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कुते और बंदरों से लोग परेशान-Ghaziabad city
Updated Thu, 18 Jan 2018 01:22 AM IST
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कुत्ते-बंदरों के आतंक से परेशान हैं शहर के लोग
गाजियाबाद। कुत्तों और बंदरों के बढ़ते आतंक से शहर के लोग परेशान हैं। कालोेनियों में कुत्ते और बंदरों की वजह से कई लोग जान गवां चुके हैं। अब इनका आतंक इतना बढ़ गया है कि कई कालोनियों में दहशत की वजह से बच्चों ने घर से निकलना बंद कर दिया है। परिवार के बड़े लोग ही बच्चों को साथ लेकर चलते हैं।
मुरादनगर क्षेत्र में बंदर की वजह से एक पांच साल के बच्चे और एक नामचीन पहलवान जान गवां चुके हैं। बंदरों के हमले में वह छत से गिर गए थे, बाद में उनकी मौत हो गई। बावजूद इसके प्रशासन और नगर निगम अधिकारी कुत्तों और बंदरों के आतंक पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं। बुधवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने कई इलाकों का दौरा किया।
रेलवे स्टेशन पर बंदर दिखाते हैं हेकड़ी
गाजियाबाद जंक्शन पर बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ता जा रहा है कि स्टेशन पर आने वाले यात्री दहशत में रहते हैं। यहां बंदर हेकड़ी दिखाकर यात्रियों से खाने-पीने की चीजें छीन लेते हैं। बुधवार को भी रेलवे स्टेशन पर बने फुट ओवर ब्रिज से गुजरने वाले यात्री उछल कूद कर रहे बंदरों की वजह से सहम कर निकल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि यहां तो बंदरों का ही राज चलता है। उनके पास से यात्रियों के गुजरने पर वह गुस्सा होकर हमले की पोजीशन में आ जाते थे। प्लेटफार्म नंबर तीन पर एक बुजुर्ग महिला के हाथ से बंदर फल की थैली छीन ले गया। जीआरपी के एक जवान ने बताया कि बंदरों ने इस इलाके में जीना दूभर कर दिया है, लेकिन अंकुश लगाने की कोई योजना नहीं है।
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नसबंदी का दावा, कम नहीं हो रही कुत्तों की संख्या
नगर निगम ने आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए उनकी नसबंदी का कांट्रेक्ट एक फर्म को दे रखा है। एक डॉग की नसबंदी के लिए नगर निगम 500 रुपये का भुगतान करता है। हर साल लाखों रुपये इस अभियान पर खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके शहर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कालोनियों के लोगों का आरोप है कि कुत्तों की नसबंदी का यह अभियान सिर्फ कागजी है।
फोटो
मैं मैस में काम कर रहा था। इस दौरान बंदर ने हमला कर दिया। उसने मेरे कपड़े फाड़ डाले। जाने कब इनसे छुटकारा मिलेगा। - शिशुपाल सिंह
बंदरों से जीना दूभर कर दिया है। नेता वोट लेने के लिए आते समय तो बंदरों से निजात दिलाने की बात करते हैं। अब कोई इधर नहीं आता है। - विनोद कुमार
बंदरों की वजह से बच्चों का घरों से निकलना मुश्किल है। हम तो दुकान से भी बच्चे को सामान लेने नहीं भेजते है। डर यह लगता है कि कहीं बंदर हमला न कर दे। - हरीश कुमार
कुत्तों की नसबंदी कराई जा रही है। इसकी समीक्षा की जाएगी कि शहर में कुत्तों की संख्या नियंत्रित हुई है या नहीं। फर्म के पदाधिकारियों से वार्ता की जाएगी। बंदरों को पकड़वाने के लिए पहले वन विभाग से अनुमति लेनी होगी। प्रक्रिया पूरी कर बंदरों को पकड़वाया जाएगा। - चंद्रप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त
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गाजियाबाद। कुत्तों और बंदरों के बढ़ते आतंक से शहर के लोग परेशान हैं। कालोेनियों में कुत्ते और बंदरों की वजह से कई लोग जान गवां चुके हैं। अब इनका आतंक इतना बढ़ गया है कि कई कालोनियों में दहशत की वजह से बच्चों ने घर से निकलना बंद कर दिया है। परिवार के बड़े लोग ही बच्चों को साथ लेकर चलते हैं।
मुरादनगर क्षेत्र में बंदर की वजह से एक पांच साल के बच्चे और एक नामचीन पहलवान जान गवां चुके हैं। बंदरों के हमले में वह छत से गिर गए थे, बाद में उनकी मौत हो गई। बावजूद इसके प्रशासन और नगर निगम अधिकारी कुत्तों और बंदरों के आतंक पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं। बुधवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने कई इलाकों का दौरा किया।
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रेलवे स्टेशन पर बंदर दिखाते हैं हेकड़ी
गाजियाबाद जंक्शन पर बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ता जा रहा है कि स्टेशन पर आने वाले यात्री दहशत में रहते हैं। यहां बंदर हेकड़ी दिखाकर यात्रियों से खाने-पीने की चीजें छीन लेते हैं। बुधवार को भी रेलवे स्टेशन पर बने फुट ओवर ब्रिज से गुजरने वाले यात्री उछल कूद कर रहे बंदरों की वजह से सहम कर निकल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि यहां तो बंदरों का ही राज चलता है। उनके पास से यात्रियों के गुजरने पर वह गुस्सा होकर हमले की पोजीशन में आ जाते थे। प्लेटफार्म नंबर तीन पर एक बुजुर्ग महिला के हाथ से बंदर फल की थैली छीन ले गया। जीआरपी के एक जवान ने बताया कि बंदरों ने इस इलाके में जीना दूभर कर दिया है, लेकिन अंकुश लगाने की कोई योजना नहीं है।
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नसबंदी का दावा, कम नहीं हो रही कुत्तों की संख्या
नगर निगम ने आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए उनकी नसबंदी का कांट्रेक्ट एक फर्म को दे रखा है। एक डॉग की नसबंदी के लिए नगर निगम 500 रुपये का भुगतान करता है। हर साल लाखों रुपये इस अभियान पर खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके शहर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कालोनियों के लोगों का आरोप है कि कुत्तों की नसबंदी का यह अभियान सिर्फ कागजी है।
फोटो
मैं मैस में काम कर रहा था। इस दौरान बंदर ने हमला कर दिया। उसने मेरे कपड़े फाड़ डाले। जाने कब इनसे छुटकारा मिलेगा। - शिशुपाल सिंह
बंदरों से जीना दूभर कर दिया है। नेता वोट लेने के लिए आते समय तो बंदरों से निजात दिलाने की बात करते हैं। अब कोई इधर नहीं आता है। - विनोद कुमार
बंदरों की वजह से बच्चों का घरों से निकलना मुश्किल है। हम तो दुकान से भी बच्चे को सामान लेने नहीं भेजते है। डर यह लगता है कि कहीं बंदर हमला न कर दे। - हरीश कुमार
कुत्तों की नसबंदी कराई जा रही है। इसकी समीक्षा की जाएगी कि शहर में कुत्तों की संख्या नियंत्रित हुई है या नहीं। फर्म के पदाधिकारियों से वार्ता की जाएगी। बंदरों को पकड़वाने के लिए पहले वन विभाग से अनुमति लेनी होगी। प्रक्रिया पूरी कर बंदरों को पकड़वाया जाएगा। - चंद्रप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त