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Ghaziabad News: हादसे में घायल युवक को अस्पताल में एडमिट करने से मना करने का आरोप, इलाज के बाद मौत
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इंदिरापुरम। थानाक्षेत्र में 19 सितंबर को नमो भारत स्टेशन के पास सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पिता ने इस मामले में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। वहीं, पुलिस आरोपी चालक की तलाश में जुटी है। युवक के पिता ने इंदिरापुरम स्थित अटलांटा अस्पताल प्रबंधन पर घायल बेटे को भर्ती न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि उनके बेटे को समय से इलाज मिल जाता तो खून ज्यादा न बहता और शायद उनका बेटा आज जिंदा होता। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने न्यूरो सर्जरी की व्यवस्था न होने की बात कही है।
प्रहलाद गढ़ी निवासी पीड़ित शिवकुमार ने बताया कि वह पेंटर हैं। उनका बेटा तुषार (24) नोएडा और दिल्ली के होटल में वेटर के रूप में कार्यरत था और बड़ा बेटा प्रशांत गौतम जिम ट्रेनर है। उन्होंने बताया कि 19 सितंबर की रात दिल्ली से तुषार घर लौटते समय रात करीब ढाई बजे लिंक रोड से नमो भारत साहिबाबाद स्टेशन के पास पहुंचा। उसी समय पीछे से आए अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में तुषार गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीरों ने पुलिस को हादसे की सूचना दी। पुलिस घायल अवस्था में तुषार को पास के अटलांटा अस्पताल लेकर गई। शिवकुमार का आरोप है कि गंभीर हालत में होने के बावजूद अस्पताल कर्मचारियों ने तुषार को भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस उसे यशोदा मेडिसिटी ले गई, जहां चिकित्सकों ने भर्ती कर इलाज शुरू किया। वहां इलाज का खर्च अधिक होने के कारण वे तुषार को रेफर कराकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गए। जहां 20 सितंबर की रात इलाज के दौरान तुषार की मौत हो गई। उधर, पुलिस ने 21 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने बताया कि पुलिस पहले अटलांटा अस्पताल ही लेकर गई थी, इसकी जांच कराई जा रही है। बुधवार को इस मामले में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज करके सीसीटीवी फुटेज चेक कर रही है।
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अस्पताल बोला- न्यूरो सर्जरी की जरूरत थी, रात में नहीं थी सुविधा
अटलांटा अस्पताल के सीओओ डॉ. महेश ने बताया कि 19 सितंबर की रात पुलिस एक युवक को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लेकर आई। उसके सिर में गंभीर चोट थी और शरीर के कई हिस्सों से खून बह रहा था। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने करीब आधे घंटे तक उसे प्राथमिक उपचार दिया। चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल न्यूरो संबंधी जांच, न्यूरो सर्जरी और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता थी। अस्पताल में न्यूरो सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसलिए भर्ती नहीं किया गया और आगे के उपचार के लिए दूसरे अस्पताल भेजा गया।
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प्रहलाद गढ़ी निवासी पीड़ित शिवकुमार ने बताया कि वह पेंटर हैं। उनका बेटा तुषार (24) नोएडा और दिल्ली के होटल में वेटर के रूप में कार्यरत था और बड़ा बेटा प्रशांत गौतम जिम ट्रेनर है। उन्होंने बताया कि 19 सितंबर की रात दिल्ली से तुषार घर लौटते समय रात करीब ढाई बजे लिंक रोड से नमो भारत साहिबाबाद स्टेशन के पास पहुंचा। उसी समय पीछे से आए अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में तुषार गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीरों ने पुलिस को हादसे की सूचना दी। पुलिस घायल अवस्था में तुषार को पास के अटलांटा अस्पताल लेकर गई। शिवकुमार का आरोप है कि गंभीर हालत में होने के बावजूद अस्पताल कर्मचारियों ने तुषार को भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस उसे यशोदा मेडिसिटी ले गई, जहां चिकित्सकों ने भर्ती कर इलाज शुरू किया। वहां इलाज का खर्च अधिक होने के कारण वे तुषार को रेफर कराकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गए। जहां 20 सितंबर की रात इलाज के दौरान तुषार की मौत हो गई। उधर, पुलिस ने 21 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने बताया कि पुलिस पहले अटलांटा अस्पताल ही लेकर गई थी, इसकी जांच कराई जा रही है। बुधवार को इस मामले में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज करके सीसीटीवी फुटेज चेक कर रही है।
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अस्पताल बोला- न्यूरो सर्जरी की जरूरत थी, रात में नहीं थी सुविधा
अटलांटा अस्पताल के सीओओ डॉ. महेश ने बताया कि 19 सितंबर की रात पुलिस एक युवक को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लेकर आई। उसके सिर में गंभीर चोट थी और शरीर के कई हिस्सों से खून बह रहा था। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने करीब आधे घंटे तक उसे प्राथमिक उपचार दिया। चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल न्यूरो संबंधी जांच, न्यूरो सर्जरी और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता थी। अस्पताल में न्यूरो सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसलिए भर्ती नहीं किया गया और आगे के उपचार के लिए दूसरे अस्पताल भेजा गया।
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