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स्कूल लाइव-Cordination

Thu, 18 Jan 2018 01:25 AM IST
Updated Thu, 18 Jan 2018 01:25 AM IST
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स्कूल लाइव-Cordination
स्कूल लाइव:
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सामाजिक संगठनों के सहारे चल रहे हैं सरकारी स्कूल
बच्चों के स्वेटर से लेकर बेंच तक एनजीओं ने किया है दान
स्कूल में नहीं है बच्चों के पानी पीने की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्षों से करोड़ों का बजट दिया जाता है लेकिन तब भी सरकारी स्कूलों की हालत में कोई सुधार नहीं है। आलम यह है कि नगरीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय तो सामाजिक संगठनों के दान पर चल रहे हैं। स्कूलों में ना तो बच्चों के लिए स्वच्छ पेय जल की व्यवस्था है ना ही स्वच्छता अभियान के चलाए जाने के बावजूद सफाई की व्यवस्था। कई स्कूलों में स्थिति ऐसी है कि सफाई के लिए अगर प्रधानाचार्य अपनी जेब से पैसा खर्च ना करें तो स्कूलों में झाड़ू भी न लगे। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने प्राइवेट और सरकारी स्कूलों का सर्वे कराया जिसमें सरकारी स्कूल तो उसके मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। बुधवार को अमर उजाला ने सरकारी स्कूलों की पड़ताल की।

गांधीनगर प्राथमिक विद्यालय (12.30 बजे दोपहर)
लंच ब्रेक में छात्र ने लंच तो किया लेकिन उनको पीने को पानी नहीं मिला। क्योंकि स्कूल में लगा हैंडपंप काफी दिन से खराब है। एनजीओ द्वारा लगाया गया मोटर भी फुंक गया था, वह ठीक नहीं हुआ। बच्चे पीने का पानी अपने घर से लाए थे।
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गांधीनगर उच्च प्राथमिक विद्यालय (12.32 बजे दोपहर)
लंच ब्रेक के दौरान छात्र प्रांगण में खेल रहे थे। कड़ाके की ठंड के बावजूद कई ऐसे छात्र-छात्राएं थीं, जिन्होंने स्वेटर तक नहीं पहना था। जिन बच्चों ने स्वेटर पहना था वह स्वेटर भी एक एनजीओ ने दान दिया था। हालांकि प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा अभी स्वेटर वितरण किए जाने का आश्वासन मिला है।
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नासिर पुर प्राथमिक विद्यालय (दोपहर दो बजे )
छुट्टी के बाद स्कूल प्रांगण में छात्र खेल रहे थे, जिसमें चारो तरफ झाड़ियां उगी हुई हैं और गंदगी का आलम है। इन रास्तों से गुजर कर बच्चे अपनी कक्षाओं में जाते हैं और इसी मैदान में खेलते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह स्कूल बेसिक शिक्षा विभाग के प्रांगण में ही स्थित है। जब शिक्षा विभाग के बगल के स्कूल का यह हाल है तो ग्रामीण अंचलों के स्कूलों के हाल का अंदाजा लगाया जा सकता है।


नासिरपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय (2.05)
स्कूल के प्रांगण में गंदगी की भरमार है, वहीं दूसरे प्रवेश द्वारा जहां खंड शिक्षा अधिकारी का ऑफिस भी है, वहीं कूड़े का ढेर लगा हुआ है। जगह-जगह गंदगी और कूड़ा फैला हुआ था।
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