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गठबंधन के प्रत्याशी बोले, अभी किसी पार्टी का नहीं सदस्य
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गठबंधन के प्रत्याशी बोले, अभी किसी पार्टी का नहीं सदस्य
गाजियाबाद। लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन की बड़ी हार के चलते सपा और बसपा के बीच हुआ समझौता टूट गया है। ऐसे में गाजियाबाद से सपा-बसपा और रालोद के संयुक्त प्रत्याशी और बसपा के पूर्व विधायक सुरेश बंसल ने चुनाव से पहले कहा था कि वह भले ही सपा की टिकट से चुनाव लड़ रहे हो, लेकिन वह बसपा के सच्चे सिपाही हैं। वहीं, गठबंधन टूटने के बाद अब बंसल के बोल बदल गए हैं। उनका कहना है कि वह फिलहाल दोनों में से किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं।
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले माना जा रहा था सपा और बसपा के गठबंधन के बाद गाजियाबाद लोकसभा की सीट बसपा के खाते में जा सकती है, लेकिन चुनाव से करीब एक महीने पहले संयुक्त घोषणा हुई कि गाजियाबाद सीट समाजवादी पार्टी के खाते में रहेगी। इसके बाद चुनाव से पहले सपा ने अपने जिलाध्यक्ष रहे और ब्राह्मण चेहरे सुरेंद्र मुन्नी पर दांव लगाते हुए उन्हें गठबंधन का प्रत्याशी घोषित किया। वहीं जैसे ही कांग्रेस ने भी इस सीट पर ब्राह्मण चेहरे के रूप में डॉली शर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित किया तो सपा ने दो दिनों बाद ही अपना प्रत्याशी बदल लिया। सपा ने इस सीट पर बसपा की ओर से पूर्व में शहर विधायक रहे सुरेश बंसल पर दांव खेला। टिकट मिलने के बाद बंसल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह भले ही सपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हों, लेकिन वह आज भी बसपा के सच्चे सिपाही हैं। ऐसे में अब सपा-बसपा का गठबंधन टूटने के बाद सुरेश बंसल असमंजस में हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह फिलहाल किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं। उन्हें किस पार्टी में रहना है इसको लेकर वह अपने परिवार और निजी लोगों के साथ बैठक करेंगे, जिसके बाद तय करेंगे कि वह भविष्य में अब किस पार्टी के साथ रहेंगे।
वोट नहीं हुए ट्रांसफर
लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी सुरेश बंसल चुनाव से चुनाव से ठीक पहले सपा में शामिल हो गए। माना जा रहा है कि बसपा का परंपरागत वोट उन्हें ट्रांसफर नहीं हुआ। दिनागढ़ी, प्राणगढ़ी, आंबेडकर नगर समेत कई कॉलोनियों में उन्हें काफी कम वोट मिले।
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गाजियाबाद। लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन की बड़ी हार के चलते सपा और बसपा के बीच हुआ समझौता टूट गया है। ऐसे में गाजियाबाद से सपा-बसपा और रालोद के संयुक्त प्रत्याशी और बसपा के पूर्व विधायक सुरेश बंसल ने चुनाव से पहले कहा था कि वह भले ही सपा की टिकट से चुनाव लड़ रहे हो, लेकिन वह बसपा के सच्चे सिपाही हैं। वहीं, गठबंधन टूटने के बाद अब बंसल के बोल बदल गए हैं। उनका कहना है कि वह फिलहाल दोनों में से किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं।
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले माना जा रहा था सपा और बसपा के गठबंधन के बाद गाजियाबाद लोकसभा की सीट बसपा के खाते में जा सकती है, लेकिन चुनाव से करीब एक महीने पहले संयुक्त घोषणा हुई कि गाजियाबाद सीट समाजवादी पार्टी के खाते में रहेगी। इसके बाद चुनाव से पहले सपा ने अपने जिलाध्यक्ष रहे और ब्राह्मण चेहरे सुरेंद्र मुन्नी पर दांव लगाते हुए उन्हें गठबंधन का प्रत्याशी घोषित किया। वहीं जैसे ही कांग्रेस ने भी इस सीट पर ब्राह्मण चेहरे के रूप में डॉली शर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित किया तो सपा ने दो दिनों बाद ही अपना प्रत्याशी बदल लिया। सपा ने इस सीट पर बसपा की ओर से पूर्व में शहर विधायक रहे सुरेश बंसल पर दांव खेला। टिकट मिलने के बाद बंसल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह भले ही सपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हों, लेकिन वह आज भी बसपा के सच्चे सिपाही हैं। ऐसे में अब सपा-बसपा का गठबंधन टूटने के बाद सुरेश बंसल असमंजस में हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह फिलहाल किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं। उन्हें किस पार्टी में रहना है इसको लेकर वह अपने परिवार और निजी लोगों के साथ बैठक करेंगे, जिसके बाद तय करेंगे कि वह भविष्य में अब किस पार्टी के साथ रहेंगे।
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वोट नहीं हुए ट्रांसफर
लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी सुरेश बंसल चुनाव से चुनाव से ठीक पहले सपा में शामिल हो गए। माना जा रहा है कि बसपा का परंपरागत वोट उन्हें ट्रांसफर नहीं हुआ। दिनागढ़ी, प्राणगढ़ी, आंबेडकर नगर समेत कई कॉलोनियों में उन्हें काफी कम वोट मिले।
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