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Ghaziabad News: दिल्ली की 50 कंपनियों ने किया था बोगस फर्म से गठजोड़
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गाजियाबाद। फर्जीवाड़ा कर कंपनी तैयार करने के बाद जीएसटी चोरी के मामले में दिल्ली की 50 कंपनियों के नाम सामने आए हैं। 9 जनवरी को 100 करोड़ रुपये फ्राॅड मामले में एसटीएफ ने दिल्ली के हरदीप समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उनके पास से बरामद मोबाइल से यह जानकारी पुलिस को मिली है। साथ ही इन फर्म को फर्जी इनवाइस देने वाली सैकड़ों अन्य फर्म के नाम भी मिले हैं। कविनगर थाने में दर्ज मामले में अब जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।
एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि इस मामले में दर्ज हुई प्राथमिकी के आधार पर संबंधित अधिकारियों के साथ एक बैठक की गई। इसमें उनसे केस के संबंध में सभी डिटेल मांगी गई है। इसमें अब तक सामने आई फर्म की पूरी लिस्ट देने के लिए कहा है। मामले में अन्य पहलुओं को भी देखा जा रहा है।
200 से करोड़ से अधिक के फ्रॉड का अंदेशा
पुलिस के मोबाइल को चेक करने पर सामने आया है कि आरोपियों की सांठगांठ कई फर्म के साथ है। मोबाइल में फर्म के साथ सैकड़ों इनवाइस मिले हैं। इसमें 13 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक की फर्जी इनवाइस हैं। ऐसे में अंदेशा है कि इस मामले में फ्राॅड की राशि 200 करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है। अब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई कर इन कंपनियों से जानकारी ली जाएगी। साथ ही सत्यापन के बाद इन फर्म पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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एसटीएफ के जीएसटी के बड़े मामलों में कार्रवाई के बाद प्रदेश में जीएसटी विभाग ने 350 से अधिक प्राथमिकी दर्ज कराई हैं। गाजियाबाद में दर्ज कराए गए कुछ मामलों में आरोपियों की माैत तक हो चुकी है।
सीजीएसटी इंस्पेक्टर से बातचीत के भी मिले सबूत
कार्रवाई के बाद इस मामले में दिल्ली में तैनात सीजीएसटी के इंस्पेक्टर को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने पद का गलत लाभ लेते हुए कार्रवाई के बाद बंद हुई हरदीप और उसके साथियों की फर्म को शुरू किया था। इनसे बाद में फर्जीवाड़ा किया गया। जानकारी के अनुसार जांच के दाैरान आरोपियों के मोबाइल पर इंस्पेक्टर के साथ हुई चैटिंग की जानकारी मिली है। इस मामले में विभाग को जानकारी दी गई है। साथ ही इंस्पेक्टर की मिलीभगत के संबंध में अन्य जानकारी ली जा रही है।
सीजीएसटी और एसजीएसटी में कर्मचारियों पर नजर
जीएसटी में हुए फर्जीवाड़े के बाद विभाग की नजर अपने ही कर्मचारियों पर है। यहां कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड करने के साथ-साथ कुछ कार्यक्षेत्र में बदलाव कर दिया गया है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई है। साथ ही हाल में सामने आई गड़बड़ी के मामले में उसकी फाइल से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य की समीक्षा भी की जा रही है।
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एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि इस मामले में दर्ज हुई प्राथमिकी के आधार पर संबंधित अधिकारियों के साथ एक बैठक की गई। इसमें उनसे केस के संबंध में सभी डिटेल मांगी गई है। इसमें अब तक सामने आई फर्म की पूरी लिस्ट देने के लिए कहा है। मामले में अन्य पहलुओं को भी देखा जा रहा है।
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200 से करोड़ से अधिक के फ्रॉड का अंदेशा
पुलिस के मोबाइल को चेक करने पर सामने आया है कि आरोपियों की सांठगांठ कई फर्म के साथ है। मोबाइल में फर्म के साथ सैकड़ों इनवाइस मिले हैं। इसमें 13 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक की फर्जी इनवाइस हैं। ऐसे में अंदेशा है कि इस मामले में फ्राॅड की राशि 200 करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है। अब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई कर इन कंपनियों से जानकारी ली जाएगी। साथ ही सत्यापन के बाद इन फर्म पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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एसटीएफ के जीएसटी के बड़े मामलों में कार्रवाई के बाद प्रदेश में जीएसटी विभाग ने 350 से अधिक प्राथमिकी दर्ज कराई हैं। गाजियाबाद में दर्ज कराए गए कुछ मामलों में आरोपियों की माैत तक हो चुकी है।
सीजीएसटी इंस्पेक्टर से बातचीत के भी मिले सबूत
कार्रवाई के बाद इस मामले में दिल्ली में तैनात सीजीएसटी के इंस्पेक्टर को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने पद का गलत लाभ लेते हुए कार्रवाई के बाद बंद हुई हरदीप और उसके साथियों की फर्म को शुरू किया था। इनसे बाद में फर्जीवाड़ा किया गया। जानकारी के अनुसार जांच के दाैरान आरोपियों के मोबाइल पर इंस्पेक्टर के साथ हुई चैटिंग की जानकारी मिली है। इस मामले में विभाग को जानकारी दी गई है। साथ ही इंस्पेक्टर की मिलीभगत के संबंध में अन्य जानकारी ली जा रही है।
सीजीएसटी और एसजीएसटी में कर्मचारियों पर नजर
जीएसटी में हुए फर्जीवाड़े के बाद विभाग की नजर अपने ही कर्मचारियों पर है। यहां कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड करने के साथ-साथ कुछ कार्यक्षेत्र में बदलाव कर दिया गया है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई है। साथ ही हाल में सामने आई गड़बड़ी के मामले में उसकी फाइल से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य की समीक्षा भी की जा रही है।