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निजी चिकित्सकों की हड़ताल से मरीज बेहाल
Updated Wed, 03 Jan 2018 05:45 PM IST
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निजी चिकित्सकों की हड़ताल से मरीज बेहाल
गाजियाबाद। निजी चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मंगलवार को कड़कड़ाती ठंड में मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आए मरीजों को मजबूरी में बिना दवा लिए वापस लौटना पड़ा। सुबह छह बजे से दोपहर तीन बजे तक आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम और लैब आदि बंद रहे। आईएमए के आह्वान पर देशभर में निजी चिकित्सक मंगलवार को 12 घंटे की हड़ताल पर थे। हालांकि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के स्टैडिंग कमेटी के पास चले जाने और सरकार द्वारा संशोधन की मांग मानने के बाद तीन बजे ही हड़ताल वापस ले ली गई।
केंद्र सरकार की एनएमसी बिल का विरोध कर रहे प्राइवेट चिकित्सकों ने मंगलवार को तीन बजे तक सभी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और लैब आदि बंद रखे। ओपीडी बंद होने के कारण चेकअप कराने आए मरीजों को वापस लौटना पड़ा। यशोदा अस्पताल में चेकअप कराने आईं लोहियानगर निवासी ऊषा देवी और कैला भट्टा निवासी शहाबुद्दीन को वापस लौटना पड़ा। ऊषा देवी को स्लिप डिस्क की समस्या थी। शहाबुद्दीन अपनी गर्भवती पत्नी का इलाज कराने आए थे। उन्होंने बताया कि एमएमजी अस्पताल में उनका चेकअप कराया था, जहां चिकित्सकों ने कुछ जटिलता बताते हुए किसी दूसरी जगह चेकअप कराने की सलाह दी थी। इसी के चलते वह यशोदा अस्पताल आए थे मगर अब हड़ताल के कारण वापस लौटना पड़ रहा है। डासना निवासी अजहर अपनी पत्नी और बच्चे का चेकअप कराने पटेल नगर एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां आए थे लेकिन वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि पत्नी और बच्चा दोनों को बुखार था। इसके साथ ही सर्दी-जुकाम की भी समस्या थी मगर डाक्टरों की हड़ताल के चलते इलाज नहीं हो सका। इतनी ठंड में दोनों को इतनी दूर से लेकर आए हैं अब वापस लौटना पडे़गा। इस दौरान मरीजों का अल्ट्रासाउंड, पैथलोजी जांच आदि भी नहीं हो पाए।
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‘नेशनल मेडिकल कमीशन बिल गरीब विरोधी’
गाजियाबाद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गाजियाबाद के चिकित्सकों ने मंगलवार को आईएमए भवन में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया। आईएमए गाजियाबाद के अध्यक्ष डॉ. शलभ गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार जो नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल ला रही है, वह मरीज और गरीब विरोधी है। इस बिल के तहत सभी आयुष चिकित्सक छह महीने की ट्रेनिंग के बाद एलोपैथिक इलाज कर पाएंगे। इसके अलावा एमबीबीएस स्टूडेंट्स 18 परीक्षाएं पास करेगा, लेकिन इलाज के पंजीकरण के लिए फिर एक परीक्षा देनी पडे़गी। उस परीक्षा में फेल होने पर लाइसेंस नहीं मिलेगा जबकि विदेश से पढ़कर आया कोई भी एमबीबीएस छात्र बिना पंजीयन और परीक्षा पास किए भारत में प्रैक्टिस कर सकेगा। इसके अलावा आयुष चिकित्सक सिर्फ छह माह की ट्रेनिंग के बाद ही एलोपैथी का इलाज करने लगेंगे। डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि यह बिल सिर्फ अमीरों के लिए बनाया गया है। इस बिल के अनुसार मेडिकल कॉलेज 60 फीसदी सीटों पर एडमिशन पर मनचाही फीस वसूल सकते हैं। इससे गरीब घर या मध्यम घर के बच्चे तो मेडिकल की पढ़ाई ही नहीं कर पाएंगे। प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य रूप से डॉ. आलोक शर्मा, डॉ. अपूर्व गोयल, डॉ., संजीव जैन, डॉ. आयूष अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक शामिल रहे।
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गाजियाबाद। निजी चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मंगलवार को कड़कड़ाती ठंड में मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आए मरीजों को मजबूरी में बिना दवा लिए वापस लौटना पड़ा। सुबह छह बजे से दोपहर तीन बजे तक आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम और लैब आदि बंद रहे। आईएमए के आह्वान पर देशभर में निजी चिकित्सक मंगलवार को 12 घंटे की हड़ताल पर थे। हालांकि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के स्टैडिंग कमेटी के पास चले जाने और सरकार द्वारा संशोधन की मांग मानने के बाद तीन बजे ही हड़ताल वापस ले ली गई।
केंद्र सरकार की एनएमसी बिल का विरोध कर रहे प्राइवेट चिकित्सकों ने मंगलवार को तीन बजे तक सभी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और लैब आदि बंद रखे। ओपीडी बंद होने के कारण चेकअप कराने आए मरीजों को वापस लौटना पड़ा। यशोदा अस्पताल में चेकअप कराने आईं लोहियानगर निवासी ऊषा देवी और कैला भट्टा निवासी शहाबुद्दीन को वापस लौटना पड़ा। ऊषा देवी को स्लिप डिस्क की समस्या थी। शहाबुद्दीन अपनी गर्भवती पत्नी का इलाज कराने आए थे। उन्होंने बताया कि एमएमजी अस्पताल में उनका चेकअप कराया था, जहां चिकित्सकों ने कुछ जटिलता बताते हुए किसी दूसरी जगह चेकअप कराने की सलाह दी थी। इसी के चलते वह यशोदा अस्पताल आए थे मगर अब हड़ताल के कारण वापस लौटना पड़ रहा है। डासना निवासी अजहर अपनी पत्नी और बच्चे का चेकअप कराने पटेल नगर एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां आए थे लेकिन वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि पत्नी और बच्चा दोनों को बुखार था। इसके साथ ही सर्दी-जुकाम की भी समस्या थी मगर डाक्टरों की हड़ताल के चलते इलाज नहीं हो सका। इतनी ठंड में दोनों को इतनी दूर से लेकर आए हैं अब वापस लौटना पडे़गा। इस दौरान मरीजों का अल्ट्रासाउंड, पैथलोजी जांच आदि भी नहीं हो पाए।
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‘नेशनल मेडिकल कमीशन बिल गरीब विरोधी’
गाजियाबाद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गाजियाबाद के चिकित्सकों ने मंगलवार को आईएमए भवन में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया। आईएमए गाजियाबाद के अध्यक्ष डॉ. शलभ गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार जो नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल ला रही है, वह मरीज और गरीब विरोधी है। इस बिल के तहत सभी आयुष चिकित्सक छह महीने की ट्रेनिंग के बाद एलोपैथिक इलाज कर पाएंगे। इसके अलावा एमबीबीएस स्टूडेंट्स 18 परीक्षाएं पास करेगा, लेकिन इलाज के पंजीकरण के लिए फिर एक परीक्षा देनी पडे़गी। उस परीक्षा में फेल होने पर लाइसेंस नहीं मिलेगा जबकि विदेश से पढ़कर आया कोई भी एमबीबीएस छात्र बिना पंजीयन और परीक्षा पास किए भारत में प्रैक्टिस कर सकेगा। इसके अलावा आयुष चिकित्सक सिर्फ छह माह की ट्रेनिंग के बाद ही एलोपैथी का इलाज करने लगेंगे। डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि यह बिल सिर्फ अमीरों के लिए बनाया गया है। इस बिल के अनुसार मेडिकल कॉलेज 60 फीसदी सीटों पर एडमिशन पर मनचाही फीस वसूल सकते हैं। इससे गरीब घर या मध्यम घर के बच्चे तो मेडिकल की पढ़ाई ही नहीं कर पाएंगे। प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य रूप से डॉ. आलोक शर्मा, डॉ. अपूर्व गोयल, डॉ., संजीव जैन, डॉ. आयूष अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक शामिल रहे।
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