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यूपी की पहली कथककली मेकअप आर्टिस्ट बनी दिपाली
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यूपी की पहली कथककली मेकअप आर्टिस्ट बनीं दिपाली
साहिबाबाद। कुछ अलग करने की चाहत थी, तभी इंदिरापुरम निवासी दिपाली सिंहा विज्ञान की स्टूडेंट होते हुए भी कला के क्षेत्र में अपना नाम कमा रही हैं। कुछ क्रिएटिव करने की चाहत रखने वाली दिपाली ने विज्ञान की बजाय कला को अपने लिए बेहतर समझा। यह दिपाली की मेहनत व लगन ही है कि हाल ही में ब्रिजभूमि फाउंडेशन की ओर से किए गए सर्वेक्षण में उन्हें 51 प्रतिभाशाली महिलाओं में शामिल कर कला और साहित्य के क्षेत्र में उन्हें नवाजा गया है।
दीपाली सिंहा कथकली मेकअप के क्षेत्र का जाना माना नाम हैं। उनको कथककली मेकअप के तारतम्य में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उत्तर भारत में इस कला को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कुछ साल पहले ‘शुभदीप’ नामक स्कॉलरशिप भी प्रारंभ की है। एमएससी व एमसीए करने के बाद भी दिपाली अपने काम से संतुष्ट नहीं थीं। हर पल कुछ किएटिव करने की सोच से ही उन्होंने दक्षिण भारतीय अंदाज में मेकअप सीखने का निर्णय लिया।
दिपाली बताती हैं कि यूपी की वह पहली महिला हैं जो कथककली मेकअप करती हैं। उत्तर भारतीय होने के बाद भी उन्हें इस कला से बेहद लगाव है। यह रुझान ही था, जिसकी वजह से उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा और वर्तमान में विभिन्न बड़े कार्यक्रमों में कथकली कलाकारों का मेकअप करती हैं। वह कहती हैं कि इस अनोखी और विलुप्त होती कला को जीवंत बनाने में वह हर संभव प्रयास कर रही हैं और अन्य लोगों को भी इससे जोड़ रही हैं। इसके लिए दिपाली को पांच बार अलग-अलग सम्मान से नवाजा जा चुका है। 2015 में दिपाली को ‘बेस्ट चुट्टी’ के सम्मान से नवाजा गया और उसी दौरान स्कालरशिप भी दी गई। दिपाली कला से तो जुड़ी हुई हैं ही इसके साथ ही गरीबों की भी मदद करती हैं।
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साहिबाबाद। कुछ अलग करने की चाहत थी, तभी इंदिरापुरम निवासी दिपाली सिंहा विज्ञान की स्टूडेंट होते हुए भी कला के क्षेत्र में अपना नाम कमा रही हैं। कुछ क्रिएटिव करने की चाहत रखने वाली दिपाली ने विज्ञान की बजाय कला को अपने लिए बेहतर समझा। यह दिपाली की मेहनत व लगन ही है कि हाल ही में ब्रिजभूमि फाउंडेशन की ओर से किए गए सर्वेक्षण में उन्हें 51 प्रतिभाशाली महिलाओं में शामिल कर कला और साहित्य के क्षेत्र में उन्हें नवाजा गया है।
दीपाली सिंहा कथकली मेकअप के क्षेत्र का जाना माना नाम हैं। उनको कथककली मेकअप के तारतम्य में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उत्तर भारत में इस कला को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कुछ साल पहले ‘शुभदीप’ नामक स्कॉलरशिप भी प्रारंभ की है। एमएससी व एमसीए करने के बाद भी दिपाली अपने काम से संतुष्ट नहीं थीं। हर पल कुछ किएटिव करने की सोच से ही उन्होंने दक्षिण भारतीय अंदाज में मेकअप सीखने का निर्णय लिया।
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दिपाली बताती हैं कि यूपी की वह पहली महिला हैं जो कथककली मेकअप करती हैं। उत्तर भारतीय होने के बाद भी उन्हें इस कला से बेहद लगाव है। यह रुझान ही था, जिसकी वजह से उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा और वर्तमान में विभिन्न बड़े कार्यक्रमों में कथकली कलाकारों का मेकअप करती हैं। वह कहती हैं कि इस अनोखी और विलुप्त होती कला को जीवंत बनाने में वह हर संभव प्रयास कर रही हैं और अन्य लोगों को भी इससे जोड़ रही हैं। इसके लिए दिपाली को पांच बार अलग-अलग सम्मान से नवाजा जा चुका है। 2015 में दिपाली को ‘बेस्ट चुट्टी’ के सम्मान से नवाजा गया और उसी दौरान स्कालरशिप भी दी गई। दिपाली कला से तो जुड़ी हुई हैं ही इसके साथ ही गरीबों की भी मदद करती हैं।
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