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Ghaziabad News: चार हजार रुपये लेकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का आरोप
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साहिबाबाद। शालीमार गार्डन एक्सटेंशन दो स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रुपये लेकर फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले की शिकायत स्थानीय पार्षद से कर जांच की मांग की है। आरोप है कि चार हजार रुपये लेकर महिला ने बेटियों का जन्म प्रमाणपत्र बनाया था। बाद में पता चला कि वह फर्जी है और ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं है। अब इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की गई है।
स्थानीय पार्षद रवि भाटी ने बताया कि क्षेत्र में रहने वाले आरिफ ने उनसे इस मामले की शिकायत कर सही प्रमाण पत्र बनवाए जाने की मांग की है। पीड़ित आरिफ ने बताया कि उनकी चार वर्षीय बेटी एलिस और ढाई साल की अन्हा है। दोनों बेटियों के सभी टीके इसी स्वास्थ्य केंद्र से लगे हैं। अन्हा के जन्म के बाद उन्होंने दोनों बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के बारे में पता किया। आरोप है कि केंद्र पर तैनात महिला ने कहा कि बड़ी बेटी के जन्म को काफी समय हो गया है। इसलिए थोड़ी दिक्कत है, लेकिन वह बनवा देगी। उसने दोनों बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में चार हजार रुपये लेकर दोनों के जन्म प्रमाण-पत्र दे दिए। हाल ही में उन्होंने बेटियों के आधार कार्ड के लिए आवेदन किया तो पता चला कि वह फर्जी प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने नगर निगम में जाकर बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र दिखाए तो वहां पर भी फर्जी बताए। कर्मचारियों ने बताया कि इसका ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आरिफ की मां व पत्नी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची, जहां वह महिला कर्मचारी नहीं मिली।
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स्थानीय पार्षद रवि भाटी ने बताया कि क्षेत्र में रहने वाले आरिफ ने उनसे इस मामले की शिकायत कर सही प्रमाण पत्र बनवाए जाने की मांग की है। पीड़ित आरिफ ने बताया कि उनकी चार वर्षीय बेटी एलिस और ढाई साल की अन्हा है। दोनों बेटियों के सभी टीके इसी स्वास्थ्य केंद्र से लगे हैं। अन्हा के जन्म के बाद उन्होंने दोनों बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के बारे में पता किया। आरोप है कि केंद्र पर तैनात महिला ने कहा कि बड़ी बेटी के जन्म को काफी समय हो गया है। इसलिए थोड़ी दिक्कत है, लेकिन वह बनवा देगी। उसने दोनों बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में चार हजार रुपये लेकर दोनों के जन्म प्रमाण-पत्र दे दिए। हाल ही में उन्होंने बेटियों के आधार कार्ड के लिए आवेदन किया तो पता चला कि वह फर्जी प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने नगर निगम में जाकर बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र दिखाए तो वहां पर भी फर्जी बताए। कर्मचारियों ने बताया कि इसका ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आरिफ की मां व पत्नी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची, जहां वह महिला कर्मचारी नहीं मिली।
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