरेंद्र भदौरिया ने बताया कि वैशाली सेक्टर तीन एफ स्थित भूमिगत जलाशय लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। यहां पर लगे ढक्कन गल चुके हैं। कई बार निगम में इसकी शिकायत की गई लेकिन अब तक मरम्मत का कार्य नहीं हो पाया है।
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