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Ghaziabad News: नामचीन कंपनी का अधिकारी बताकर ठगे 3.07 लाख
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गाजियाबाद। निर्माण सामग्री मंगाने के लिए नामचीन कंपनी का नंबर गूगल से सर्च करके निकालना वेवसिटी की रेनू को महंगा पड़ गया। आरोपी ने खुद को कंपनी का प्रबंधक बताकर माल भेजने का दावा किया और उनसे अपने खाते में 3.07 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। घटना 9 फरवरी की है। इसकी रिपोर्ट 10 दिन बाद 19 फरवरी को वेव सिटी थाने में दर्ज कराई गई है।
रेनू ने बताया कि उनको निर्माण सामग्री मंगवानी थी। इसलिए उन्होंने 9 फरवरी 2026 को गूगल से नंबर सर्च करके निकाला। जिस नंबर पर बात हुई उस पर बताया गया कि इस मामले में उनसे कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक संपर्क करेंगे। अगले दिन उनके पास फोन आया। बात करने वाले ने खुद को कंपनी का प्रबंधक बताते हुए उनको बाजार से सस्ती सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया। आरोपी ने उनसे तमाम बात करते हुए उनको बातों में उलझा लिया। उनको फर्जी बिल भी भेज दिया। इसके बाद उनको विश्वास हो गया। 24 घंटे में माल की डिलीवरी मिलने का वादा किया।
इसके बाद उन्होंने दिए गए खाते में 3.07 लाख रुपये भेज दिए, लेकिन 24 घंटे का समय बीतने के बाद भी उनको माल की डिलीवरी नहीं मिली। अगले दिन उन्होंने संपर्क करने का प्रयास किया तो उन नंबरों पर संपर्क नहीं हो सका। उन्होंने बिल पर लिखे पते की जानकारी की तो जानकारी हुई कि उस नाम का कोई ऑफिस नहीं है। न ही उस नाम की कोई कंपनी थी। सबकुछ फर्जी था। उनके साथ ठगी हुई है। इस बारे में एसीपी प्रियाश्री पाल ने बताया कि जांच कराई जा रही है। खातों में जमा रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा रही है।
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रेनू ने बताया कि उनको निर्माण सामग्री मंगवानी थी। इसलिए उन्होंने 9 फरवरी 2026 को गूगल से नंबर सर्च करके निकाला। जिस नंबर पर बात हुई उस पर बताया गया कि इस मामले में उनसे कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक संपर्क करेंगे। अगले दिन उनके पास फोन आया। बात करने वाले ने खुद को कंपनी का प्रबंधक बताते हुए उनको बाजार से सस्ती सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया। आरोपी ने उनसे तमाम बात करते हुए उनको बातों में उलझा लिया। उनको फर्जी बिल भी भेज दिया। इसके बाद उनको विश्वास हो गया। 24 घंटे में माल की डिलीवरी मिलने का वादा किया।
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इसके बाद उन्होंने दिए गए खाते में 3.07 लाख रुपये भेज दिए, लेकिन 24 घंटे का समय बीतने के बाद भी उनको माल की डिलीवरी नहीं मिली। अगले दिन उन्होंने संपर्क करने का प्रयास किया तो उन नंबरों पर संपर्क नहीं हो सका। उन्होंने बिल पर लिखे पते की जानकारी की तो जानकारी हुई कि उस नाम का कोई ऑफिस नहीं है। न ही उस नाम की कोई कंपनी थी। सबकुछ फर्जी था। उनके साथ ठगी हुई है। इस बारे में एसीपी प्रियाश्री पाल ने बताया कि जांच कराई जा रही है। खातों में जमा रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा रही है।
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