{"_id":"5ba9469b867a557f67734be9","slug":"141537820315-ghaziabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जाम से निजात को मांगा 200 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जाम से निजात को मांगा 200 करोड़
Updated Tue, 25 Sep 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
जाम से निजात के लिए मांगे 200 करोड़ रुपये
गाजियाबाद। जाम की विकराल स्थिति को देखते हुए सोमवार को जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया। जिलाधिकारी ने जाम से निजात दिलाने के लिए वैकल्पिक मार्गों को तत्काल इस्तेमाल करने का निर्देश दिया तो सुबह और शाम के ट्रायल के बाद नया रूट डायवर्जन प्लान लागू कर दिया गया है। उधर, डीएम ने जाम की स्थिति को लेकर मुख्य सचिव से वार्ता की और दिल्ली-मेरठ रोड को छह लेन किए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बिना सड़क चौड़ीकरण के जाम से निजात नहीं मिल सकती, जिसके लिए 200 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। उधर, मुख्यसचिव के निर्देश पर दोबारा से प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
दिल्ली-मेरठ रोड के चौड़ीकरण को लेकर लंबे समय से प्रयास चल रहा है। जनवरी में जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने जीडीए, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई व वन विभाग की टीम से सर्वे कराया था, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता बताते हुए 200 करोड़ रुपये की मांग की थी। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर धनराशि की मांग की थी, लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली। अब रविवार दोपहर से सोमवार सुबह करीब तीन बजे तक के भीषण जाम के बाद प्रशासन ने नए सिरे से शासन के सामने मामले को रखा। प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण के पीछे तमाम तर्क रखे हैं।
दो लाख से अधिक वाहनों का दबाव प्रतिदिन
शासन को बताया गया है कि दिल्ली-मेरठ रोड सीधे उत्तराखंड के साथ पश्चिमी यूपी में बिजनौर तक को जोड़ती है। लोनी, बागपत व बड़ौत से सहारनपुर होते हुए देहरादून जाने वाले मार्ग की हालत खराब है। उधर, दिल्ली-गाजियाबाद से मेरठ की तरफ जाने वाले लोग हापुड़ के रास्ते भी नहीं जा रहे हैं। क्योंकि एनएच-9 के साथ हापुड़ से मेरठ तक हाइवे का निर्माण कार्य चल रहा है। इन सब परिस्थितियों के बीच दिल्ली-मेरठ रोड पर प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख वाहनों का दबाव है, जिनकी संख्या सप्ताह के आखिरी दिनों और छुट्टियों के अवसर पर बढ़ जाती है।
विज्ञापन
2024 तक चलेगा रैपिड का काम
जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट स्पष्ट किया है कि दिल्ली-मेरठ रोड पर आरआरटीएस द्वारा रैपिड ट्रेन से जुड़े रूट का निर्माण किया जाना है, जिसका काम वर्ष 2024 तक चलेगा। इसके चलते आने वाले दिनों में सड़क पर चलना और बदतर हो जाएगा। आरआरटीएस सड़क चौड़ी करेगा, लेकिन उसके बाद भी वाहनों के लिए उतनी ही जगह मिलेगी, जो मौजूदा स्थिति में है। क्योंकि कांट्रेक्ट की शर्तों में उतनी ही चौड़ी रोड तैयार करके देने का प्रावधान है। उधर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण (़डासना-मेरठ) का काम पूरा होने में लंबा वक्त लगेगा। ऐसे में दिल्ली-मेरठ रोड को चार की जगह छह लेन किया जाना जरूरी है।
एनसीआरटीसी के साथ बैठक इसी सप्ताह
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर साइड बैरियर लगाकर काम बीच में छोड़ने पर भी प्रशासन गंभीर है। सोमवार को प्रशासन की तरफ से नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के अधिकारियों से बात की गई। उन्हें कहा गया कि वो दुहाई के आसपास सड़क चौड़ीकरण का काम तत्काल पूरा करें। अगर चौड़ीकरण में देरी हो रही है, तो फिर साइड बैरियर को हटा दें, जिससे वाहनों को पूरी सड़क मिल सके। उधर, प्रशासन ने इसी मुद्दे को लेकर सप्ताह के अंत में एनसीआरटीसी के अधिकारियों के साथ बैठक भी बुलाई है।
वर्जन
मौजूदा स्थिति को देखते हुए नया डायवर्जन प्लान लागूू कराया गया है। शुरुआत में ट्रायल के तौर पर नौ घंटे का डायवर्जन किया गया है। इसी बीच जाम की स्थिति को लेकर शासन को अवगत कराया है। साथ ही मुुख्यसचिव को प्रस्ताव भेजकर 200 करोड़ रुपये की मांग की है, जिससे दिल्ली-मेरठ रोड को छह लेन किया जा सके। - रितु माहेश्वरी, जिलाधिकारी
विज्ञापन
गाजियाबाद। जाम की विकराल स्थिति को देखते हुए सोमवार को जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया। जिलाधिकारी ने जाम से निजात दिलाने के लिए वैकल्पिक मार्गों को तत्काल इस्तेमाल करने का निर्देश दिया तो सुबह और शाम के ट्रायल के बाद नया रूट डायवर्जन प्लान लागू कर दिया गया है। उधर, डीएम ने जाम की स्थिति को लेकर मुख्य सचिव से वार्ता की और दिल्ली-मेरठ रोड को छह लेन किए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बिना सड़क चौड़ीकरण के जाम से निजात नहीं मिल सकती, जिसके लिए 200 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। उधर, मुख्यसचिव के निर्देश पर दोबारा से प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
दिल्ली-मेरठ रोड के चौड़ीकरण को लेकर लंबे समय से प्रयास चल रहा है। जनवरी में जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने जीडीए, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई व वन विभाग की टीम से सर्वे कराया था, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता बताते हुए 200 करोड़ रुपये की मांग की थी। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर धनराशि की मांग की थी, लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली। अब रविवार दोपहर से सोमवार सुबह करीब तीन बजे तक के भीषण जाम के बाद प्रशासन ने नए सिरे से शासन के सामने मामले को रखा। प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण के पीछे तमाम तर्क रखे हैं।
विज्ञापन
दो लाख से अधिक वाहनों का दबाव प्रतिदिन
शासन को बताया गया है कि दिल्ली-मेरठ रोड सीधे उत्तराखंड के साथ पश्चिमी यूपी में बिजनौर तक को जोड़ती है। लोनी, बागपत व बड़ौत से सहारनपुर होते हुए देहरादून जाने वाले मार्ग की हालत खराब है। उधर, दिल्ली-गाजियाबाद से मेरठ की तरफ जाने वाले लोग हापुड़ के रास्ते भी नहीं जा रहे हैं। क्योंकि एनएच-9 के साथ हापुड़ से मेरठ तक हाइवे का निर्माण कार्य चल रहा है। इन सब परिस्थितियों के बीच दिल्ली-मेरठ रोड पर प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख वाहनों का दबाव है, जिनकी संख्या सप्ताह के आखिरी दिनों और छुट्टियों के अवसर पर बढ़ जाती है।
विज्ञापन
2024 तक चलेगा रैपिड का काम
जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट स्पष्ट किया है कि दिल्ली-मेरठ रोड पर आरआरटीएस द्वारा रैपिड ट्रेन से जुड़े रूट का निर्माण किया जाना है, जिसका काम वर्ष 2024 तक चलेगा। इसके चलते आने वाले दिनों में सड़क पर चलना और बदतर हो जाएगा। आरआरटीएस सड़क चौड़ी करेगा, लेकिन उसके बाद भी वाहनों के लिए उतनी ही जगह मिलेगी, जो मौजूदा स्थिति में है। क्योंकि कांट्रेक्ट की शर्तों में उतनी ही चौड़ी रोड तैयार करके देने का प्रावधान है। उधर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण (़डासना-मेरठ) का काम पूरा होने में लंबा वक्त लगेगा। ऐसे में दिल्ली-मेरठ रोड को चार की जगह छह लेन किया जाना जरूरी है।
एनसीआरटीसी के साथ बैठक इसी सप्ताह
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर साइड बैरियर लगाकर काम बीच में छोड़ने पर भी प्रशासन गंभीर है। सोमवार को प्रशासन की तरफ से नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के अधिकारियों से बात की गई। उन्हें कहा गया कि वो दुहाई के आसपास सड़क चौड़ीकरण का काम तत्काल पूरा करें। अगर चौड़ीकरण में देरी हो रही है, तो फिर साइड बैरियर को हटा दें, जिससे वाहनों को पूरी सड़क मिल सके। उधर, प्रशासन ने इसी मुद्दे को लेकर सप्ताह के अंत में एनसीआरटीसी के अधिकारियों के साथ बैठक भी बुलाई है।
वर्जन
मौजूदा स्थिति को देखते हुए नया डायवर्जन प्लान लागूू कराया गया है। शुरुआत में ट्रायल के तौर पर नौ घंटे का डायवर्जन किया गया है। इसी बीच जाम की स्थिति को लेकर शासन को अवगत कराया है। साथ ही मुुख्यसचिव को प्रस्ताव भेजकर 200 करोड़ रुपये की मांग की है, जिससे दिल्ली-मेरठ रोड को छह लेन किया जा सके। - रितु माहेश्वरी, जिलाधिकारी