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सेक्टरों और पशु मेले में सार्वजनिक शौचालयों की कमी
Updated Mon, 19 Nov 2018 01:28 AM IST
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सेक्टरों और पशु मेले में सार्वजनिक शौचालयों की कमी
गढ़मुक्तेश्वर। केंद्र सरकार द्वारा खुले में शौच की कुप्रथा पर अंकुश के लिए चलाई गई मुहिम का खादर मेले में पालन होता नहीं दिख रहा है। सेक्टरों समेत पशु मेले में अभी तक सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था नहीं की गई है। श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मेरठ, दिल्ली, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद सेक्टर समेत पशु मेले में अभी तक सार्वजनिक शौचालयों की अपेक्षित व्यवस्था नहीं की गई है। आसपास के जनपदों से मंगाए गए मोबाइल शौचालय भी सदर गेट के सामने मुख्य स्नानघाट के पास खड़े करा दिए गए हैं। जिला पंचायत ने महज साढ़े सौ शौचालय बनवाने की योजना तैयार की है। लेकिन उनमें भी अधिकांश वीआईपी कैंप, पुलिस, प्रशासन, जिला पंचायत अमला, व्यापारी, ठेकेदार और खास महमानों के तंबुओं में ही खप रहे हैं। मेले में आने वाले जन प्रतिनिधियों समेत सियासी पार्टियों के नेताओं के कैंपों भी जिला पंचायत को ही हैंडपंप से लेकर शौचालयों की व्यवस्था करनी पड़ती है। जिला पंचायत जेई आदेश कुमार का कहना है कि खुले में शौच की कुप्रथा रोकने को भीड़ वाले स्थानों पर करीब तीन सौ शीट वाले मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था कर ली गई है, जबकि कैंपों में तीन सौ से अधिक शौचालय लगवाए जा चुके हैं। इनकी संख्या बढ़ाकर साढ़े चार सौ तक किया जाना प्रस्तावित है। मेलाधिकारी ज्योति राय का कहना है कि खुले में शौच की कुप्रथा पर अंकुश के लिए चल रही मुहिम से कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। जिला पंचायत को मेले से जुड़े सभी सेक्टर और पशु मेले में अविलंब सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था पूरी कराने की कड़ी हिदायत दी गई है।
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गढ़मुक्तेश्वर। केंद्र सरकार द्वारा खुले में शौच की कुप्रथा पर अंकुश के लिए चलाई गई मुहिम का खादर मेले में पालन होता नहीं दिख रहा है। सेक्टरों समेत पशु मेले में अभी तक सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था नहीं की गई है। श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मेरठ, दिल्ली, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद सेक्टर समेत पशु मेले में अभी तक सार्वजनिक शौचालयों की अपेक्षित व्यवस्था नहीं की गई है। आसपास के जनपदों से मंगाए गए मोबाइल शौचालय भी सदर गेट के सामने मुख्य स्नानघाट के पास खड़े करा दिए गए हैं। जिला पंचायत ने महज साढ़े सौ शौचालय बनवाने की योजना तैयार की है। लेकिन उनमें भी अधिकांश वीआईपी कैंप, पुलिस, प्रशासन, जिला पंचायत अमला, व्यापारी, ठेकेदार और खास महमानों के तंबुओं में ही खप रहे हैं। मेले में आने वाले जन प्रतिनिधियों समेत सियासी पार्टियों के नेताओं के कैंपों भी जिला पंचायत को ही हैंडपंप से लेकर शौचालयों की व्यवस्था करनी पड़ती है। जिला पंचायत जेई आदेश कुमार का कहना है कि खुले में शौच की कुप्रथा रोकने को भीड़ वाले स्थानों पर करीब तीन सौ शीट वाले मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था कर ली गई है, जबकि कैंपों में तीन सौ से अधिक शौचालय लगवाए जा चुके हैं। इनकी संख्या बढ़ाकर साढ़े चार सौ तक किया जाना प्रस्तावित है। मेलाधिकारी ज्योति राय का कहना है कि खुले में शौच की कुप्रथा पर अंकुश के लिए चल रही मुहिम से कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। जिला पंचायत को मेले से जुड़े सभी सेक्टर और पशु मेले में अविलंब सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था पूरी कराने की कड़ी हिदायत दी गई है।
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