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Ghaziabad News: कनेक्शन लेने के बाद लापता हो गए 6500 उपभोक्ता
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गाजियाबाद। बिजली का कनेक्शन लेने के बाद लगभग 6500 ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्होंने बिल नहीं जमा किया और लापता हो गए। यह आकड़ा तीनों जोन का है। ऐसे उपभोक्ताओं की खोज के लिए ऊर्जा निगम की ओर से अभियान चलाया जाएगा। जोन एक में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 800 के करीब है। जोन दो और तीन में करीब 3800 और जोन तीन में 1900 है।
इन उपभोक्ताओं ने किराये के मकान और दुकान में रहने के दौरान बिजली का कनेक्शन अपने नाम पर लिया। जब बिल का ज्यादा रुपया बकाया हो गया तो यह किराये का मकान और दुकान खाली कर चंपत हो गए। इन उपभोक्ताओं पर निगम का करीब आठ लाख रुपये का बिल बकाया है। ऐसे में ऊर्जा निगम के अधिकारी ऐसे उपभोक्ताओं की तलाश को अभियान चलाएंगे और खोजकर बिल की वसूली करेंगे।
जोन दो के मुख्य अभियंता नरेश भारती और जोन एक के अधिक्षण अभियंता एके सिंह ने बताया कि बिजली का कनेक्शन लेने के दौरान इन उपभोक्ताओं ने जो कागज निगम में जमा कराये थे। उसके आधार पर इनकी खोज की जा रही है। उनके मूल पते के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। इनके मिल जाने पर इनसे बकाया बिल के साथ ही ब्याज की भी वसूली की जाएगी। लापता उपभोक्ताओं को ऊर्जा निगम की ओर से संचालित किसी योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। इन्हें किसी प्रकार की कोई छूट बकाये बिल के भुगतान के दौरान नहीं दी जाएगी। इसके अलावा बकाये साथ जो जुर्माना है। उसकी भी वसूली की जाएगी।
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1255 कार्यालयों में नहीं लगा मीटर
गाजियाबाद। जनपद के 1255 ऐसे कार्यालय हैं, जिनमें बिजली का मीटर नहीं लगा है। कुछ सरकारी कर्मचारियों के आवास में भी मीटर नहीं लगा है। ये लोग भी 200 यूनिट का बिल दे रहे हैं।
अब सरकार की ओर से इसे बढ़ाकर 800 यूनिट कर दिया गया है। अगर इन्होंने मीटर नहीं लगवाया तो ऐसे कार्यालय और लोगों को 800 यूनिट के बिल का भुगतान करना होगा। जनपद में सभी सरकारी कार्यालयों और कर्मचारी आवासों पर बिजली के मीटर लग चुके हैं। बावजूद इसके तीनों जोन के 1255 ऐसे छोटे कार्यालय हैं। इनमें मीटर नहीं लग सके हैं। इनमें सिंचाई और जल कल के ट्यूबवेल वाले कार्यालय भी शामिल हैं। ऐसे में इन कार्यालयों के बारे में ऊर्जा निगम की ओर से जानकारी की जा रही है। इन पर भी मीटर लगाया जाएगा। जोन दो के मुख्य अभियंता नरेश भारती ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में ऐसे कार्यालय हो सकते हैं, जिनके यहां मीटर नहीं लगा हो। ऐसे कार्यालयों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा। वैसे विभाग की ओर से लगभग सभी स्थानों पर मीटर लगा दिया गया है।
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इन उपभोक्ताओं ने किराये के मकान और दुकान में रहने के दौरान बिजली का कनेक्शन अपने नाम पर लिया। जब बिल का ज्यादा रुपया बकाया हो गया तो यह किराये का मकान और दुकान खाली कर चंपत हो गए। इन उपभोक्ताओं पर निगम का करीब आठ लाख रुपये का बिल बकाया है। ऐसे में ऊर्जा निगम के अधिकारी ऐसे उपभोक्ताओं की तलाश को अभियान चलाएंगे और खोजकर बिल की वसूली करेंगे।
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जोन दो के मुख्य अभियंता नरेश भारती और जोन एक के अधिक्षण अभियंता एके सिंह ने बताया कि बिजली का कनेक्शन लेने के दौरान इन उपभोक्ताओं ने जो कागज निगम में जमा कराये थे। उसके आधार पर इनकी खोज की जा रही है। उनके मूल पते के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। इनके मिल जाने पर इनसे बकाया बिल के साथ ही ब्याज की भी वसूली की जाएगी। लापता उपभोक्ताओं को ऊर्जा निगम की ओर से संचालित किसी योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। इन्हें किसी प्रकार की कोई छूट बकाये बिल के भुगतान के दौरान नहीं दी जाएगी। इसके अलावा बकाये साथ जो जुर्माना है। उसकी भी वसूली की जाएगी।
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1255 कार्यालयों में नहीं लगा मीटर
गाजियाबाद। जनपद के 1255 ऐसे कार्यालय हैं, जिनमें बिजली का मीटर नहीं लगा है। कुछ सरकारी कर्मचारियों के आवास में भी मीटर नहीं लगा है। ये लोग भी 200 यूनिट का बिल दे रहे हैं।
अब सरकार की ओर से इसे बढ़ाकर 800 यूनिट कर दिया गया है। अगर इन्होंने मीटर नहीं लगवाया तो ऐसे कार्यालय और लोगों को 800 यूनिट के बिल का भुगतान करना होगा। जनपद में सभी सरकारी कार्यालयों और कर्मचारी आवासों पर बिजली के मीटर लग चुके हैं। बावजूद इसके तीनों जोन के 1255 ऐसे छोटे कार्यालय हैं। इनमें मीटर नहीं लग सके हैं। इनमें सिंचाई और जल कल के ट्यूबवेल वाले कार्यालय भी शामिल हैं। ऐसे में इन कार्यालयों के बारे में ऊर्जा निगम की ओर से जानकारी की जा रही है। इन पर भी मीटर लगाया जाएगा। जोन दो के मुख्य अभियंता नरेश भारती ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में ऐसे कार्यालय हो सकते हैं, जिनके यहां मीटर नहीं लगा हो। ऐसे कार्यालयों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा। वैसे विभाग की ओर से लगभग सभी स्थानों पर मीटर लगा दिया गया है।