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प्रतिबंधित वाहन 1.23 लाख, सीज किए सिर्फ दो
Updated Wed, 31 Oct 2018 05:28 PM IST
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प्रतिबंधित वाहन 1.23 लाख, सीज किए सिर्फ दो
गाजियाबाद। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल के वाहनों को सीज किया जाना था। पहले दिन चले अभियान में सिर्फ दो वाहन सीज किए। जबकि उक्त श्रेणी में 1.23 लाख वाहन आते हैं। अभियान के सड़कों पर एक-दो अधिकारी ही उतरे। वह खानापूर्ति करके लौट गए। जबकि सड़कों पर प्रतिबंधित श्रेणी के वाहन फर्राटा भरते रहे। यह हालत तो तब है जब गाजियाबाद जिला देश में प्रदूषण के मामले में नंबर वन बन चुका है। रेड जोन में लगातार शामिल हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि दिल्ली और एनसीआर में तत्काल रूप से 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल के वाहनों को सीज किया जाए। एक बार पहले भी यह आदेश जारी किया जा चुका है। यह वाहन सड़कों पर नहीं दौड़ने चाहिए। 30 अक्तूबर इसकी तिथि भी निर्धारित कर दी गई। विभागीय अधिकारी अभियान चलाकर ऐसे वाहनों को सीज करेंगे, जिससे एक भी पुराना वाहन सड़कों पर दिखाई नहीं देना चाहिए। क्षेत्रीय परिवहन विभाग के आंकड़ों में जिले के अंदर एक लाख 23 हजार 195 वाहन डीजल और पेट्रोल के पंजीकृत हैं। यह सभी वाहन 10 और 15 वर्ष पुराने हैं। मंगलवार से इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए परिवहन विभाग को अभियान चलाकर जब्त करना था, लेकिन एक दो अधिकारियों को छोड़कर किसी भी अधिकारी ने अभियान नहीं चलाया। अधिकतर अधिकारी कार्यालय में बैठे रहे या अन्य कार्यों में व्यस्त रहे। मंगलवार को केवल दो वाहन सीज किए गए। ये वाहन मुजफ्फरनगर जिले के थे।
सड़कों पर दौड़ रहे प्रतिबंधित वाहन
शहर की सड़कों पर ऐसे वाहन वायु प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। कागजों में ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद हो गया है और इनका इंश्योरेंस भी नहीं किया जा रहा है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण पुराने वाहन सड़कों से नहीं हटे हैं।
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प्रदूषण के नाम पर नहीं हो रही कार्रवाई
परिवहन विभाग वाहनों पर कार्रवाई के मामले में हेलमेट न लगाने और सीट बेल्ट न बांधने तक सीमित है। प्रदूषण के नाम पर कार्रवाई शून्य ही है। अधिकारी प्रदूषण पर कार्रवाई को लेकर बचते रहे हैं।
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गाजियाबाद। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल के वाहनों को सीज किया जाना था। पहले दिन चले अभियान में सिर्फ दो वाहन सीज किए। जबकि उक्त श्रेणी में 1.23 लाख वाहन आते हैं। अभियान के सड़कों पर एक-दो अधिकारी ही उतरे। वह खानापूर्ति करके लौट गए। जबकि सड़कों पर प्रतिबंधित श्रेणी के वाहन फर्राटा भरते रहे। यह हालत तो तब है जब गाजियाबाद जिला देश में प्रदूषण के मामले में नंबर वन बन चुका है। रेड जोन में लगातार शामिल हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि दिल्ली और एनसीआर में तत्काल रूप से 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल के वाहनों को सीज किया जाए। एक बार पहले भी यह आदेश जारी किया जा चुका है। यह वाहन सड़कों पर नहीं दौड़ने चाहिए। 30 अक्तूबर इसकी तिथि भी निर्धारित कर दी गई। विभागीय अधिकारी अभियान चलाकर ऐसे वाहनों को सीज करेंगे, जिससे एक भी पुराना वाहन सड़कों पर दिखाई नहीं देना चाहिए। क्षेत्रीय परिवहन विभाग के आंकड़ों में जिले के अंदर एक लाख 23 हजार 195 वाहन डीजल और पेट्रोल के पंजीकृत हैं। यह सभी वाहन 10 और 15 वर्ष पुराने हैं। मंगलवार से इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए परिवहन विभाग को अभियान चलाकर जब्त करना था, लेकिन एक दो अधिकारियों को छोड़कर किसी भी अधिकारी ने अभियान नहीं चलाया। अधिकतर अधिकारी कार्यालय में बैठे रहे या अन्य कार्यों में व्यस्त रहे। मंगलवार को केवल दो वाहन सीज किए गए। ये वाहन मुजफ्फरनगर जिले के थे।
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सड़कों पर दौड़ रहे प्रतिबंधित वाहन
शहर की सड़कों पर ऐसे वाहन वायु प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। कागजों में ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद हो गया है और इनका इंश्योरेंस भी नहीं किया जा रहा है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण पुराने वाहन सड़कों से नहीं हटे हैं।
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प्रदूषण के नाम पर नहीं हो रही कार्रवाई
परिवहन विभाग वाहनों पर कार्रवाई के मामले में हेलमेट न लगाने और सीट बेल्ट न बांधने तक सीमित है। प्रदूषण के नाम पर कार्रवाई शून्य ही है। अधिकारी प्रदूषण पर कार्रवाई को लेकर बचते रहे हैं।