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कोर्ट में पेश हुए अंटू मिश्र व बाबू सिंह कुशवाहा-Cordination
Updated Wed, 29 Nov 2017 07:33 PM IST
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एनआरएचएम घोटाला
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कोर्ट में पेश हुए बाबू सिंह कुशवाहा और अंटू मिश्रा
सबहेड
न्यायाधीश के अवकाश पर रहने के चलते नहीं हुई सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। सीबीआई की विशेष अदालत में बुधवार को एनआरएचएम घोटाले के दो मामलों की सुनवाई होनी थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी के अवकाश पर होने के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। जमानत पर चल रहे अभियुक्त पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और अंटू मिश्रा कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 19 दिसंबर की तारीख तय की है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2009-10 में एनआरएचएम घोटाले के तहत बिना प्रस्ताव और मांग के डीपीओ के 100 नए पदों का सृजन किया गया था। इसके बाद 72 डॉक्टरों को वरिष्ठता व नियमों की अनदेखी कर डीपीओ बनाया गया था। इस घोटाले में सीबीआई ने पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा और बाबू सिंह कुशवाहा, महेंद्र कुमार पांडेय, रईस आलम सिद्दीकी समेत कई के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। दोनों मंत्रियों पर आरोप था कि उन्होंने दवा कारोबारियों से लाखों रुपये की रिश्वत लेकर अपने चहेतों को डीपीओ बनाया था। इन डीपीओ ने ही बाद में दवा कारोबारियों के साथ मिलकर एनआरएचएम स्कीम के तहत करोड़ों रुपये का सरकार को नुकसान पहुंचाया था।
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एनआरएचएम घोटाला
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कोर्ट में पेश हुए बाबू सिंह कुशवाहा और अंटू मिश्रा
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न्यायाधीश के अवकाश पर रहने के चलते नहीं हुई सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। सीबीआई की विशेष अदालत में बुधवार को एनआरएचएम घोटाले के दो मामलों की सुनवाई होनी थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी के अवकाश पर होने के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। जमानत पर चल रहे अभियुक्त पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और अंटू मिश्रा कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 19 दिसंबर की तारीख तय की है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2009-10 में एनआरएचएम घोटाले के तहत बिना प्रस्ताव और मांग के डीपीओ के 100 नए पदों का सृजन किया गया था। इसके बाद 72 डॉक्टरों को वरिष्ठता व नियमों की अनदेखी कर डीपीओ बनाया गया था। इस घोटाले में सीबीआई ने पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा और बाबू सिंह कुशवाहा, महेंद्र कुमार पांडेय, रईस आलम सिद्दीकी समेत कई के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। दोनों मंत्रियों पर आरोप था कि उन्होंने दवा कारोबारियों से लाखों रुपये की रिश्वत लेकर अपने चहेतों को डीपीओ बनाया था। इन डीपीओ ने ही बाद में दवा कारोबारियों के साथ मिलकर एनआरएचएम स्कीम के तहत करोड़ों रुपये का सरकार को नुकसान पहुंचाया था।
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