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Ghaziabad News: अपील पब्लिक ट्रांसपोर्ट की…सफर के साधन अधूरे

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 12:50 AM IST
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An Appeal for Public Transport... Yet Modes of Travel Remain Inadequate
साहिबाबाद। खाड़ी देशों में तनाव के बीच ईंधन बचाने के लिए प्रशासन लोगों से निजी वाहनों की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील कर रहा है। सवाल यह है कि शहरवासी आखिर किस सार्वजनिक परिवहन पर भरोसा करें? जनपद में मेट्रो और नमो भारत जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन उनके रूट सीमित हैं। दूसरी ओर चार साल पहले बड़े दावों के साथ शुरू हुई सिटी ई-बस सेवा भी अब तक पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। ऐसे में लोगों के पास ई-रिक्शा, ऑटो और डग्गामार वाहनों का ही सहारा बचता है।
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क्रॉसिंग रिपब्लिक निवासी उज्ज्वल मिश्रा कहते हैं, मैं अपनी कार छोड़ने के लिए तैयार हूं, लेकिन आसपास कोई भरोसेमंद सार्वजनिक साधन ही नहीं है। मेट्रो पकड़ने के लिए भी सेक्टर-62 तक जाना पड़ता है। ऐसे में निजी वाहन छोड़ना आसान नहीं।
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चार साल बाद भी नहीं सुधरी सिटी बस व्यवस्था

प्रदूषण कम करने और लोगों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से जनवरी 2022 में शहर में 50 सिटी ई-बसों का संचालन शुरू किया गया था। एक साल के भीतर ही इनमें से 23 बसें खराब हो गईं। कुछ को ठीक कर लिया गया, लेकिन 18 बसें बंद पड़ी हैं। आरएम केसरी नंदन चौधरी के अनुसार 32 बसें संचालित हो रही हैं, मगर जमीनी स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। बसों के रूट तो तय किए गए, लेकिन आज तक न स्थायी बस स्टॉप बने और न ही समय-सारिणी जारी हुई। ऐसे में लोग बस सेवा के अनुसार अपने सफर की योजना ही नहीं बना पाते। श्याम पार्क एक्सटेंशन निवासी राजन बताते हैं, सिटी बस कभी-कभार ही दिखाई देती है।
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सिर्फ छह रूटों तक सीमित सेवा

शहर में सिटी बसें केवल छह रूटों कौशांबी-आनंद विहार से मुरादनगर, कौशांबी से दादरी, कौशांबी से गोविंदपुरी (मोदीनगर), लोनी से पुराना बस अड्डा, पुराना बस अड्डा से मसूरी-डासना और कौशांबी से सेक्टर-62 पर चल रही हैं। कौशांबी-दिलशाद गार्डन-गोविंदपुरम रूट पर बस सेवा बंद है। तीन अन्य प्रस्तावित रूटों टीला मोड़-भोपुरा-नया बस अड्डा, दिलशाद गार्डन-शहीदनगर-हिंडन एयरपोर्ट और कौशांबी-एनएच-वेव सिटी पर अब तक संचालन शुरू नहीं हो पाया है। हिंडन एयरपोर्ट प्रशासन भी बस सेवा शुरू कराने की मांग कर चुका है।

मेट्रो तक पहुंचना ही बड़ी चुनौती



महेंद्र एन्क्लेव निवासी गौरव बताते हैं कि दिल्ली ऑफिस जाने के लिए यदि वे कार छोड़ते हैं तो पहले पैदल हापुड़ रोड तक जाना पड़ता है। वहां से ऑटो लेकर पुराने बस अड्डे और फिर दूसरे ऑटो से नए बस अड्डा मेट्रो स्टेशन पहुंचना पड़ता है। उनका कहना है कि देशहित में वाहन छोड़ना ठीक है, लेकिन सिर्फ मेट्रो तक पहुंचने में ही इतना समय लग जाए तो लोग मजबूर होकर निजी वाहन इस्तेमाल करेंगे।



ऑटो और ई-रिक्शा भी अव्यवस्थित

मेट्रो और बसों की सीमित उपलब्धता के बाद भी शहर में ऑटो और ई-रिक्शा व्यवस्था व्यवस्थित नहीं है। गोविंदपुरम, शास्त्रीनगर, कविनगर, नेहरू नगर, राजनगर एक्सटेंशन और क्रॉसिंग रिपब्लिक जैसी बड़ी आबादी वाले इलाकों में लोगों को आसानी से ई-रिक्शा और ऑटो नहीं मिलते। शहर में करीब 15 हजार ऑटो और 25 हजार से अधिक ई-रिक्शा संचालित हैं, लेकिन इनके रूट और संचालन को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। क्रॉसिंग रिपब्लिक निवासी मनीष त्रिपाठी कहते हैं कि यहां ई-रिक्शा ही एकमात्र विकल्प है, लेकिन वह भी एनएच-9 पर नहीं चल सकता। आगे जाने के लिए फिर दूसरी सवारी ढूंढनी पड़ती है।
आरटीओ प्रशासन प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि रूट सिर्फ मुख्य मार्गों के लिए तय किए जाते हैं। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए आंतरिक मार्गों पर रूट देने की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। अगर ऐसा कोई आदेश आता है तो इसे लागू किया जाएगा।

एडीसीपी यातायात वरुण कुमार सिंह का कहना है कि गत दिनों ई-रिक्शा को तीन अलग-अलग रंगों के कोड बार आवंटित किए गए थे। कलर के अनुसार देहात, सिटी और ट्रांस हिंडन के रूट निर्धारित हैं। शहर की सड़कों के रूट जल्द निर्धारित किए जाएंगे।

जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर सभी विभागों से बात कर इस व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।

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