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हर्बल रंगों से कलफुल बनाएं होली
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हर्बल रंगों से कलरफुल बनाएं होली
हापुड़। रंगों के पर्व को रंगीन बनाने की तैयारी में जुटे लोग जरा सतर्क हो जाएं। पर्व पर हुई छोटी सी भूल कहीं होली के रंगों को बेरंग न कर दें। बाजार में बिक रहे 90 प्रतिशत रंग त्वचा के लिए हानिकारक हैं। केमिकल मिले रंग आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में हर्बल रंगों से अपनी होली को कलरफुल बनाने में ही समझदारी है।
महंगे हैं हर्बल रंग
साधारण रंगों के मुकाबले हर्बल रंग और गुलाल बाजार में महंगे दामों पर बिक रहे हैं। कलर जहां 60 से 100 रुपये किलो के भाव बिक रहे हैं वहीं हर्बल रंगों की कीमतें 250 से 300 रुपये प्रति किलो हैं। वहीं साधारण गुलाल बाजार में दस रुपये से लेकर 50 रुपये किलो बिक रहा है।
ट्यूब कलर की भरमार
इन दिनों बाजार में ट्यूब कलर की भरमार है। हरे, नीले, लाल आदि रंगों के ट्यूब तो बाजार में छाए हुए हैं ही, सिल्वर और गोल्डन ट्यूब की भी काफी डिमांड है। थोक के भाव में ट्यूब का पूरा बॉक्स 7 रुपये से लेकर 50 रुपये तक में उपलब्ध है।
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घरों में ही बना सकते हैं रंग और गुलाल
प्रकृति ने हमें रंगों का अनमोल उपहार दिया है। इस लिए अच्छा है कि बाजार में उपलब्ध जहरीले रंग गुलालों से बचने के लिए घर में ही रंग और गुलाल बना लें क्योंकि बाजार में उपलब्ध रंग गुलाल न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
इस तरह घर में तैयार करें रंग
* केसरी रंग - सेमल का फूल को उबालकर, चंदन के पाउडर को पानी में घोलकर
* भूरा रंग - कत्था को उबालकर
*लाल रंग - बुरांस के फूल को उबालकर और रात भर ठंडा करने के बाद
*पीला रंग - गेंदा का फूल उबालने से
* हरा रंग - गुलमोहर की पत्ती को सुखाकर पीसे
रंगों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल
* हरा - कॉपर सल्फेट- एलर्जी, आंशिक अंधापन की आशंका
*जामुनी - क्रोमियम आयोडाइड- अस्थामा
*सिल्वर - एल्युमिनियम ब्रोमाइड- कैंसर
*काला - लेड आक्साइड- यूरिनल सिस्टम पर इफोक्ट
*लाल - मर्करी सल्फाइड - त्वचा का कैंसर, दिमागी असंतुलन
* चमकीला पिसा हुआ कांच आंख में जाने पर नुकसान
तैयारी के साथ खेंले होली
* होली खेलने से पहले शरीर पर सरसों, नारियल तेल, ऑलिव ऑयल या बेबी आयॅल अच्छी तरह से लगाए, कानों के अंदर और पीछे, सिर और उंगलियों पर तेल लगाएं।
* रंग शरीर के अंदर न घुसे इसके लिए पूरे हाथ और पैर ढके हुए कपड़े पहनें।
* होली खेलने से पहले नाखूनों को काट लें।
* होली खेलने के बाद रंगों को उतारने के लिए हार्ड साबुन, डिटरजेंट या शैंपू की बजाय बेसन, दही आदि का इस्तेमाल करें।
* गुब्बारों से रंग भरकर किसी को न मारे इससे आंखों के रेटीना को नुकसान पहुंच सकता है।
चिकित्सक का कथन
चर्म रोग विशेषज्ञ डा. अमरजीत सिंह कहते हैं कि होली पर आर्टिफिशियल रंगों के प्रयोग से एलर्जी जैसी समस्या होने का काफी खतरा रहता है। रंगों से चेहरे पर दाने निकल आते हैं, जिसमें जलन और खुजली बनी रहती है। इस लिए होली खेलते समय पूरी सावधानी बरतते हुए अच्छी क्वालिटी के हर्बल रंग और गुलाल का इस्तेमाल करना चाहिए।
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हापुड़। रंगों के पर्व को रंगीन बनाने की तैयारी में जुटे लोग जरा सतर्क हो जाएं। पर्व पर हुई छोटी सी भूल कहीं होली के रंगों को बेरंग न कर दें। बाजार में बिक रहे 90 प्रतिशत रंग त्वचा के लिए हानिकारक हैं। केमिकल मिले रंग आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में हर्बल रंगों से अपनी होली को कलरफुल बनाने में ही समझदारी है।
महंगे हैं हर्बल रंग
साधारण रंगों के मुकाबले हर्बल रंग और गुलाल बाजार में महंगे दामों पर बिक रहे हैं। कलर जहां 60 से 100 रुपये किलो के भाव बिक रहे हैं वहीं हर्बल रंगों की कीमतें 250 से 300 रुपये प्रति किलो हैं। वहीं साधारण गुलाल बाजार में दस रुपये से लेकर 50 रुपये किलो बिक रहा है।
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ट्यूब कलर की भरमार
इन दिनों बाजार में ट्यूब कलर की भरमार है। हरे, नीले, लाल आदि रंगों के ट्यूब तो बाजार में छाए हुए हैं ही, सिल्वर और गोल्डन ट्यूब की भी काफी डिमांड है। थोक के भाव में ट्यूब का पूरा बॉक्स 7 रुपये से लेकर 50 रुपये तक में उपलब्ध है।
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घरों में ही बना सकते हैं रंग और गुलाल
प्रकृति ने हमें रंगों का अनमोल उपहार दिया है। इस लिए अच्छा है कि बाजार में उपलब्ध जहरीले रंग गुलालों से बचने के लिए घर में ही रंग और गुलाल बना लें क्योंकि बाजार में उपलब्ध रंग गुलाल न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
इस तरह घर में तैयार करें रंग
* केसरी रंग - सेमल का फूल को उबालकर, चंदन के पाउडर को पानी में घोलकर
* भूरा रंग - कत्था को उबालकर
*लाल रंग - बुरांस के फूल को उबालकर और रात भर ठंडा करने के बाद
*पीला रंग - गेंदा का फूल उबालने से
* हरा रंग - गुलमोहर की पत्ती को सुखाकर पीसे
रंगों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल
* हरा - कॉपर सल्फेट- एलर्जी, आंशिक अंधापन की आशंका
*जामुनी - क्रोमियम आयोडाइड- अस्थामा
*सिल्वर - एल्युमिनियम ब्रोमाइड- कैंसर
*काला - लेड आक्साइड- यूरिनल सिस्टम पर इफोक्ट
*लाल - मर्करी सल्फाइड - त्वचा का कैंसर, दिमागी असंतुलन
* चमकीला पिसा हुआ कांच आंख में जाने पर नुकसान
तैयारी के साथ खेंले होली
* होली खेलने से पहले शरीर पर सरसों, नारियल तेल, ऑलिव ऑयल या बेबी आयॅल अच्छी तरह से लगाए, कानों के अंदर और पीछे, सिर और उंगलियों पर तेल लगाएं।
* रंग शरीर के अंदर न घुसे इसके लिए पूरे हाथ और पैर ढके हुए कपड़े पहनें।
* होली खेलने से पहले नाखूनों को काट लें।
* होली खेलने के बाद रंगों को उतारने के लिए हार्ड साबुन, डिटरजेंट या शैंपू की बजाय बेसन, दही आदि का इस्तेमाल करें।
* गुब्बारों से रंग भरकर किसी को न मारे इससे आंखों के रेटीना को नुकसान पहुंच सकता है।
चिकित्सक का कथन
चर्म रोग विशेषज्ञ डा. अमरजीत सिंह कहते हैं कि होली पर आर्टिफिशियल रंगों के प्रयोग से एलर्जी जैसी समस्या होने का काफी खतरा रहता है। रंगों से चेहरे पर दाने निकल आते हैं, जिसमें जलन और खुजली बनी रहती है। इस लिए होली खेलते समय पूरी सावधानी बरतते हुए अच्छी क्वालिटी के हर्बल रंग और गुलाल का इस्तेमाल करना चाहिए।