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गाजियाबाद में हुआ 55.8 फीसदी मतदान
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 12 Feb 2017 10:04 PM IST
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मतदान के लिए लगी लंबी लाइन
- फोटो : amar ujala
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पांचों विधानसभा सीट पर मतदान की फाइनल अपडेट रविवार दोपहर प्रशासन ने जारी कर दी। प्रशासन के अनुसार गाजियाबाद में इस बार कुल मिलाकर 55.8 फीसदी मतदान ही हो सका है। यह आंकड़ा 2012 विधानसभा चुनाव के मुकाबले करीब दो फीसदी कम है।
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ऐसे में प्रशासन के उन जागरूकता अभियानों पर भी पानी फिर गया, जोकि एक माह से चलाए जा रहे थे।शनिवार शाम पांच बजे मतदान समाप्त हो गया था। इससे पूर्व 3 बजे तक चार चरणों में मतदान का प्रतिशत प्रशासन जारी कर चुका था। फाइनल प्रतिशत के लिए अधिकारी देर रात तक आंकडे़बाजी में लगे रहे।
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अधिकारियों की यह कवायद रविवार दोपहर 12 बजे तक चली। इन 18 घंटों के दौरान प्रशासन के मतदान प्रतिशत आंकडे़ पांच बार बदले। सबसे पहले प्रशासन ने मतदान का प्रतिशत 58.1 बताया था। इसके दो घंटे बाद प्रशासन ने दूसरी सूची जारी करते हुए 57.41 प्रतिशत बताया।
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शनिवार आधी रात के दौरान प्रशासन ने तीसरी बार सूची जारी करते हुए बताया कि गाजियाबाद में 57.20 फीसदी मतदान हुआ है। यह आंकडे़बाजी यहां भी नहीं रुकी। रविवार सुबह एक बार फिर प्रशासन ने लिस्ट जारी करते हुए 56.47 फीसदी मतदान होना बताया।
इसके बाद प्रशासन ने दोपहर में चुनाव आयोग को भेजी फाइनल लिस्ट में बताया कि गाजियाबाद में मतदान का कुल प्रतिशत 55.8 फीसदी रहा है।इस मामले में एडीएम प्रशासन ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि सभी मतदान केंद्रों से फाइनल आंकडे़ आने में देर हुई थी।
ऐसे में कई बार आंकडे़ बदले। उन्होंने बताया कि फाइनल मतदान 55.8 फीसदी हुआ है। इसकी रिपोर्ट रविवार दोपहर को ही चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है।
चुनाव आयोग की कवायद पर गाजियाबाद में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए जिस तेजी और प्लानिंग के साथ जागरूकता कार्यक्रम हुए। शायद ही इससे पहले कभी इस तरह का कार्यक्रम हुआ हो। इसके बावजूद लोग मतदान के प्रति जागरूक नहीं हो सके। यही कारण रहा कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार करीब दो फीसदी मतदान कम हुआ।
प्रशासन ने पहली बार वोट प्रतिशत बढ़ाने को स्विप टीम गठित की थीं। लोगों को जागरूक करने के लिए स्विप टीम ने लाखों रुपये खर्च कर बड़े स्तर पर कई कार्यक्रम किए। शहर भर में जागरूकता होर्डिंग्स लगाए गए, 25 जनवरी और 5 फरवरी को बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें मुंबई से गायक और अभिनेता बुलाए गए।
युवाओं और दिव्यांगों को चुनाव एंबेसडर बनाया गया। यहां तक कि सभी बोर्ड में बच्चों को मतदाता जागरूकता बढ़ाने के लिए पांच नंबर भी जोड़ने का प्रावधान किया गया। पहली बार आदर्श बूथ और वहां सेल्फी प्वाइंट भी बनाए गए थे।
खुद जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीएम निधि केसरवानी को उम्मीद थी कि इस बार करीब 65 फीसदी मतदान होगा, मगर आधे मतदाता ‘पप्पू’ ही बने रहे। प्रशासनिक अधिकारी अब उन वजहों को तलाश रहे हैं, जोकि मतदान प्रतिशत घटने का कारण बनीं।
एडीएम प्रशासन का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मिलने वाले फीड बैक से ही कम मतदान होने की वजह मालूूम हो सकेगी।
- सरकारी पर्ची होने के बावजूद पीठासीन अधिकारी आईकार्ड मांग रहे थे। ऐसे में कई मतदाता बिना मतदान किए ही वापस चले गए।
- बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो वोट डालने गए लेकिन लिस्ट से नाम गायब थे
- राजनगर एक्सटेंशन में नहीं बनाया गया कोई बूथ, दूरी की वजह से लोग नहीं गए वोट डालने
- पुलिस ने मोबाइल लेकर जाने वाले मतदाताओं को गेट पर ही रोक दिया। मोबाइल रखने की जगह भी नहीं बनाई गई थी। इससे पुलिस-मतदाताओं के बीच नोकझोंक भी हुई। कई मतदाता पर्ची फाड़ कर वापस लौट गए।
- दो दिन के लगातार अवकाश की वजह से बड़ी संख्या में लोगों ने पहले ही हॉली-डे प्लान बना लिया था।
- वर्किंग डे होने की वजह से सर्विस क्लास के लोग नहीं पहुंचे मतदान करने
गाजियाबाद एनसीआर में आता है, जहां सर्विस क्लास और मजदूर वर्ग के लोग ज्यादा हैं। सभी लोग बाहर से आकर यहां बसे हुए हैं। यहां का पता हासिल करने के लिए वे मतदाता जरूर बन जाते हैं लेकिन यहां से वे अपना लगाव नहीं बना पाते। यही वजह है कि यहां की राजनीति में लोगों की दिलचस्पी नहीं रहती।
दिल्ली के करीब होने से गाजियाबाद प्रभावित होता है। अधिकतर लोग दिल्ली, नोएडा में नौकरी करते हैं। प्राइवेट जॉब और मजदूरी करने वाले अधिकतर लोग वर्किंग डे होने की वजह से मतदान नहीं कर सके। मतदान यदि रविवार को होता तो मत प्रतिशत जरूर बढ़ता। - विद्यार्थी शिशौदिया, कार्मिक अधिकारी